(सांकेतिक फोटो)
ऑक्यूपेशनल थैरेपी एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की मांग आपूर्ति से कई गुना ज्यादा है। ऑक्यूपेशनल थेरैपिस्ट की मांग भारत के साथ विदेशों में भी बड़े पैमाने पर की जा रही है।
डॉक्टर, नर्स और फिजियोथैरेपिस्ट्स के अलावा हेल्थ प्रोफेशनल्स की एक और कैटेगरी है जो रोगियों को अपने पैरों पर फिर से खड़ा करने में सहायता प्रदान करती है। ये कैटेगरी है ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट की। ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट मानसिक या शारीरिक रोग या अक्षमता से ग्रस्त लोगों की सहायता करके उन्हें सामान्य जीवन जीने और जितना संभव हो सक्रिय बनाने का प्रयास करते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट लोगों को जीवन जीने की स्किल्स सिखाते हंै जो एक उद्देश्यपूर्ण और संतोषजनक जीवन जीने के लिए जरूरी हैं।
ये रोगियों को सेंसरी, मोटर, परसेप्चुअल और कॉग्नेटिव एक्टिविटीज के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के सामान्य कार्य करने और काम पर लौटने में सक्षम बनाते हैं। ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट कई तरह के रोगों और डिसऑर्डर्स के उपचार में अपनी भूमिका निभाते हैं जिनमें देरी से होने वाला विकास, लर्निंग डिसऑर्डर, ऑटिज्म, लकवा, रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क की चोट, आर्थराइटिस, डिप्रेशन, शिजोफ्रेनिया, डिमेंशिया और पार्किंसन्स जैसी समस्याएं शामिल हैं।
क्या चाहिए योग्यता
फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में बारहवीं के बाद ऑक्यूपेशनल थैरेपी के कोर्स में प्रवेश पाया जा सकता है। कई संस्थान प्रवेश परीक्षा में उम्मीदवार के प्रदर्शन के आधार पर दाखिला देते हैं। ऑक्यूपेशनल थैरेपी एजुकेशन प्रोग्राम इन इंडिया को ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट एसोसिएशन (एआईओटीए) और वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट्स से मान्यता प्राप्त है। ग्रेजुएशन के स्तर पर इस कोर्स को बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थैरेपी कहा जाता है जो साढ़े चार वर्ष की अवधि का होता है। वहीं मास्टर्स इन ऑक्यूपेशनल थैरेपी 2 या 3 वर्ष का होता है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए किन क्षेत्रों में है काम के मौके...