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जीपैट-2013: जानिए एग्जाम पैटर्न और परीक्षा की तिथि

8 वर्ष पहले
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फार्मेसी के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए परीक्षा
एआईसीटीई के पोस्ट ग्रेजुएट फार्मेसी कोर्सेस में एडमिशन के लिए होने वाला ग्रेजुएट फार्मेसी एप्टीट्यूड टेस्ट (जीपैट) 16, 17 और 18 मई को होगा।
कम्पीटिशन
132 3 लाख
फार्मा कॉलेज आवेदक
कोर्स ड्यूरेशन
2 साल
एलिजिबिलिटी
फार्मेसी के चार साल के कोर्स की डिग्री। साथ ही जो छात्र बी.फार्मा के फाइनल ईयर में हैं, वे भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
रिजल्ट: 31 मई 2013
फीस : हर फार्मा कॉलेज का फी स्ट्रक्चर अलग है। जामिया हमदर्द और निरमा यूनिवर्सिटी में एम.फार्मा की सालाना फीस 90 हजार रु. है। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में पूरे एम. फार्मा कोर्स की फीस केवल 75 हजार रु. है।
राज्य सरकार बनाएगी मेरिट लिस्ट
इस साल पहली बार जीपैट ऑनलाइन मोड में देश के 57 शहरों में होगी। रिजल्ट के बाद एआईसीटीई छात्रों का चयन मेरिट लिस्ट के आधार पर करेगा। सिलेक्शन प्रोसेस हर राज्य की सरकार द्वारा किया जाएगा। मेरिट लिस्ट के आधार पर छात्रों को फार्मा कॉलेजों में प्रवेश मिलेगा। जीपैट स्कोर कार्ड एक साल तक मान्य रहेगा।
एग्जाम पैटर्न
तीन घंटे के ऑनलाइन कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट में 125 सवाल पूछे जाएंगे। सभी सवाल मल्टीपल चाइॅस रहेंगे जिनमें चार ऑप्शन दिए जाएंगे। सही जवाब के लिए चार अंक दिए जाएंगे। गलत जवाब के लिए एक अंक काटा जाएगा।
नॉलेज
भारत से हुई फार्मेसी की शुरुआत
-दुनिया में सबसे पहला मेडिकल कम्पाइलेशन भारत में ही सुश्रुत संहिता के रूप में बना। ये किताबें सुश्रुत मुनि और चरक मुनि ने छठी शताब्दी में लिखी थी।
-फार्मेसी से दो चिन्ह काफी देशों में जुड़े हैं। इनमें से एक है मॉर्टर एंड पेस्टल और दूसरा रेसिपियर जिसे टाइप कर के आरएक्स लिखा जाता है। हालांकि 20वीं सदी तक शो ग्लोब भी फार्मेसी के चिन्ह के रूप में कई देशों में इस्तेमाल किया जाता था।
रोचक
बीमारियों के अनूठे इलाज के दावे
- 1972 में कुछ वैज्ञानिकों ने दावा किया कि पैर के अंगूठे को बर्फ में जमाने से जुकाम दूर हो सकता है।
- 1830 में केचअप (टॉमैटो केचअप) को कई बीमारियों के लिए दवा के रूप में बेचा जाता था।
- एक्यूपंचरिस्ट्स के मुताबिक भूख पर नियंत्रण के लिए कान के पिछले हिस्से को दबाने से फायदा होता है।
भास्कर एक्सपर्ट पैनल
प्रोफेसर डीएन मिश्रा, हिसार
डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी, गुरु जंभेश्वर विवि
धर्य और निरंतरता से मिलती है सफलता
फार्मेसी एक ऐसा कॅरिअर है, जहां निरंतर शोध चलता रहता है। इसलिए पूरा कोर्स थ्योरी की बजाए प्रैक्टिकल बेस्ड होता है। ऐसे में स्टूडेंट्स को घंटों काम करना पड़ता है। कई बार तो बार बार एक्सपेरिमेंट के बाद भी रिजल्ट नहीं निकलता, ऐसे में धैर्य और निरंतर काम करने वाले स्टूडेंट्स ही अच्छा करियर बना पाते हैं। एम फार्मेसी में मुख्य रूप से चार तरह की स्पेशलाइजेशन है।
वर्तमान दौर में इसमें सबसे अधिक फार्माक्यूपिच स्पेशलाइजेशन की जबरदस्त डिमांड है। इसमें प्रचलित दवाइयों के फार्मूले को डेवलप किया जाता है। इसके स्टूडेंट्स को रेनबेक्सी और डॉ. रेडिज जैसी नामी फार्मा एंड रिसर्च कंपनियों में अच्छे पैकेज पर आसानी से जॉब मिल जाती है। जिस तरह से बीमारियां बढ़ रही है, उनके कंट्रोल के लिए भी विशेषज्ञों की डिमांड निरंतर बनी हुई है।
शोध के साथ साथ एकेडमिक तौर पर भी एम फार्मेसी में जबरदस्त स्कोप है। स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में भी ड्रग्स स्पेशलिस्ट की जबरदस्त डिमांड है।