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अटेंडेंस से एग्जाम तक डिजिटल, ऐसे बढ़ा एजुकेशन में तकनीक का इस्तेमाल

अब स्कूलों और उच्च शिक्षा के संस्थानों में अटेंडेंस से लेकर, क्लासरूम और एग्जाम तक में डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल बढ़ा

Dainik Bhaskar

Feb 23, 2016, 11:09 AM IST
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों की शुरुआत से पहले शिक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग शुरू
हो चुका था। अब स्कूलों और उच्च शिक्षा के संस्थानों में अटेंडेंस से लेकर, क्लासरूम और एग्जाम तक में डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल बढ़ रहा है। जानते हैं इसके बारे में...
डिजिटल अटेंडेंस से परीक्षाओं में कम फर्जीवाड़ा
हाल ही में यूपी बोर्ड ने बोर्ड एग्जाम्स में स्टूडेंट्स की अटेंडेंस स्मार्टफोन
से लेने का फैसला किया है। परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए यह प्रयोग किया जा रहा है। इसमें सभी स्टूडेंट्स का डेटा सिम में अपलोड होगा और अटेंडेंस शीट पर लगे कोड को स्कैन करते ही डेटा ओपेन हो जाएगा।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुछ विभागों में भी छात्रों की अटेंडेंस के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम
लगवाया गया है। इसी तरह मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षकों की अटेंडेंस स्मार्टफोन के जरिए दर्ज करवाने की योजना शुरू की है। इसके जरिए टीचर्स की वास्तविक लोकेशन भी रजिस्टर होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
आगे की स्लाइड्स में स्मार्ट क्लासरूम और ऑनलाइन एग्जाम, सभी स्कॉलरशिप के लिए एक पोर्टल, लोन के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था, अब राज्य भी पीछे नहीं...
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
स्मार्ट क्लासरूम और ऑनलाइन एग्जाम

स्कूलों में बोर्ड और चॉक की जगह प्रोजेक्टर ने ले ली है, खासकर के शहरी क्षेत्रों में। अधिकतर स्कूल और कॉलेज पढ़ाई में तकनीक का खासा उपयोग कर रहे हैं। दिल्ली के 30 स्कूलों में इस साल से स्मार्ट क्लासरूम की शुरुआत हो रही है। तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में भी स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। धीरे-धीरे यह चलन छोटे शहरों में भी बढ़ रहा है।
 
नई तकनीकों से अवगत कराने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। अधिकतर एंट्रेंस एग्जाम्स अब ऑनलाइन हो रहे है।
 
शुरुआत में सिर्फ आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में ही ऑनलाइन परीक्षा होती थी, लेकिन अब कई राज्य अपनी परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित कर रहे 
हैं।
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
सभी स्कॉलरशिप के लिए एक पोर्टल

स्कॉलरशिप से जुड़ी समस्याएं सुलझाने और इसका सरलीकरण करने के लिए सरकार ने अलग से पोर्टल लॉन्च किया है। इसमें हर तरह की स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने के साथ पूरी प्रक्रिया की जानकारीदी गई है।
 
कोई भी स्कॉलरशिप हासिल करने के लिए छात्रों को केवल एक फॉर्म भरना होता है। छात्रों के लिए 
यह फायदेमंद है, क्योंकि स्कॉलरशिप से जुड़ी सारी जानकारी एक जगह पर मिल जाती है।
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
लोन के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था

शिक्षा में मदद के लिए देश में छात्रों के लिए कई तरह के एजुकेशनल लोन की सुविधा है, लेकिन जागरुकता की कमी के चलते अधिकतर छात्र और पैरेंट्स को इसकी पूरी जानकारी नहीं होती।
 
एजुकेशन लोन की सुविधा को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए अलग से ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की गई है। इसमें अलग-अलग बैंकों के एजुकेशन लोन की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है।
 
इसके अलावा छात्रों के लिए कॉमन एजुकेशन लोन फॉर्म, एक से ज्यादा बैंकों में लोन के लिए अप्लाई करने की सुविधा और अपने आवेदन का स्टेटस पता करने का विकल्प मौजूद है। 
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
अब राज्य भी पीछे नहीं

डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल में राज्य सरकारें पीछे थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। विभिन्न राज्य सरकारो द्वारा एजुकेशन पोर्टल लॉन्च किए गए हैं। इन पर एजुकेशन से जुड़ी योजनाओं, एग्जाम्स, रिजल्ट इत्यादि
तमाम जानकारियां आसानी से उपलब्ध हैं।
 
नेशनल नेटवर्क ऑफ एजुकेशन पोर्टल पर सभी राज्यों के अलावा कुछ प्रमुख शहरों के लिए अलग से पोर्टल मौजूद है।
 
सीबीएसई और अन्य केंद्रीय बोर्ड के बाद अधिकतर राज्य बोर्ड के भी पोर्टल हैं, जिन पर स्टडी मटीरियल के साथ सभी जानकारियां उपलब्ध हैं। 
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
स्कूलों में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 16 राज्यों और 30 से ज्यादा विभागों ने निजी कंपनियों के साथ करार किया है। देशभर के 36 हजार स्कूलों में 10 लाख से ज्यादा छात्रों को इसका फायदा मिल रहा है।
 
हालांकि, सरकारी स्कूल अभी इसमें पीछे हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच वर्षों में प्राइवेट स्कूलों में डिजिटल तकनीकों का चार गुना बढ़ेगा जबकि सरकारी स्कूलों में पांच गुना।
 
सरकारी स्कूलों में इंफॉर्मेशन एंड
कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का मार्केट 2020 तक करीब 4 अरब डॉलर होने की उम्मीद है।
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