--Advertisement--

2 चमत्कारी देवी बीज मंत्र, परेशानियों का कर दे सूपड़ा साफ

शुक्रवार या हर रोज भी इन चमत्कारी देवी बीज मंत्रों के प्रभाव से परेशानियां मैदान छोड़ देती हैं।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 03:49 PM IST
रिलिजन डेस्क. धर्मशास्त्रों में देव स्मरण से सुखी जीवन के लिये मंत्र जप का बहुत महत्व बताया गया है। मन्त्र का शाब्दिक अर्थ मन के त्राण यानी दु:ख हरने वाला माना गया है। दु:खनाशक इन मंत्रो के अलग-अलग रूपों में अलग-अलग प्रभाव और फल होते हैं।
मंत्र के ऐसे ही पीड़ाहारी और असरदार रूप है बीज मंत्र। असल में बीज मंत्र देवशक्तियों का सूचक होता है, जिसमें देव विशेष की विराट शक्ति और गुण छुपे होते हैं। बीज मंत्रों के अक्षर, ध्वनि और स्वर द्वारा संबंधित देवशक्तियों को संकेत रूप में स्मरण कर जाग्रत किया जाता है। जिससे देव विशेष की शक्ति के मुताबिक प्रभाव उपासक को प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि श्रद्धा और आस्था से बीज मंत्रों के जप चमत्कारिक फल देने वाले माने गए हैं।
बीज मंत्रों की इस कड़ी में यहां बताए जा रह हैं, दुर्गा और काली के बीज मंत्र संकट और पीड़ानाशक बहुत ही असरदार माने गए हैं। जानते हैं इन मंत्रों और उनके अर्थ -
क्रीं - यह कालीबीज के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें क का अर्थ काली, र यानी प्रकृति, ई मतलब महामाया, नाद का अर्थ जगत माता, बिंदु यानी दु:खहर्ता। इस तरह बीज मंत्र का सार है महादेवी काली सभी दु:खों का नाश करे।
इस बीज मंत्र के साथ महाकाली की प्रसन्नता का नीचे लिखा मंत्र काल रक्षक माना गया है। इस मंत्र की सामान्य रूप से भी एक माला यानी 108 बार सुबह या शाम को जप घर को कलह और काल मुक्त रखता है।
क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा
दुं - यह दुर्गा बीज मंत्र है। जिसमें द यानी दुगर्तिनाशिनी, उ व नाद यानी रक्षा और बिंदु का अर्थ शोकनाशक है। पूरे बीज का सार है कि जगतजननी दुर्गा दुर्गति से रक्षा करे।
इस बीज मंत्र के साथ महादुर्गा का नीचे लिखे मंत्र का जप साधक को दु:ख-दरिद्रता से रक्षा करता है। शुक्रवार के दिन देवी की सामान्य पूजा यानी गंध, अक्षत, फूल, नैवेद्य और धूप, दीप से पूजा कर नीचे लिखे मंत्र का यथाशक्ति जप मातृशक्ति को प्रसन्न करने वाला माना गया है -
ऊँ ह्रीं दुं दुर्गायै नम: