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मेडिकल शिक्षा सबसे महंगी, 6 साल में दोगुना हुआ खर्च, ऐसा है पढ़ाई में खर्च

सर्वे के अनुसार सरकारी के मुकाबले निजी संस्थानों में पढ़ाई दो से तीन गुना तक महंगी है। प्रोफेशनल एजुकेशन की लागत भी हर जगह बढ़ी है।

bhaskar news | Last Modified - Mar 03, 2016, 10:16 AM IST

  • पिछले छह वर्षों में हर स्तर पर शिक्षा पर होने वाला औसत खर्च दोगुने से ज्यादा हो गया है। एक सर्वे के अनुसार सरकारी के मुकाबले निजी संस्थानों में पढ़ाई दो से तीन गुना तक महंगी है। प्रोफेशनल एजुकेशन की लागत भी हर जगह बढ़ी है। गांवों की तुलना में शहरों में शिक्षा की लागत चार गुना तक ज्यादा है।
    हर स्तर और हर स्ट्रीम में महंगी हुई पढ़ाई
    एक सर्वे के अनुसार पिछले छ: वर्षों में शिक्षा के खर्च में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हुआ है। जनरल, टेक्निकल और वोकेशनल- हर तरह की शिक्षा के खर्च में वृद्धि हुई है। केन्द्रीय विद्यालयों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स की फीस में लगभग तीन गुने का इजाफा किया गया है। पहले जहां स्टूडेंट्स को 4500 रूपए देने पड़ते थे वहीं अब साल के 12000 रूपए देने पड़ रहे हैं।
    प्राइवेट स्कूलों में खर्च दो से तीन गुना तक बढ़ा है। आईआईटी में अंडरग्रेजुएट कोर्स की फीस 80 फीसदी बढ़ी और अब इसमें फिर से इजाफे का प्रस्ताव किया गया है। इसी तर्ज पर दूसरे सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में भी फीस बढ़ी है, जबकि प्राइवेट कॉलेजों में फीस तीन गुना तक ज्यादा हो गई है।
    औसत खर्च: अलग-अलग तरह की शिक्षा के लिए
    वर्षजनरलटेक्निकल/प्रोफेशनल वोकेशनल

    2014-15
    67886284127676

    2007-08
    24613211214881
    आगे की स्लाइड्स में शहरों में गांवों से चार गुना तक ज्यादा खर्च, गांव-शहर के शिक्षा स्तर में फर्क, प्राइवेट संस्थाओं में दोगुनी लागत, ग्रामीण क्षेत्र में प्रोफेशनल एजुकेशन में सालाना खर्च...
  • शहरों में गांवों से चार गुना तक ज्यादा खर्च
    ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की लागत में भी काफी अंतर है। अलग-अलग स्तरों पर यह अंतर चार गुना से भी ज्यादा है।
    सर्वे में देखने को मिला है कि प्राइमरी स्तर पर शहरी क्षेत्रों में प्रति छात्र सालाना खर्च 10083 रु. है, जबकि ग्रामीण इलाकों में केवल 2811 रु. है।
    सेकंडरी और हायर सेकंडरी स्तर पर भी अंतर दोगुने से ज्यादा है। हायर एजुकेशन में यह फर्क थोड़ा कम है। वहीं, प्राइवेट संस्थानों में सरकारी के मुकाबले 6-7 गुना ज्यादा खर्च आता है।
  • निजी संस्थानों में दोगुने से ज्यादा लागत
    प्रोफेशनल एजुकेशन में सबसे ज्यादा खर्च मेडिकल कोर्स में आता है। इसके बाद इंजीनियरिंग अौर मैनेजमेंट कोर्स आते हैं। यहां भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्राें में भारी अंतर देखने को मिला है।
    सरकारी संस्थानों के मुकाबले सहायता प्राप्त निजी संस्थान आैर गैर सहायता प्राप्त निजी संस्थानाें में डेढ़ से दोगुना का अंतर देखने को मिलता है।
    मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्सेस में फर्क ज्यादा है, जबकि वोकेशनल कोर्स के मामले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर कम देखने को मिलता है।
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Web Title: Medical Education Is The Most Expensive In India
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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