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7 Accidental Discoveries: बना रहे थे हार्ट अटैक की दवा, बन गई वियाग्रा

दुनिया में कई चीजें ऐसी आई हैं, जिन्होंने न सिर्फ हमारी लाइफ-स्टाइल बदली है, बल्कि हमारे बहुत काम भी आई हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इनमें से कई चीजों की खोज महज एक इत्तेफाक से हुई है। मसलन, इन चीजों के बारे में किसी ने रिसर्च ही नहीं की और ये अचानक से सामने आ गईं, और आज हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गईं। हम आपको यहां बता रहे हैं ऐसी ही कुछ एक्सिडेंटल डिस्कवरीज के बारे में।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2017, 12:03 AM IST

  • नॉलेज डेस्क।कई चीजों ने न सिर्फ हमारी लाइफस्टाइल बदली है, बल्कि आज ये हमारे बहुत काम भी आ रही हैं। लेकिन इनमें से कई चीजों की खोज महज एक इत्तेफाक से हुई थीं। इन चीजों के बारे में किसी ने रिसर्च ही नहीं की और ये अचानक से सामने आ गईं और इस तरह आज हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गईं। हम आपको यहां बता रहे हैं ऐसी ही कुछ एक्सिडेंटल डिस्कवरीज के बारे में।
    आगे की स्लाइड्स में जानिए ऐसी ही अकस्मात् हुई खोजों के बारे में ...
  • कैसे हुआ यह?
    फाइजर कंपनी हार्ट अटैक के पेन को खत्म करने के लिए ‘एजिना पिक्टोरिस’ नाम की दवा बना रही थी। एक्सपेरिमेंट के दौरान हार्ट पेन कम करने में तो यह असफल रही, पर साइड इफेक्ट के तौर पर यह एक अराउजल टैबलेट बन गई। इसी लाइन पर इसे और रिफाइन किया गया और फाइनली वियाग्रा के नाम से यह मार्केट में मशहूर हो गई।
  • कैसे हुआ यह?
    कोका कोला कंपनी के मालिक जॉन पेंबरटन पहले मिठाइयां बेचा करते थे। वे कोल्ड ड्रिंक के बिजनेस में आना चाहते थे। एक दिन वे अपने लैब में काम कर रहे थे कि उनके असिस्टेंट से गलती से कार्बोनेटेड मीठे पानी में कोला की पत्तियां और बीज गिर गए। जब बाद में उन्होंने इसे देखा और चखा तो इसका स्वाद काफी अच्छा लगा। इस तरह से दुनिया में पहली बार कोला कोला बनी।
  • कैसे हुआ यह?
    1830 में रबर के टायर बनते थे पर ये जल्दी घिस जाते थे। इस समस्या से निपटने के लिए गुडइयर टायर कंपनी के मालिक चार्ल्स गुडइयर कई एक्सपेरिमेंट्स कर रहे थे। इसी दौरान उनके हाथ से रबर का एक तुकड़ा जलते हुए स्टोव पर गिर गया। अत्यधिक तापमान पर यह रबर लिसलिसा बन गया। जब इस परत को उन्होंने अपने टायर पर चढ़ाया, तो इसने उसे जल्दी घिसने से प्रोटेक्ट कर लिया। इस तरह से कम घिसने वाले टायरों की खोज हुई।
  • कैसे हुआ यह?
    1941 में स्विस इंजीनियर जॉर्ज डी’मेस्ट्रॉल ने तैयार होते हुए देखा कि उनकी वुलन पैंट में कुछ नुकीले से तुकड़े चिपके हुए हैं, जो झाड़ने पर भी आसानी से नहीं निकल रहे। उन्होंने इस कॉन्सेप्ट पर प्रैक्टिकल किए और हो गई वैल्क्रो की खोज।
  • कैसे हुआ यह?
    1945 में अमेरिकन इंजीनियर पर्सी स्पेंसर गर्मी पैदा करने वाले वैक्यूम चैंबर पर काम कर रहे थे। भूख लगने के कारण उन्होंने एक चॉकलेट खरीदी। चॉकलेट खाते हुए जैसे ही वे इस चैंबर में पहुंचे, उनके हाथ में ही चॉकलेट गर्म होकर पिघल गई। उन्होंने इस कॉन्सेप्ट पर काम किया और हो गई माइक्रोवेव ओवन की डिस्कवरी।
  • कैसे हुआ यह?

    ड्यू पॉन्ट के साइंटिस्ट रॉय प्लूंकेट 1938 में एक ऐसी चीज की खोज में थे जो फ्रिज को बाहर के तापमान से बचा सकें। इसके लिए उन्होंने अमोनिया, सल्फर-डाई-ऑक्साइड और प्रोपेन का कॉम्बिनेशन तैयार किया और उसे ठंडा करके एक प्लेट में डाल दिया और भूल गए। जब उन्हें याद आया तो उन्हें इस प्लेट में एक अजीब सी काली लेयर मिली। एक्सपरिमेंट करने पर पाया कि इस लेयर पर किसी कैमिकल, गर्मी और ठंड का असर नहीं होता और न ही इस पर रखी चीज प्लेट पर चिपक रही है। इस तरह से टेफलॉन कोटेड बर्तनों की खोज हुई।

  • कैसे हुआ यह?
    1928 में बायोलॉजिस्ट एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने बैक्टीयरिया को मारने की खोज में मिल रही असफलता से परेशान होकर छुट्टी ली। गलती से एक प्लेट में कुछ बैक्टीरिया लगे रह गए और उसी पर कुछ एंटिबायोटिक्स गिरे रह गए। जब वे 3 सितंबर, 1928 को वापस लैब में लौटे तो उन्होंने पाया कि इस एंटिबायोटिक से सभी बैक्टीरिया मर चुके थे। इस कॉम्बिनेशन को उन्होंने बाद में पेनिसिलिन का नाम दिया।
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