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IFS ऑफिसर संजीव चतुर्वेदी को नहीं मिल सकता नया कैडर, ये है वजह

इन दिनों IFS ऑफिसर संजीव चतुर्वेदी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच खींचा-तानी चल रही है।

Danik Bhaskar | Jul 13, 2016, 03:34 PM IST
एजुकेशन डेस्क। इन दिनों IFS ऑफिसर संजीव चतुर्वेदी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच खींचा-तानी चल रही है। दरअसल, केजरीवाल संजीव चतुर्वेदी की ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के लिए मांग कर रहे हैं। जबकि केंद्र का कहना है कि उन्होंने एक डेप्युटेशन से दूसरे डेप्युटेशन के बीच में कूलिंग ऑफ का समय पूरा नहीं किया है। इसलिए नहीं मिल सकता नया कैडर...
- संजीव चतुर्वेदी सेंट्रल डेप्युटेशन में CSS के अंडर AIIMS में डिप्टी सेक्रेटरी थे। उन्होंने 29 जून, 2012 से 28 जून, 2016 तक यहां पर काम किया था।
- 2002 बैच के संजीव इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) में हरियाणा कैडर से थे। उन्होंने अक्टूबर, 2013 में हरियाणा से उत्तराखंड इंटर-कैडर ट्रांसफर (एक्स्ट्रीम हार्डशिप के आधार पर) की मांग की थी।
- अगस्त 2015 में कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने इंटर-कैडर ट्रांसफर को मंजूर कर लिया और रिलेक्सेसन पॉलिसी के जरिए उन्हें हरियाणा से उत्तराखंड भेज दिया। इंटर-कैडर ट्रांसफर में ये रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला भी था।
- बाद में, संजीव ने इंटर-कैडर डेप्युटेशन से गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरेटरी ऑफ दिल्ली (GNCTD) में जाने की मांग की।
- हालांकि, उनके उत्तराखंड से दिल्ली के इंटर-कैडर डेप्युटेशन को IFS (Cadre) Rule 6(1) के चलते परमिशन नहीं दी गई। इस नियम के अंतर्गत जब तक कोई ऑफिसर एक डेप्युटेशन से दूसरे डेप्युटेशन के बीच में कूलिंग ऑफ का समय पूरा नहीं करता, उसका कैडर नहीं बदला जा सकता। संजीव का कूलिंग ऑफ पीरियड 28 जून, 2016 से शुरू हुआ है। इस तारीख से तीन साल के बाद ही वे दिल्ली के लिए लिए इंटर-कैडर डेप्युटेशन के लिए एलिजिबल हो सकते हैं।
- अतीत में इस नियम में छूट केवल रेअर मामलों में और केवल अपवादस्वरूप ही छूट दी गई। यह छूट केवल मेरिट के आधार पर और असाधारण परिस्थितियों पर विचार करने के बाद ही दी गई। लेकिन संजीव चतुर्वेदी का केस इससे पूरी तरह अलग है। वो पहले ही अपनी पर्सनल रिक्वेस्ट (एक्स्ट्रीम हार्डशिप) पर कैडर ट्रांसफर ले चुके हैं और नए कैडर में एक दिन भी सेवा नहीं दी।
- कैडर बदलने के चलते फिलहाल संजीव चतुर्वेदी को अपने मूल कैडर यानी उत्तराखंड में सेवाएं देना होंगी। हर राज्य की सोशल-इकॉनोमिक, पॉलिटिकल, कल्चरल और जियोग्राफिकल कंडीशन अलग-अलग होती हैं, ऐसे में हर ऑफिसर के लिए उन्हें समझना जरूरी होता है, ताकि वह अपनी सर्विस के दौरान आने वाली अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना कर सके।
- DoPT’s की 26.5.14 की गाइडलाइन संजीव चतुर्वेदी के मामले में लागू नहीं होती क्योंकि यह केंद्रीय मंत्रियों के पर्सनल स्टॉफ की नियुक्ति से संबंधित है। चतुर्वेदी का केस इंटर-कैडर डेप्युटेशन का है। इस तरह उनका केस इस गाइडलाइन में कवर नहीं होता।
- उनकी रिक्वेस्ट इंटर-कैडर डेप्युटेशन की है। इस केस में उनकी सेवाओं को स्टेट गवर्नमेंट को दिया जाएगा और स्टेट गवर्नमेंट उनकी पोस्टिंग तय करेगी। कोई ऑफिसर किसी पोस्ट की मांग या इंटर-कैडर डेप्युटेशन में पर्टिकुलर पोस्ट पर अप्वाइंटमेंट करने का क्लेम नहीं कर सकता।