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साइबर लॉ : प्रोफेशनल्स की मांग में तेजी, करियर का उभरता विकल्प

6 वर्ष पहले
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(सांकेतिक फोटो)
डिजिटल इंफॉर्मेशन और कम्यूनिकेशन की आधुिनक तकनीकों ने कानून के एक नए क्षेत्र को जन्म दिया है। आमतौर पर हम इसे इंफॉर्मेशन एंड कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी यानी साइबर लॉ के नाम से भी जानते हैं। साइबर स्पेस के तेजी से हो रहे विस्तार के चलते इससे जुड़े कानूनी पहलू बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। साइबर स्पेस से जुड़ी ऐसी ही जटिल और नई कानूनी समस्याओं को सुलझाने में मदद करने के लिए कानून की विशेष शाखा साइबर लॉ का जन्म हुआ। (एजुकेशन और करियर से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)
>> एसोचैम -महिन्द्रा एसएसजी की जाॅइंट स्टडी ‘साइबर एंड नेटवर्क सिक्योरिटी’ के अनुसार भारत में 2015 में साइबर क्राइम के मामले 3,00,000 के आंकड़े को पार कर सकते हैं जो पिछले वर्ष की संख्या से दोगुने हैं। स्टडी में यह भी कहा गया कि देश में हर माह लगभग 12,456 केस दर्ज किए जाते हैं।
एक साइबर लॉयर को हैकिंग, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड्स जैसे मामलों का निपटारा करने, बिजनेस ट्रांजेक्शन्स को सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से डिजिटल हस्ताक्षर की सुरक्षा करने जैसे काम करने होते हैं। इसके अलावा वह इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ, कॉपीराइट्स, सॉफ्टवेयर पेटेंट्स और नेट बैंकिंग से जुड़े मामले भी सुलझाता है। इसके साथ ही साइबर लॉ लीगल ट्रेनिंग और कॉर्पोरेट मैनेजमेंट का भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्वरूप है। लीगल और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स भी नियमित रूप से साइबर ट्रेनिंग के लिए आवेदन करते हैं। वर्तमान में साइबर लॉ शिक्षा के ट्रेंड्स को देखकर यह कहा जा सकता है कि भविष्य में ऑनलाइन साइबर लॉ शिक्षा के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।
क्या चाहिए योग्यता
एक साइबर लॉयर के तौर पर करियर बनाने के लिए आपको टेक्नो फ्रेंडली होने के साथ ही पर्सनल लॉ, टेलीकॉम लॉ, कम्पनी लॉ और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ जैसे कानूनों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए। साइबर लॉ मे फिलहाल बहुत सारे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कोर्स उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ कोर्स आप ऑफलाइन कर सकते हैं और कुछ के लिए ऑनलाइन की सुविधा भी है। साइबर लॉ प्रोग्राम में प्रवेश के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री का होना आवश्यक है। वहीं अगर आप साइबर लॉ के पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम में एडमिशन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास एलएलबी की डिग्री का होना जरूरी है। साइबर लॉ के कोर्स की न्यूनतम अवधि 6 महीने और अधिकतम 2 साल होती है।
यहां से कर सकते हैं पढ़ाई
>> इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, दिल्ली
>> एनएएलएसएआर, हैदराबाद
>> नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया, यूनिवर्सिटी ऑफ बेंगलुरु
>> सिम्बायोसिस सोसाइटी लॉ कॉलेज, पुणे
>> एमिटी लॉ स्कूल, दिल्ली
>> डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी
ऐसे मिलते हैं काम के अवसर
तकनीकी विकास ने साइबर वर्ल्ड को जन्म दिया है। इसी साइबर वर्ल्ड में साइबर स्पेस भी आता है , जिसमें आए दिन सूचना तकनीक के क्षेत्र में नए-नए बदलाव हो रहे हैं। सूचना और संचार तकनीकी के क्षेत्र में इस बढ़ती ग्रोथ ने साइबर लॉ के क्षेत्र में भी नए ट्रेंड्स और चुनौतियों को जन्म दिया है। यही वजह है कि आज इस क्षेत्र में छात्रों के लिए कई अवसर मौजूद हैं। अगर आपने साइबर लॉ की पढ़ाई की है तो एक वकील के तौर पर काम करने के अलावा आप आईटी फर्म, पुलिस विभाग और बैंकों में साइबर कंसल्टेंट के तौर पर भी काम कर सकते हैं। इसके साथ आप किसी लॉ या टेक्नोलॉजी फर्म में रिसर्च असीस्टेंट, वेब डेवलपर्स के एडवाइजर के तौर पर और सूचना और तकनीक मंत्रालय में सलाहकार के तौर पर भी काम कर सकते हैं। यही नहीं कॉर्पोरेट हाउसेज में भी साइबर सलाहकारों की जरूरत होती है। वहीं टेक्नोलॉजी फर्म्स में भी सिक्योरिटी ऑडिटर्स और नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर्स की जरूरत होती है, जहां साइबर लॉ का कोर्स करने के बाद करियर की शुरुआत की जा सकती है।
शुरुआती वेतन पैकेज
एक सॉलिसिटर फर्म में साइबर लॉयर की शुरुआती आय 15,000 से 25,000 रुपए प्रतिमाह के बीच हो सकती है। वहीं कार्पोरेट और लॉ फर्मों में काम करने वाले लॉयर के तौर पर आप 40,000 रुपए प्रतिमाह के वेतन से शुरुआत कर सकते हैं।