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लड़कियों जैसा व्यवहार कर रहे चीन के स्कूली लड़के, बचाने के लिए कोशिश

चीनी शिक्षाविद् क्लासरूम में परंपरागत जेंडर रोल और वैल्यू सिस्टम फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

जेवियर हर्नांडेज़ | Last Modified - Feb 21, 2016, 03:28 PM IST

  • (न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत सिर्फ भास्कर में)
    चीन का शिक्षाजगत इन दिनों इस बात को लेकर काफी परेशान है कि वहां पुरुष शिक्षकों की काफी कमी हो गई है और इस वजह से नई पीढ़ी के लड़के स्त्रियों जैसा व्यवहार करने वाले होते जा रहे हैं। इसलिए चीनी शिक्षाविद् क्लासरूम में परंपरागत जेंडर रोल और वैल्यू सिस्टम फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
    इसी का नतीजा है कि झेंग्झौ के स्कूल में लड़कों से वचन लिया गया है कि वे ‘रियल मैन’ की तरह बर्ताव करेंगे।
    फूजौ में प्रायमरी स्कूल के पुरुष टीचर लिन वाई ने आदत बना ली है कि बच्चों को अपनी क्लास
    में रोज बहादुरी और युद्धभूमि की कहानियां सुनाएंगे। वे बच्चों को सिखा रहे हैं कि उन्हें साहसी होना चाहिए, महिलाओं की रक्षा करना चाहिए और बुराई को मिटाने के लिए आगे आना चाहिए। लिन की इस आदत की एक खास वजह है। यह कि चीनी लड़के स्कूलों में लड़कियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
    आगे की स्लाइड्स में मकसद है- लड़कों में छिपे पुरुष को बाहर निकालना, पुरुष को टीचिंग जॉब में जरूरी योग्यता में छूट और दे रहे स्कॉलरशिप...
  • शंघाई में स्कूलों के प्रिंसिपल कोशिश कर रहे हैं कि सिर्फ लड़कों के लिए ऐसी क्लास हो, जिसमें मार्शल आर्ट, कंप्यूटर रिपेयर पढ़ाना अनिवार्य हो।
    पूर्वी चीन के हांगझाउ में स्कूलों में समर कैंप शुरू किया गया है, जिसे ‘वेस्ट पॉइंटबॉय’ नाम दिया गया है। यहां लड़कों के लिए विशेष रूप से ताइक्वांडो क्लास शुरू की गई है। और इसका मकसद है- लड़कों में छिपे पुरुष को बाहर निकालना।
    समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे चीन में शिक्षा अधिकारी आक्रामक तरीके से पुरुष टीचर्स को स्कूलों में नियुक्त करने में लगे हैं, क्योंकि चीनी न्यूज मीडिया चेतावनी दे चुका है कि ‘मर्दानगी को उभारने की जरूरत’ है।
    इधर चीन में कुछ माता-पिता अनिश्चित अर्थव्यवस्था में अपने बेटों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। इसलिए वे भी पुरुष रोल मॉडल्स को अपने बच्चों के सामने रख रहे हैं, ताकि इन्हें देखकर उनमें मुखरता,
    साहस और बलिदान की भावना पैदा हो।
    उनका मानना है कि स्कूलों में महिला टीचरों पर काम का बोझ
    अधिक होने से उनके बेटों पर उल्टा असर हो रहा है। इससे लड़कों की नेतृत्व क्षमता भी कम होती है।
  • 20 लाख की आबादी वाले फूजौ शहर के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की इस बात के लिए कड़ी आलोचना हो रही है कि जो पुरुष टीचिंग जॉब में जाना चाहते हैं, उन्हें प्रवेश के लिए जरूरी योग्यता में छूट के साथ ही स्कॉलरशिप भी दी जा रही है।
    इस बारे में फुजिआल नॉर्मल यूनिवर्सिटी की छात्रा शुआ रॉन्गफांग कहती हैं कि महिलाओं को भी परंपरागत रूप से पुरुषों के लिए माने जाने वाले क्षेत्रों प्रवशे के लिए इसी तरह के फायदे क्यों नहीं दिए जाने चाहिए? हालांकि इस बहस का दूसरा पक्ष भी है।
    बड़ी संख्या में टीचर्स का यह भी कहना है कि छोटी कक्षाओं में महिला टीचर्स के होने का बच्चों पर अच्छा असर पड़ता है।
    फूजौ की किंडरगार्टन टीचर ली यू कहती हैं कि महिलाओं में बच्चों की जरूरत को समझने का सहजज्ञान
    ज्यादा होता है। लड़कों को लड़कों की तरह व्यवहार करना सिखाने की जिम्मेदारी स्कूलों की नहीं माता-पिता की है।
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Web Title: Chinese School Students Behaving Like Girls
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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