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शिक्षा की हालत में सुधार, लेकिन जेंडर गैप पहले की तरह

एक नई रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षित महिलाएं भी लड़कियों की बजाय लड़कों के जन्म को प्राथमिकता देती हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 26, 2016, 12:21 PM IST

  • एजुकेशन डेस्क। शिक्षा का बढ़ा स्तर भी देश में जेंडर गैप की हालत बेहतर करने में सफल नहीं है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षित महिलाएं भी लड़कियों की बजाय लड़कों के जन्म को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि, 20 से 34 वर्ष की महिलाओं और सबसे ज्यादा साक्षरता वाले राज्य केरल में हालात अलग हैं। इसलिए हो रही सेक्स रेशो में कमी...
    शिक्षा के बावजूद सेक्स रेशो में कमी : देश में महिलाओं की शिक्षा के स्तर में सुधार होने के बावजूद सेक्स रेशो में कोई खास फर्क नहीं आया है। हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला है कि ग्रामीण इलाकों का सेक्स रेशो शहरी इलाकों से बेहतर है जहां अमूमन ज्यादा पढ़ी लिखी महिलाएं होती हैं। ग्रामीण इलाकों में जन्म लेने वाली लड़कियों की संख्या प्रति 1000 लड़कों में 895 है, वहीं शहरी इलाकों में यह आंकड़ा प्रति 1000 लड़कों में 878 ही है। यह दर्शाता है कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा में होने वाले सुधारों के बावजूद भी देश में लड़कों को दी जाने वाली प्राथमिकता में कोई खास फर्क नहीं आया है।
    आगे की स्लाइड्स पर जानिए अशिक्षित महिलाएं कम करती हैं फर्क लड़के-लड़की में फर्क...
  • अशिक्षित महिलाएं कम करती हैं फर्क :
    हायर एजुकेशन भी भारत में लड़कों को प्राथमिकता देने वाली सोच में कोई खास फर्क नहीं डाल सका है। देश में ग्रेजुएशन कर चुकी माताएं 1000 लड़कों की अपेक्षा 899 लड़कियों को जन्म देती हैं, यह आंकड़ा देश के औसतन आंकड़े प्रति 1000 लड़कों में 943 लड़कियों से भी कम है। रिपोर्ट में एक अच्छी बात सामने आई है, वो यह कि 20 से 34 वर्ष की शिक्षित माताएं प्रति 1000 लड़कों में 927 लड़कियों को जन्म देती हैं। यह आंकड़ा ओवरऑल शिक्षित माताओं के प्रति 1000 लड़कों में 899 लड़कियों को जन्म देने के आंकड़े से ज्यादा है। यह दिखाता है कि कम उम्र की माताएं लड़कों को कम वरीयता देती हैं।
  • शिक्षा का स्तर व प्रति 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियां :
    अशिक्षितप्राइमरीसेकंडरीग्रैजुएट
    ग्रामीण939932907898
    शहरी928925903900
    पूरे देश की अपेक्षा केरल में स्थिति बेहतर :
    देश के बाकी हिस्सों में जहां शिक्षित माताओं के मामले में लड़कियों की जन्मदर कम है, वहीं दूसरी तरफ केरल में यह बेहतर है। केरल में सेक्स रेशो 1084 है। सबसे ज्यादा साक्षरता वाले इस राज्य में 20 से 34 वर्ष की अशिक्षित महिलाएं प्रति 1000 लड़कों में 940 लड़कियों को जन्म देती हैं, जबकि शिक्षित महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 950- 960 है। केरल में ही अगर ग्रेजुएट या उच्च शिक्षित महिलाओं की बात की जाए तो यह आंकड़ा और अधिक है। ग्रेजुएशन या उससे अधिक शिक्षित माताएं प्रति 1000 लड़कों में 971 लड़कियों को जन्म देती हैं।
  • उच्च शिक्षा में हर स्तर पर एनरोलमेंट भी कम :
    आजादी के बाद से देश में महिला साक्षरता कई गुना बढ़ी है, लेकिन हर स्तर पर एनरोलमेंट के मामले में महिलाएं अब भी काफी पीछे हैं। हायर एजुकेशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि एमफिल और पोस्टग्रेजुएशन को छोड़ कर सभी स्तर पर लड़कियों की अपेक्षा लड़कों की संख्या ज्यादा है। अंडरग्रेजुएट लेवल पर मेल स्टूडेंट्स 53 फीसदी हैं, वहीं फीमेल कैंडिडेट की संख्या 47 फीसदी है।
    पोस्टग्रेजुएट स्तर पर 49 फीसदी लड़के और 51 फीसदी लड़कियांं हैं। डिप्लोमा के स्तर पर यह गैप सबसे ज्यादा है, जहां 72 फीसदी मेल और 28 फीसदी फीमेल हैं। इसी प्रकार पीएचडी स्तर पर 60 फीसदी मेल और 40 फीसदी फीमेल हैं। इंटीग्रेटेड कोर्सेस में 63 फीसदी लड़के और 37 फीसदी लड़कियांं प्रवेश लेती हैं। एमफिल कोर्सेस में 55 फीसदी लड़कियों के मुकाबले 45 फीसदी लड़के प्रवेश लेते हैं।
  • 20-34 साल की महिलाओं में कम है समस्या :
    सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 20 से 34 साल की उम्र की केवल वही महिलाएं लड़के और लड़कियों के बीच कम फर्क करती हैं, जो शिक्षित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अलग हैं क्योंकि वहां शिक्षा का स्तर अब भी कमजोर है। इसके लिए जरूरी है कि शुरुआत से ही महिलाओं की शिक्षा पर ध्यान दिया जाए। साथ ही, समाज के कमजोर तबकों के लिए खास व्यवस्था करने से हालात में सुधार की संभावना है।
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Web Title: Gender Gap In Education In India 2016
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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