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सर्वे: आईटी सेक्टर में औसत से 24 फीसदी तक ज्यादा कमाई

मेक इन इंडिया अभियान में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा जोर है, लेकिन कमाई के मामले में यह सबसे पीछे है।

Dainik Bhaskar

Feb 18, 2016, 02:09 PM IST
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एजुकेशन डेस्क। मेक इन इंडिया अभियान में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा जोर है, लेकिन कमाई के मामले में यह सबसे पीछे है। देश में आईटी सेक्टर के कर्मचारी सबसे ज्यादा कमाई करते हैं। हालांकि, स्त्री-पुरुष की कमाई में सबसे ज्यादा अंतर इसी सेक्टर में है और 40 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी नौकरी से संतुष्ट नहीं हैं।
मैन्युफैक्चरिंग में मीडियन सैलरी से 9 फीसदी तक कम पैकेज
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कर्मचारियों का पैकेज देश की अर्थव्यवस्था में मीडियन सैलरी से 9 फीसदी कम है। रोजगार देने वाले तीन प्रमुख सेक्टर- आईटी, बीएफएसआई और मैन्युफैक्चरिंग के नए सैलरी इंडेक्स के अनुसार कमाई के मामले में आईटी सेक्टर सबसे आगे है। इस सेक्टर में काम करने वालों को औसतन 346.42 रुपए प्रति घंटे वेतन मिलता है, जबकि बाकी सभी सेक्टर को मिलाकर औसत पैकेज 279.7 रुपए प्रति घंटा है।
आईटी बीएफएसआई मैन्युफैक्चरिंग
254.04 300.23 346.42
आगे की स्लाइड्स में जानिए अच्छी कमाई वाले सेक्टर्स के बारे में...
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हर स्तर पर कम कमाई
 
बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेस सेक्टर में बेहतर पैकेज का कारण एक्सपर्ट कर्मचारियों के एकेडमिक बैकग्राउंड को मानते हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग में हर  स्तर पर पैकेज कम मिलता है। मास्टर डिग्री ले चुके कर्मचारियों को भी औसत 260.8 रुपए प्रति घंटे वेतन मिलता है।
 
देशी के मुकाबले विदेशी  मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में औसत पैकेज करीब दोगुना है। विदेशी कंपनियां कर्मचारियों को 319.5 रु. प्रति घंटे औसत वेतन देती हैं। देशी कंपनियों में य आंकड़ा 163.6 रु. है। वहीं, बीएफएसआई सेक्टर में छोटी कंपनियां 197.95 रुपए प्रति घंटे मीडियन सैलरी देती हैं जबकि बड़ी कंपनियां 324.51 रुपए।
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कारण: सर्विस सेक्टर की ज्यादा भागीदारी
 
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कम कमाई का कारण विशेषज्ञ देश की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर पर जोर को मानते हैं। देश की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग  सेक्टर की हिस्सेदारी केवल 16 फीसदी के करीब है और यह लेबर इंटेंसिव भी ज्यादा है। वहीं, सर्विस सेक्टर जीडीपी में करीब 52 फीसदी योगदान देता है।  हालांकि, उनका यह भी मानना है कि नई सरकारी नीतियों से अगले पांच-सात वर्षों में इस सेक्टर के पैकेज स्ट्रक्चर में सुधार हो सकता है। स्किल्ड वर्कर्स  का अनुपात भी बढ़ेगा, लेकिन देशी और विदेशी कंपनियों में कमाई का फर्क बना रहेगा। 
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ज्यादा कमाई के बावजूद असंतुष्ट हैं 43 फीसदी आईटी कर्मचारी
 
आईटी सेक्टर में औसत पैकेज दूसरे सेक्टर्स की तुलना में 24 फीसदी तक ज्यादा है। कर्मचारियों को बोनस और अन्य सुविधाएं भी ज्यादा मिलती हैं। इसके  बावजूद इसमें काम करने वाले 57.4 फीसदी  कर्मचारी ही अपने पैकेज से संतुष्ट हैं। बीएफएसआई में करीब आधे वर्कर्स असंतुष्ट हैं। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग में  कम आमदनी के बावजूद कर्मचारियों की संतुष्टि का स्तर ज्यादा है। करीब 60 फीसदी कर्मचारी अपने पैकेज को सही मानते हैं और नौकरी से संतुष्ट हैं। 
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महिलाओं के लिए सबसे अच्छा बीएफएसआई
 
कमाई के मामले में हर सेक्टर में महिलाएं पुरुषों से पीछे हैं। सबसे खराब हालत आईटी सेक्टर में है, जहां पुरुष की तुलना में महिला वर्कर्स की औसत  कमाई 37 फीसदी तक कम होती है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महिलाओं का पैकेज 25 फीसदी तक कम होता है। बीएफएसआई में स्त्री-पुरुष की कमाई में अंतर सबसे कम (18 फीसदी) है। सर्वे में यह भी बताया गया है कि ज्यादा जिम्मेदारी वाले काम और प्रमोशन में भी पुरुष महिलाओं से आगे हैं। 
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