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AIPVT-2013:जानिए दाखिले के लिए कब होगी परीक्षा

8 वर्ष पहले
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वेटरनरी, एनिमल हस्बेंडरी कोर्स के लिए टेस्ट
देश भर के कॉलेजेस में वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हस्बेंडरी (बीवीएससी एंड एएच) और एनिमल हस्बेंडरी के डिग्री कोर्स में प्रवेश के लिए ऑल इंडिया प्री-वेटरनरी टेस्ट (एआईपीवीटी) 11 मई को होगा।
कम्पीटिशन
23 वेट. कॉलेज
20 हजार आवेदक (लगभग)
कोर्स ड्यूरेशन दोनों कोर्स के लिए पांच साल
एलिजिबिलिटी
12वीं की परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और इंग्लिश के साथ जनरल कैटेगरी छात्र के लिए 50% और एससी/एसटी छात्र के लिए 40% अंक जरूरी। उम्र 17 साल से कम न हो।
रिजल्ट: जून 2013
फीस :
हर वेटरनरी कॉलेज में बीवीएससी और एएच कोर्सेस की फीस अलग है। राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरनरी एजुकेशन एंड रिसर्च, पुडुचेरी में एडमिशन के समय 15 हजार 700 रु. फीस देनी होती है। सालाना ट्यूशन फीस दस हजार रु. है। वहीं गुरु आनंद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना में एडमिशन फीस करीब 30 हजार रु . है।
15 फीसदी सीटों के लिए होगा टेस्ट
वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एआईपीवीटी एग्जाम के जरिए छात्रों को देश के 23 वेटरनरी कॉलेजों में एडमिशन मिलेगा। इस एग्जाम के लिए हर वेटरनरी कॉलेज में बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस और एनिमल हस्बेंडरी कोर्सेस में 15% सीटें मौजूद हैं। बाकी सीटों के लिए कॉलेज खुद की एंट्रेंस एग्जाम लेंगे।
एग्जाम पैटर्न
तीन घंटे के एग्जाम में 200 ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल रहेंगे। सिलेबस 11वीं और 12वीं का होगा। फिजिक्स और केमिस्ट्री के 60-60 सवाल और बायोलॉजी के 80 सवाल रहेंगे। इसमें जूलॉजी और बॉटनी के सवाल पूछे जाएंगे। माइनस मार्किग नहीं होगी। इसमें रीजनिंग के क्वेशचन्स भी होंगे।
नॉलेज
वैदिक काल से ही मौजूद है वेटरनरी साइंस
वेटरनरी साइंस की शुरुआत वैदिक काल में ही हो गई थी। अथर्व वेद में घोड़े और हाथी की देखभाल और उनके बीमार पड़ने पर इलाज की जानकारी दी गई है।
सम्राट अशोक के शासनकाल में पशु और इंसान के अस्पताल पास-पास होते थे। पशुओं के डॉक्टर कुछेक ऐसे लोगों में शामिल थे जिन्हें शासक की ओर से जमीन का पट्टा मिलता था।
स्रोत: डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हस्बेंडरी, डेयरिंग एंड फिशरीज
रोचक
अनोखी दुनिया जानवरों की
शुतुरमुर्ग की आंख की साइज उसके दिमाग से भी बड़ी होती है।
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डॉल्फिन अपने आप सांस नहीं ले सकतीं। उन्हें सांस लेने के लिए खुद मेहनत करनी पड़ती है और सचेत होना पड़ता है कि हमें सांस लेना है। इसलिए वे कभी गहरी नींद में नहीं सोतीं।
भास्कर एक्सपर्ट पैनल
डॉ. डी के सिंह द्रोण एडिशनल डायरेक्टर (रिसर्च), बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, रांची
इन कोर्सेस में टीचिंग के दौरान थ्योरी, प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट वर्क कराए जाते हैं। क्लासेस इंटरएक्टिव होती हैं। ज्यादा जोर प्रैक्टिकल पर रहता है। वेटरनरी ओपीडी में मिली प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और बीमार पशुओं को अटेंड करने में सहयोगी के तौर पर कार्य करने पर स्टूडेंट्स का आत्मविश्वास व अनुभव बढ़ता है। देश में पहली बार गाय की अर्ली प्रेग्नेंसी डायग्नोसिस तकनीक विकसित करने के दौरान इस काम में लगी टीम लगातार दो साल तक आठ से दस घंटे
तक लैब में रहती थी। इसके बाद ही गाय के गर्भाधान की जांच 21 दिनों में स्ट्राइप पर दूध लेकर किया जाना संभव हो सका है। पशुओं से जुड़े शोध कार्य के दौरान कई बार ऐसा भी होता है कि स्टूडेंट्स व शिक्षक 24 से 48 घंटे तक लैब में रुक जाते हैं। यहीं के छात्र रहे डॉ. संत कुमार सिंह एवं उनकी टीम ने सूकर की टीएंडी (टैम वर्थ एंड देशी) नस्ल विकसित की जिसकी आज राष्ट्रीय पहचान है। इसके लिए इन्हें डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद अवॉर्ड मिल चुका है।
इंटरेस्टिंग कोट
“Until one has loved an animal, a part of one's soul remains unawakened.” ― Anatole France
जब तक आप किसी जानवर से प्यार नहीं करेंगे, आपकी आत्मा का एक अंश जागृत नहीं होगा।