(सांकेतिक फोटो)
दूध के उत्पादन और खपत में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है। देश में सालाना करीब 13.5 करोड़ टन दूध का उत्पादन होता है और दुनियाभर में दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 16 फीसदी है। देश की डेयरी इंडस्ट्री की कुल मार्केट वैल्यू करीब 2.6 खरब रुपए है और 2015 तक इसके बढ़कर 3.7 खरब होने का अनुमान है। एसोचैम के अनुसार डेयरी इंडस्ट्री सालाना 4.2 फीसदी की दर से बढ़ रही है, लेकिन इसे 6 फीसदी के स्तर पर लाने की जरूरत है। इसके अलावा देश की डेयरी इंडस्ट्री अभी भी असंगठित और पुरानी तकनीकों पर आधारित है।
फिलहाल, करीब 9 करोड़ लोगों के लिए डेयरी इंडस्ट्री रोजगार का जरिया है, लेकिन सरकारी प्रोत्साहन के चलते इस क्षेत्र में रोजगार और आंत्रप्रेन्योरशिप के मौके बढ़ रहे हैं। डेयरी टेक्नोलॉजी छात्रों के लिए एक बेहतर विकल्प है, क्योंकि 2020 तक इस फील्ड में करीब चार लाख नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।
डेयरी इंडस्ट्री में को-ऑपरेटिव और प्राइवेट डेयरी की आधी से ज्यादा हिस्सेदारी
देश में डेयरी इंडस्ट्री के विकास में आॅपरेशन फ्लड की सबसे अहम भूमिका रही है। 1970 में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा शुरू किए इस प्रोजेक्ट के चलते ही भारत दूध उत्पादन में शीर्ष स्थान हासिल कर सका है। 1971 से 1996 तक डेयरी इंडस्ट्री के विकास में सहकारी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 1991 में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद डेयरी इंडस्ट्री में प्राइवेट सेक्टर का प्रवेश हुआ। इससे इंडस्ट्री का विकास और तेज हुआ। हालांकि, देश के ऑर्गेनाइज्ड डेयरी मार्केट में अभी भी को-आॅपरेटिव्स की 55-60 फीसदी हिस्सेदारी है। अकेले अमूल ग्रुप का ही करीब एक-तिहाई मार्केट पर कब्जा है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए: अलग-अलग क्षेत्रों में हैं नौकरी के अवसर