(सांकेतिक फोटो)
मल्टीमीडिया और एनिमेशन सेग्मेंट देश के बड़े उद्योग के रूप में उभर कर सामने आ रहे हैं। एनिमेशन के बढ़ते दायरे की वजह से इस उद्योग में सालाना 30 से 35 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। फिल्मों से लेकर टेलीविजन उद्योग में एनिमेटेड फिल्मों की मांग तेजी से बढ़ रही है। आंकड़े दर्शा रहे हैं कि भारतीय गेमिंग व विजुअल इफेक्ट्स इंडस्ट्री अगले वर्ष तक 1500 करोड़ रुपए से अधिक का आकार ले लेगी।
दरअसल ये सब डिजिटल ग्राफिक टेक्नोलॉजी का हिस्सा हैं। डिजिटल ग्राफिक टेक्नोलॉजी एक तरह से विजुअल इफेक्ट्स, ग्राफिकआर्ट, एनिमेशन, गेम्स और मल्टीमीडिया का मिला-जुला रूप है। अगर आप रचनात्मक हैं और कुछ नया करना चाहते हैं तो इस क्षेत्र में करियर बेहतरीन साबित होगा। इसके लिए आपको अपने शौक के अनुसार एक विधा चुननी होगी-
मल्टीमीडिया और एनिमेशन : टेक्स्ट, एनिमेशन, ग्राफिक्स, साउंड, वीडियो आदि का मिलाजुला रूप मल्टीमीडिया है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि ऑडियो-वीडियो को
खूबसूरती से पेश करना ही मल्टीमीडिया का असल काम है। इसी का एक अन्य प्रमुख अंग है एनिमेशन, जिसमें डिजाइन, ड्रॉइंग, ग्राफिक्स, लेआउट और फोटोग्राफी को खूबसूरती से एक सूत्र में पिरोया जाता है।
ग्राफिक डिजाइन : ग्राफिक डिजाइनिंग का मतलब किसी कंटेंट को विजुअल इंपैक्ट देना है, जिससे वह दिखने में आकर्षक लगे। सही मायनों में ग्राफिक डिजाइन वह आर्ट है जिसमें टेक्स्ट और ग्राफिक के द्वारा किसी संदेश को लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाता है। ये संदेश ग्राफिक, लोगो, ब्रोशर, न्यूज लेटर, पोस्टर या फिर किसी भी रूप में हो सकते हैं।
विजुअल इफेक्ट्स : फिल्मों में जो दृश्य साधारणतया कैमरे द्वारा नहीं फिल्माए जा सकते, उन्हें फिल्माने के लिए हाई टेक्नोलॉजी कैमरे, सॉफ्टवेयर और इंस्ट्रूमेंट का प्रयोग किया जाता है। इसी तकनीक को विजुअल इफेक्ट या वीएफएक्स कहते हैं।
गेम्स इंडस्ट्री : वीडियो गेम डिजाइनिंग में करियर बनाने के लिए रचनात्मक अभिरुचि के अलावा कम्प्यूटर गेम खेलने का शौक भी होना चाहिए। गेम के निर्माण में कलात्मक प्रतिभा, दिमागी कौशल के साथ धैर्य का होना भी बहुत आवश्यक है।
क्या पढ़ना होगा : ग्राफिक डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स, मल्टीमीडिया और एनिमेशन में बैचलर डिग्री, डिप्लोमा और एडवांस स्तर के कई कोर्स उपलब्ध हैं। इनमें दाखिले के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से बारहवीं पास होना जरूरी है। इस कोर्स में पीजी प्रोग्राम में दाखिले के लिए किसी भी विषय में बैचलर डिग्री आवश्यक है। इसके अलावा बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स इन डिजिटल ग्राफिक टेक्नोलॉजी, बैचलर इन मल्टीमीडिया, बैचलर इन एनिमेशन,बैचलर इन डिजिटिल मीडिया, बैचलर इन विजुअल कम्यूनिकेशन, डिप्लोमा इन मल्टीमीडिया एंड एनिमेशन जैसे कोर्स व डिग्री के साथ इस क्ष्रेत्र में कदम बढ़ा सकते हैं।
योग्यता : इन सभी क्षेत्रों में कामयाबी पाने के लिए रचनात्मकता जरूरी है। इसके अतिरिक्त ग्राफिक्स में रुचि, कम्प्यूटर की जानकारी, स्क्रिप्ट के अनुसार चरित्रों को गढ़ने का हुनर, बेहतर व्यक्तित्व, गणितीय समझ, विश्लेषण करने की क्षमता, कलात्मकता और कम्युनिकेशन स्किल भी जरूरी है।
शुरुआती वेतन : 15,000 रुपए प्रतिमाह से यहां शुरुआत की जा सकती है। शुरुआत में औसतन दो से तीन लाख रुपए सालाना का वेतन पेशेवरों को मिलता है। दो-तीन साल के अनुभव के बाद आप 4 से 6 लाख रुपए कमा सकते हैं। अनुभव के आधार पर काम की मांग जैसे-जैसे बढ़ती है, कमाई भी उसी अनुपात में अपना दायरा बढ़ाती जाती है।
यहां से कर सकते हैं कोर्स
- इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटी, मुंबई
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
- एरिना एनिमेशन एकेडमी, नई दिल्ली
- जी इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव आर्ट्स, मुंबई
- द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर
- सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पुणे