(फाइल फोटो)
एजुकेशन भास्कर। किन-किन संस्थानों में एमबीए कोर्सेस के लिए दाखिले की प्रॉसेस स्टार्ट है, इसके संबंध में कुछ जरूरी बातें अगर आपको पहले से पता हो तो एडमिशन लेने में खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। एडमिशन प्रक्रिया के बारे में पहले से मिली जानकारी आपकी मुश्किलों और भागदौड़ को भी काफी कम कर देती है। आपकी मुश्किलों को आसान बनाने के लिए उन संस्थानों की जानकारी दी जा रही है, जहां एमबीए कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है।
यहां शुरू है दाखिले की प्रक्रिया : ये दाखिले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, आईआईएम, त्रिची; आईआईएचएमआर, जयपुर और
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में निकली है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी), तिरूअनंतपुरम के बीटेक कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एडमिशन जेईई-मेन की रैंकिंग के आधार पर मिलेगा। इसके लिए छात्र 18 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आईआईएसटी में एयरोस्पेस, एविओनिक्स और फिजिकल साइंसेस में यूजी कोर्स मौजूद हैं।
कॉम्पीटिशन
कुल सीटें : 156
आवेदक : 10 हजार (करीब)
कोर्स ड्यूरेशन : 4 साल
एलिजिबिलिटी : फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में 70 फीसदी अंकों के साथ 10+2 की परीक्षा पास की हो। जेईई में ओवरऑल 20 फीसदी और तीनों सब्जेक्ट में अलग-अलग 5 फीसदी से ज्यादा स्कोर वाले छात्रों को ही मेरिट लिस्ट में शामिल किया जाएगा।
फीस : आईआईएसटी में बीटेक छात्रों की पढ़ाई का पूरा खर्च भारत सरकार का डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस उठाता है। इसमें ट्यूशन फीस, लॉजिंग, फूडिंग और मेडिकल का खर्च शामिल है। छात्रों को हर महीने 3 हजार रु. बुक अलाउंस भी मिलता है।
इसरो में साइंटिस्ट बनने का मौकासंस्थान से बीटेक करने वाले कुछ छात्रों को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन/डिपार्टमेंट अॉफ स्पेस साइंटिस्ट या इंजीनियर के पद पर नियुक्त करता है, बशर्ते वे जरूरी मापदंडों को पूरा करते हों। नियुक्ति इसरो की जरूरतों के आधार पर की जाती है। जो छात्र इसके लिए चुने जाते हैं, उन्हें कम से कम तीन साल तक नौकरी करनी होती है। इंकार करने वाले छात्रों को पेनल्टी देनी होती है।
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