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यहां शिव बने थे बैल, विष्णु बच्चा बने, लक्ष्मी बनी थी बेर का पेड़

Dainik Bhaskar

Jun 19, 2013, 12:13 PM IST

बहुत रोचक और दिलचस्प कहानियां है भारत के इन प्रमुख तीर्थों की।

story of Kedarnath temple and Badrinath Temple
रिलिजन डेस्क. उत्तराखंड में आई भीषण तबाही से वहां के चार धाम की यात्रा रुक गई है। हजारों तीर्थ यात्री पहाड़ी रास्तों में फंसे हुए हैं। उत्तराखंड में भारत के प्रमुख चारधामों में से एक बद्रीनाथ, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदार नाथ, गंगा का उद्गम स्थल गंगोत्री और एक और तीर्थ यमुनोत्री हैं। ये चारों तीर्थ दुर्गम पहाड़ियों में बसे हैं फिर भी हर साल लाखों लोग इनके दर्शन के लिए जाते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थ का इतना अधिक महत्व क्यों हैं।

इन दोनों पवित्र चार धामों की ऊंचाई लगभग 3000 मीटर है। चार धामों की यात्रा की शुरुआत प्रमुख रुप से तीर्थ नगरी हरिद्वार से गंगा स्नान के साथ होती है। यहां से चार धामों की यात्रा का दायरा लगभग 1500 किलोमीटर है। हालांकि वर्तमान में टिहरी बांध के निर्माण के बाद से यमुनोत्री और गंगोत्री धाम की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर ज्यादा हुई है। किंतु पूर्व की तुलना में यमुनोत्री तक पहुंचने का सड़क मार्ग अब लगभग 10 किलोमीटर कम हो गया है।
पहले जहां बस या निजी वाहन हनुमान चट्टी तक ही पहुंच पाते थे, किंतु सड़क निर्माण के बाद यह जानकी चट्टी तक चले जाते हैं। जिससे अब यात्रा में अब लगभग चार या पांच किलोमीटर ही पैदल चलना होता है, जो पूर्व मे लगभग 15 किलोमीटर तक पैदल मार्ग था। इसके कारण चार धाम की यात्रा में भी एक या दो दिन की बचत हो जाती है। गंगोत्री तक भी सड़क मार्ग बना है। केदारनाथ की यात्रा की शुरुआत गौरीकुंड से होती है। यह यात्रा लगभग 15 से 20 किलोमीटर की पैदल यात्रा है। बद्रीनाथ धाम की यात्रा तुलनात्मक रुप से सुविधाजनक है।
जानिए केदारनाथ और बद्रीनाथ तीर्थ की रोचक कहानियां अगली स्लाइड्स में...
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