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शिवलिंग पूजा के दौरान ध्यान रखना चाहिए ये 4 बातें

शिवरात्रि पर इन 4 बातों का ध्यान रख शिवलिंग पूजा से फौरन शुभ फल मिलते हैं।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 03:49 PM IST
उज्जैन। पौराणिक मान्यताओं में शिवलिंग पूजा जीवन व मन से सारे कलह मिटाकर हर सुख देने वाली होती है। हर देव पूजा के समान शिवलिंग पूजा में भी श्रद्धा और आस्था की अहमियत है। इनके साथ ही शास्त्रोक्त नियम व संयम के मुताबिक शिवलिंग पूजा जल्द शुभ फल देने वाली भी मानी गई है। इन नियमों में एक है - शिवलिंग पूजा के वक़्त भक्त के बैठने की दिशा।
शिवपुराण के मुताबिक हिन्दू पंचांग के फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी पर दिव्य ज्योर्तिलिंग जगत कल्याण के लिए प्रकट हुआ था। 27 फरवरी को महाशिवरात्रि का वही शुभ काल आएगा। जानिए इस शुभ घड़ी में शिवलिंग पूजा के समय किस दिशा व जगह पर बैठने के अलावा किन 3 और खास बातों का ध्यान रखना कामनाओं को जल्द पूरा करने के नजरिए से विशेष फलदायी होता है -
- शिवलिंग से पूर्व दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि यह दिशा भगवान शिव के आगे या सामने होती है और धार्मिक दृष्टि से देव मूर्ति या प्रतिमा का सामना या रोक ठीक नहीं मानी गई है।
- शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठे। क्योंकि माना जाता है कि इस दिशा में भगवान शंकर का बायां अंग होता है, जो शक्तिरूपा देवी उमा का स्थान है।
- पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि वह भगवान शंकर की पीठ मानी जाती है, इसलिए पीछे से देवपूजा करना शुभ फल नहीं देती।
- इस तरह एक दिशा बचती है - वह है दक्षिण दिशा। इस दिशा में बैठकर पूजा फल और इच्छापूर्ति की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी जाती है। सरल अर्थ में शिवलिंग के दक्षिण दिशा की ओर बैठकर यानी उत्तर दिशा की ओर मुंह कर पूजा और अभिषेक शीघ्र फल देने वाला माना गया है।
यह भी वजह है कि उज्जैन के दक्षिणामुखी महाकाल और अन्य दक्षिणमुखी शिवलिंग पूजा का बहुत धार्मिक महत्व है। शिवलिंग पूजा में सही दिशा में बैठक के साथ ही शिव भक्त को तीन और बातें - भस्म का त्रिपुण्ड़् लगाना, रुद्राक्ष की माला पहनना और बिल्वपत्र चढ़ाना भी अवश्य करना चाहिए। अगर भस्म उपलब्ध न हो, तो मिट्टी से भी मस्तक पर त्रिपुण्ड्र लगाने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।