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गुलाम भारत में अंग्रेजों ने किए थे ये 7 डेवलपमेंट, आज भी किए जाते हैं याद

15 अगस्त को हम 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। 1947 के भारत और मौजूद भारत में जमीन-आसमान का अंतर है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Aug 15, 2016, 12:05 AM IST

  • एजुकेशन डेस्क। आज 15 अगस्त को हम 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। 1947 के पहले के भारत और मौजूद भारत में जमीन-आसमान का अंतर है। देश शिक्षा, टेक्नोलॉजी, विज्ञान, बिजनेस लगभग सभी क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है। हालांकि, देश की इस कामयाबी में उन चीजों का भी अहम योगदान है जो ब्रिटिश शासन के दौरान डेवलप की गई थीं। ये वे व्यवस्थाएं हैं जिसकी शुरुआत अंग्रेजों ने गुलाम भारत में कर दी थी, लेकिन उसे आगे बढ़ाने का काम आजाद भारत ने किया। 70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको ऐसी ही 7 चीजों के बारे में बता रहे हैं। देश में रेलगाड़ी की शुरुआत...
    रेल की शुरुआत :
    1843 में लॉर्ड डलहौजी ने भारत में रेल चलाने की संभावना तलाश करने का कार्य शुरू किया था। डलहौजी ने बंबई, कोलकाता, मद्रास को रेल संपर्क से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, इस पर तत्काल अमल नहीं हो सका। इस उद्देश्य के लिए साल 1849 में ग्रेट इंडियन पेंनिनसुलर कंपनी कानून पारित हुआ और भारत में रेलवे की स्थापना का मार्ग साफ हुआ।
    इसके बाद, भारत में सबसे पहले मुंबई से ठाणे के बीच 16 अप्रैल, 1853 को भाप इंजन से ट्रेन चली थी। इस ट्रेन में 14 कोच लगे थे, जिसे लोकोमोटिव सुल्तान, सिंध और साहिब नाम के इंजन खींच रहे थे। देश की आजादी तक अंग्रेजों ने हमारे देश में 53,596 किलोमीटर का रेल नेटवर्क तैयार कर दिया था।
    आगे की स्लाइड्स पर जानिए अंग्रेजों द्वारा गुलाम भारत में किए गए अन्य डेवलपमेंट के बारे में...
  • पोस्टल सर्विस की शुरुआत :
    ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में पब्लिक के लिए 1744 में पहली पोस्टल सर्विस शुरू की थी। इसे गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग ने शुरू किया था। बंगाल, मद्रास और मुंबई (उस वक्त बंबई) में पोस्ट ऑफिस खोला गया था। यहां जनरल पोस्ट मास्टर की नियुक्ति की गई थी। इस सर्विस में सुधार के लिए 1837 में फर्स्ट इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट बना। इसमें पोस्टमास्टर की यूनिफॉर्म तय की गई। पोस्ट ऑफिस को एक खास पहचान नंबर दिया गया। पहले इस सेवा का उपयोग सिर्फ ब्रिटिश कंपनी करती थी।
  • इंडस्ट्रीलाइजेशन की शुरुआत :
    भारत में इंडस्ट्रीलाइजेशन की शुरुआत 1850 से हुई थी। इसका पूरा श्रेय अंग्रेजों को जाता है। 1853 से 1854 में भारत में रेल और तार की प्रणाली भी शुरू हो चुकी थी। रेल बनाने का मुख्य उद्देश्य कच्चे माल का निर्यात और तैयार माल का आयात करना था। शुरुआत में भारतीय पूंजी से कुछ सूती मिलें और कोयले की खदानें स्थापित की गईं। धीरे-धीरे ये उद्योग बहुत उन्नत हो गए। कुछ समय के बाद कागज बनाने और चमड़े के कारखाने भी स्थापित हो गए। 1908 में भारत में प्रथम बार लोहे और इस्पात का कारखाना भी शुरू हुआ। 1922 और 1939 के बीच सूती कपड़ों का निर्माण दोगुना और कागज का उत्पादन ढाई गुना हो गया। 1932 में शक्कर के कारखानों की स्थापना भी हुई।
  • इंडियन आर्मी की स्थापना :
    इंडियन आर्मी की स्थापना यूं तो आजादी के बाद यानी 1947 में हुई, लेकिन इसकी नींव अंग्रेजों ने 1776 में रख दी थी। कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी के राज के दौरान इंडियन आर्मी का गठन किया गया था। हालांकि, इसमें बड़ा बदलाव प्रथम विश्व युद्ध के बाद आया। युद्ध के बाद कई विदेशी सैनिक भारत छोड़कर चले गए थे। ऐसे में अंग्रेजों ने भारतीयों को सेना का हिस्सा बनाया। उन्होंने गोरखा, पठान, डोगरा, राजपूत, सिख और अन्य कम्युनिटी को अलग-अलग आर्मी में शामिल किया। ब्रिटिश राज के समय भारतीय सेना के जो रेजिमेंट बनाए गए थे, वो भारत की आजादी के बाद भी बने रहे।
  • एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी का यूज :
    अंग्रेजों ने जब तक भारत पर राज किया, तब तक वे भारतीय कृषि का फायदा लेते रहे। वे भारतीय किसानों से पारंपरिक खेती ना करवाकर ब्रिटिश लोगों की डिमांड पूरी करने के लिए अलग-अलग खेती कराते थे। ऐसा करने से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता था। हालांकि, इस दौरान किसानों को कई ऐसी तकनीकें सीखने को भी मिली जो वे नहीं जानते थे। उन्होंने सिंचाई करने के नए तरीकों के बारे में जाना। इससे पहले वे पारंपरिक तरीकों से ही सिंचाई करते थे। खासकर, पंजाब की सिंचाई टेक्नोलॉजी ने भारतीय कृषि में क्रांति ला दी। ग्रीन रेवोल्यूशन भी इसी का हिस्सा है।
  • शिक्षा का विस्तार :
    भारत में शिक्षा का विस्तार करने के श्रेय हाउस आफ लॉर्ड्स के मेंबर लॉर्ड मैकाले को जाता है। उन्होंने यहां पर मैकाले सिस्टम के जरिए शिक्षा विस्तार किया। हालांकि कई लोग उन्हें भारत की सफल पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को खत्म करने का दोषी भी मानते हैं।
    मैकाले की इस प्रणाली के चलते देश में यूनिवर्सिटीज और कॉलेज की स्थापना हुई। अंग्रेज इनके माध्यम से यहां पर वेस्टर्न नॉलेज और कल्चर को बढ़ावा देने लगे। उन्होंने मेडिकल, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्ट, साइंस संबंधित कई कोर्सेस का यहां विस्तार किया। अंग्रेजों की इस शिक्षा नीति का लक्ष्य संस्कृत, फारसी और अन्य लोक भाषाओं की जगह अंग्रेजी का वर्चस्व कायम करना था।
  • कानून का विस्तार :
    1857 के बाद ब्रिटेन ने औपनिवेशिक सरकार को मजबूत किया और अदालती प्रणाली के माध्यम से अपनी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया। इसके लिए कई कानूनी प्रक्रियाएं स्थापित की गई। नई कानून व्यवस्था में दीवानी और फौजदारी प्रक्रिया को नई दंड संहिता के रूप में प्रस्तावित किया गया। 1860 से 1880 में जन्म, मृत्यु सर्टिफिकेट, विवाह सहित दत्तक, सम्पति दस्तावेज और अन्य कार्यों से संबंधित सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिए।
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Web Title: 7 Advantages Of British Rule In India
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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