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प्रोफेसर बनने के लिए नेट की जरूरत नहीं, 9 लाख कैंडिडेट्स को होगा फायदा

साल 2009 से पहले पीएचडी के साथ एमफिल के लिए भी रजिस्ट्रेशन कराने वाले उम्मीदवार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए पात्र होंगे।

Dainik Bhaskar

Apr 14, 2016, 12:04 PM IST
Eligibility test not needed for those who registered for PhD before 2009
एजुकेशन डेस्क। साल 2009 से पहले पीएचडी के साथ एमफिल के लिए भी रजिस्ट्रेशन कराने वाले उम्मीदवार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए पात्र होंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऐसे एमफिल या पीएचडी धारकों को नेट व स्लेट से छूट दी है जिन्होंने इन डिग्रियों के लिए 11 जुलाई 2009 के पहले रजिस्ट्रेशन कराया था। हालांकि, इसके लिए एमएचआरडी ने कुछ नियम व शर्तें रखी हैं। इसका सीधा फायदा मध्य प्रदेश के 30 हजार से ज्यादा कैंडिडेट्स को होगा। देशभर में 9 लाख कैंडिडेट्स को फायदा...
एमएचआरडी के इस फैसले का असर एक बार फिर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा असिसटेंट प्रोफेसर के 2371 खाली पदों पर आयोजित की जा रही भर्ती परीक्षा पर पड़ने की बात सामने आ रही है। पात्रता के दायरे में आने वाले उम्मीदवार उच्च शिक्षा विभाग से अब भर्ती परीक्षा के लिए लागू शैक्षणिक योग्यता के नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर शैक्षणिक योग्यता संबंधी नियमों में बदलाव किए गए तो प्रदेश के करीब तीस हजार से ज्यादा उम्मीदवार इन पदों के लिए पात्र हो जाएंगे। इसके लिए विभाग और आयोग को पूरी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाना पड़ेगा। आयोग से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक इस परीक्षा के लिए केवल 5000 के आसपास ही आवेदन आए हैं। जबकि इससे पहले जारी विज्ञापन के आधार पर 15 हजार लोगों ने आवेदन किया था।
अभी इन पदों के लिए जो शैक्षणिक योग्यता रखी गई है उसके अनुसार आवेदक का नेट क्वालिफाइड होना अनिवार्य है। जबकि वर्ष 2009 से पहले उम्मीदवार के पास नेट या पीएचडी में से किसी एक का होना ही निर्धारित था। लेकिन यूजीसी द्वारा गठित अरुण निगवेकर कमेटी की अनुशंसा के आधार पर हुए फैसले में 2009 से पहले एमफिल और पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों को नेट या स्लेट से छूट दी गई है। उधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभी तक यूजीसी की ओर से इस संबंध में कोई अधिकारिक नोटिफिकेशन नहीं मिला है। इसके बाद ही नियमों में बदलाव की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
आगे की स्लाइड्स पर जानिए किन कैंडिडेट्स को मिलेगा अतिरिक्त छूट...
Eligibility test not needed for those who registered for PhD before 2009
महिला शोधार्थी व विकलांगों को अतिरिक्त छूट :
 
एमएचआरडी ने महिला उम्मीदवारों और 40 प्रतिशत से ज्यादा विकलांगों को एमफिल के लिए एक साल और पीएचडी के लिए दो साल की अतिरिक्त छूट दी है। यही नहीं महिलाओं को एमफिल या पीएचडी के दौरान 240 दिनों की मातृत्व अवकाश व चाइल्ड केयर लीव मिलेगी। इसके साथ ही यदि कोई महिला शोधार्थी शादी या किसी अन्य कारण से एमफिल या पीएचडी को किसी अन्य यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर कराना चाहती है या गाइड बदलना चाहती तो उसे इसकी भी छूट रहेगी। लेकिन पहली यूनिवर्सिटी व गाइड के अंतर्गत जितना काम हो चुका है उतने का क्रेडिट उन्हें देना होगा।
 
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इन उम्मीदवारों को दी गई है राहत :
 
> जिनकी पीएचडी नियमित माध्यम से हुई।
> थीसिस का मूल्यांकन दो एक्सटर्नल एग्जामिनर द्वारा किया गया है।
> शोधार्थी के पीएचडी का वायवा ओपन तरीके से हुआ था।
> शोधार्थी के पीएचडी वर्क से संबंधित कम से कम दो रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हों।
> शोधार्थी के पीएचडी वर्क पर कम से कम दो पेपर प्रेजेंटेशन कांफ्रेंस या सेमीनार में हुए हों।
 
Eligibility test not needed for those who registered for PhD before 2009
अरुण निगवेकर कमेटी की रिपोर्ट पर फैसला आ चुका है। इस स्थिति में उच्च शिक्षा विभाग और लोक सेवा आयोग को भर्ती के नियमों में बदलाव करना चाहिए ताकि शैक्षणिक योग्यता के कारण अपात्र हो चुके हजारों उम्मीदवार इन पदों के लिए पात्र हो सकें। तब तक के लिए या तो भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करना चाहिए या आखिरी तारीख और आगे बढ़ानी चाहिए।
 
- डॉ. देवराज सिंह, प्रांताध्यक्ष मप्र अतिथि विद्वान महासंघ
 
 
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से इस बदलाव की जानकारी आई है। लेकिन अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। इन नए नियमों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर होने वाली भर्ती के नियमों में बदलाव किया जाएगा।
 
- दीपक जोशी, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री
 
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