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करियर कोच : अनौपचारिक रेज्यूमे की तरह है सोशल पेंजेंस, पढ़ें

7 वर्ष पहले
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नौकरी की तलाश में बेशक सोशल मीडिया का इस्तेमाल पुराना हो चुका है, लेकिन इससे जुड़े ट्रेंड अक्सर बदलते रहते हैं। सोशल नेटवर्क्स पर आपकी ऑनलाइन उपस्थिति किस तरह आपको सलेक्ट या रिजेक्ट करवा सकती है यह जानकारी जॉब हंटिंग के साथ-साथ नौकरी हासिल करने में भी मदद कर सकती है।
जॉब हंटिंग के प्रभावशाली टूल्स में सोशल मीडिया काफी पहले ही शामिल हो चुका है। दूसरी ओर कंपनियां भी अपने भावी कर्मचारियों के बारे में जानने और उन्हें नियुक्त करने के लिए सर्च इंजंस को खंगालती रहती हैं। अनेक अध्ययन और रिसर्च इस तथ्य को साबित कर चुके हैं। एग्जी क्यू नेट की रिसर्च बताती है कि 90 प्रतिशत एग्जीक्युटिव रिक्रूटर्स का कहना है कि वे अपने भावी कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन रिसर्च करते हैं।
इनमें से 70 प्रतिशत नियोक्ताओं ने स्वीकारा कि ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर ही उन्होंने किसी उम्मीदवार को नौकरी देने या न देने का फैसला लिया था जबकि 27 प्रतिशत ने जॉब ढूंढ़ने वालों को अपनी ऑनलाइन उपस्थिति यानी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ब्लॉग पोस्ट और फोटो पर बात करने का मौका देते हुए यह फैसला लिया था। इसका मतलब है कि नौकरी खोजने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू की तैयारी से पहले अपनी ऑनलाइन छवि की पड़ताल और सार-संभाल करनी चाहिए।
दी एचआर प्रैक्टिस एंड दी सर्च प्रैक्टिस की संस्थापक अनुराधा शर्मा के अनुसार, आपकी सोशल प्रेजेंस आपका अनौपचारिक रेज्यूमे होता है, जिसकी मदद से नियोक्ता आपको समझ सकता है। वैसे भी अब रेफरेंस पर कॉल करके किसी उम्मीदवार के बारे में जानकारी जुटाने का चलन नहीं रहा। नियोक्ता आपकी सोशल प्रेजेंस के जरिए आपको सलेक्ट या रिजेक्ट करने का फैसला ले
सकते हैं।
ऐसे में संदेह युक्त कंटेंट और सोशल मीडिया कमेंट्स किसी भी काबिल उम्मीदवार को नौकरी की दौड़ से बाहर कर सकते हैं, वहीं टेक्नो सैवी कैंडिडेट अपनी सकारात्मक डिजिटल उपस्थिति से फायदा ले सकता है। जानिए किस तरह आप अपनी ऑनलाइन प्रतिष्ठा को काम में लेते हुए नौकरी हासिल करने में सफल हो सकते हैं।
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