(सांकेतिक फोटो)
बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में बायोलॉजी और मेडिसिन से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए इंजीनियरिंग की विधियों को लागू किया जाता है। यह एक विस्तृत क्षेत्र है जहां साइंस, मेडिसिन और मैथ्स का समन्वय होता है। बायोमेडिकल इंजीनियर्स अपनी विभिन्न प्रकार की विशेषज्ञता का इस्तेमाल नए चिकित्सकीय यंत्र और उपकरण बनाने, मानव शरीर की संरचना को समझने और मरम्मत करने में इंजीनियरिंग के सिद्धांतों को लागू करने के साथ-साथ निर्णय लेने और लागत पर नियंत्रण रखने के लिए करते हैं।
बायोमेडिकल इंजीनियर को इलेक्ट्रिकल, मेकेनिकल या केमिकल इंजीनियरिंग जैसे पारंपरिक विषयों में अपनी नींव को मजबूत बनाना होता है। ये एमआरआई जैसे बड़े आकार की मशीन से लेकर सर्जरी में काम आने वाली माइक्रोस्कोपिक मशीन को डिजाइन करते हैं। यही नहीं ये रिसर्च करके सर्जरी को डेवलप करते हैं, कृत्रिम अंगों के उपयोग का मूल्यांकन करते हैं और अस्पतालों व क्लीनिक में उपयोग आने वाले यंत्रों में सुधार करने का काम करते हैं।
मांग में हो रही है लगातार वृद्धि : समय के साथ कम लागत वाले मेडिकल उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ बायोमेडिकल इंजीनियर्स की मांग में भी वृद्धि दर्ज हो रही है, खासतौर से फार्मास्यूटिकल मैन्यूफैक्चरिंग और रिसर्च के क्षेत्र में। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की फील्ड में बायोइंस्ट्रूमेंटेशन, बायोमेकेनिक्स, बायोमटीरियल, सिस्टम फिजियोलॉजी, क्लीनिकल इंजीनियरिंग और रीहैबिलिटेशन इंजीनियरिंग जैसे स्पेशिएलिटी क्षेत्रों में भी संभावनाएं प्रबल हैं।
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- लेखिका उषा अल्बुकर्क, करियर स्मार्ट लिमिटेड की निदेशिका हैं।