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PAT- 2013:जानिए एग्जाम पैटर्न और कॉलेजेज की फीस

8 वर्ष पहले
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तीन राज्यों के एग्रीकल्चर कॉलेजों के लिए एंट्रेंस टेस्ट
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के गवर्नमेंट और प्राइवेट एग्रीकल्चर कॉलेजों में प्रवेश के लिए मई और जून महीने में परीक्षा होगी। मप्र में बीटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) कोर्स में भी इसके जरिए प्रवेश मिलेगा। वहीं राजस्थान में एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर और होम साइंस के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए भी इसके साथ ही जेईटी आयोजित होगा।
कम्पीटिशन
राज्य सीटें आवेदक
मध्यप्रदेश 660 25 हजार
छत्तीसगढ़ 1172 30 हजार
राजस्थान 1080 30 हजार
परीक्षा: 26 मई (मप्र), 23 मई (छग), 2 जून (राज.)
एलिजिबिलिटी
मध्यप्रदेश
बीटेक के लिए पीसीएम। बाकी के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स/बायोलॉजी/एग्रीकल्चर।
छत्तीसगढ़
एग्रीकल्चर, बायोलॉजी या मैथ्स में 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा पास।
राजस्थान
फिजिक्स, केमिस्ट्री, एग्रीकल्चर, बायोलॉजी या मैथ्स के साथ 12वीं की परीक्षा में 5क्% अंक।
रिजल्ट : जून - 2013
एग्जाम पैटर्न
मप्र में एग्रीकल्चर कोर्सेस के लिए फिजिक्स में ५क्, केमिस्ट्री में ५क् और एग्रीकल्चर के 100 प्रश्न होते हैं।
छत्तीसगढ़ में 2 घंटे की परीक्षा होती है। इसमें 200 अंकों के मल्टीपल चॉइस वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।
राजस्थान में 3 घंटे की परीक्षा में एग्रीकल्चर, बायो, मैथ्स, केमिस्ट्री व फिजिक्स में से कोई तीन सॉल्व करना होता है।
फीस : मप्र के सरकारी कॉलेजों में जनरल सीट के लिए फीस 1200-1800 रु. सालाना और पेमेंट सीट्स के लिए 35 हजार रु. सालाना है। राजस्थान में सरकारी कॉलेजों में पहले सेमेस्टर की 8 हजार रु. और बाद के प्रत्येक सेमेस्टर की फीस 5 हजार रु. है। वहीं छत्तीसगढ़ में सरकारी कॉलेजों में करीब 4500 रु. और प्राइवेट में 20 हजार रु. सालाना है।
कम खर्च में पढ़ाई, नौकरी भरपूर
एग्रीकल्चर कोर्स के लिए बायोलॉजी या मैथ्स के साथ 12वीं करने वाले छात्र योग्य होते हैं। एमबीबीएस या इंजीनियरिंग कोर्सेस की फीस लाखों में होती है, जबकि एग्रीकल्चर कोर्स की फीस इसके मुकाबले काफी कम होती है। वहीं कोर्स पूरा करने के बाद सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी की भरपूर संभावनाएं होती हैं। २क्१२ में छत्तीसगढ़ में सरकारी और निजी कॉलेजों की सारी सीटें तीन दिन में ही भर गई थीं। इसके बाद सीटों की संख्या 25 प्रतिशत बढ़ाई गई, लेकिन ये भी अगले दिन ही भर गईं।
नॉलेज
ग्रीन, व्हाइट और ब्लू रिवॉल्यूशन ने बदली तस्वीर
-भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार एग्रीकल्चर है, लेकिन देश में कृषि उत्पादकता काफी कम थी। मेक्सिको में हरित क्रांति की तर्ज पर १९६५ के बाद भारत में भी कृषि में उन्नत किस्म के बीज और फर्टिलाइजर का उपयोग शुरू हुआ जिससे खाद्यान्न उत्पादन में देश आत्मनिर्भर बना। 1९७क् में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा शुरू किए गए व्हाइट रिवॉल्यूशन के बूते दूध उत्पादन में भारत पूरी दुनिया में शीर्ष पर पहुंचा। इसी तरह १९७३ में शुरू हुए ब्लू रिवॉल्यूशन से मछली उत्पादन छह लाख टन से बढ़कर ५क् लाख टन के स्तर पर पहुंच गया।
रोचक
गाय के दूध से जल्दी पचता है बकरी का दूध
- शरीर के अंदर पाचन क्रिया के दौरान गाय के दूध को पचने में एक घंटे का समय लगता है जबकि बकरी के दूध को केवल 20 मिनट।
- एक गैलन आइसक्रीम बनाने के लिए करीब १.४ गैलन दूध की जरूरत होती है।
- ऊंटनी के दूध में इन्सुलिन और एंटीबॉडीज ज्यादा होते हैं और यह डायबिटिज सहित दूसरी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
भास्कर एक्सपर्ट पैनल
डॉ. ओ पी कश्यप
डीन, इंदिरा गांधी एग्रीकल्चर
कॉलेज, रायपुर
कॉलेज में आने के बाद सिलेबस के साथ छात्रों की पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाता है। हर महीने विशेष कक्षाएं, वर्कशॉप व सेमिनार के माध्यम से इन्हें जानकारी दी जाती है कि एग्रीकल्चर में किस तरह का स्कोप है। थ्योरी के अलावा प्रैक्टिकल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्हें क्षेत्र के भ्रमण पर भेजा जाता है। चार साल के कोर्स में तीसरे साल पूरी तरह से छात्र फील्ड से जुड़ जाते हैं। इसी तरह छात्रों को खुद से प्रोडक्ट बनाकर उसे बेचने की ट्रेनिंग दी जाती है। जैसे शरबत बनाना, नर्सरी प्लांट और मधुमक्खी पालन इत्यादि। इनसे जो कमाई होती है उसमें से आधे पैसे कॉलेज को और आधे छात्रों में बांटे जाते हैं। एग्रीकल्चर के क्षेत्रों में वर्तमान समय में सीड, फर्टिलाइजर, एनजीओ, बैंकिंग सेक्टर सहित अन्य जगह काफी नौकरियां हैं। बीएससी के बाद लगभग सभी छात्रों को नौकरी मिल जाती है।