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महाराष्ट्र के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज नहीं करा सकते अपनी निजी एंट्रेस एग्जाम

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के एसोसिएशन की याचिका काे खारिज कर दिया है।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2016, 11:46 AM IST
फोटो प्रतीकात्मक। फोटो प्रतीकात्मक।
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के एसोसिएशन की उस याचिका काे खारिज कर दिया है, जिसमें प्राइवेट कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) कराने की अनुमति मांगी गई थी।
इसका मतलब यह होगा कि सीईटी सेल द्वारा आयोजित एक सिंगल टेस्ट से जिस तरह राज्य सरकार स्टूडेंट को एडमिशन देती है, उसी तरह से प्राइवेट कॉलेज भी एडमिशन देंगे।
यह मामला :
एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट ऑफ अनएडेड एंड प्राइवेट मेडिकल एंड डेंटल कॉलेजेज ने अगस्त 2015 में महाराष्ट्र अनएडेड प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन (रेग्युलेशन ऑफ एडमिशन एंड फीस) एक्ट 2015 के स्टेट सीईटी क्लाज को बाम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अंतत: यह केस सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। हालांकि यह याचिका मेडिकल पोस्टग्रैजुएट एंट्रेंस टेस्ट के लिए दायर किया गया था, लेकिन इसे अब अन्य सभी एंट्रेस टेस्ट के संदर्भ में देखा जा रहा है। ये टेस्ट नए एक्ट के तहत राज्य में कराए जाते हैं।
प्राइवेट मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन ने सरकार पर लगाया आरोप:
इस कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल किशोर कदम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनसे मुख्या याचिका के निर्णय के इंतजार के लिए कहा है। एक्ट को चुनौती देने के संबंध में कदम ने कहा कि हम देखेंगे यदि संभव हुआ तो एक नई याचिका हाईकोर्ट में दायर करेंगे। सरकार हमारे कई पावर छीन रही है, जो हमें सुप्रीम कोर्ट के पिछले ऑर्डर में मिले थे। सरकार हमें संस्थान चलाने के लिए कोई भी पैसा नहीं देती है। वह कैसे इन पर नियंत्रण करना चाहती है। हमारे कुछ संस्थान घाटे में चल रहे हैं, लेकिन हम सरकार द्वारा स्टूडेंट्स को आवंटित अपनी सीट नहीं भरेंगे।
सरकारी अधिकारी बोले- करेंगे मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई
वहीं सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सरकार स्टूडेंट्स को एडमिशन देने से मना करने पर पहले लागू एक्ट के तहत मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
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