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पहले से मुश्किल होगा सैट, जीमैट और टॉफेल में स्टूडेंट्स को होगी आसानी

विदेशी संस्थानों में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण परीक्षाओं सैट, जीमैट और टोफेल में कई बदलाव किए गए हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 23, 2016, 12:40 PM IST

  • एजुकेशन डेस्क। विदेशी संस्थानों में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण परीक्षाओं सैट, जीमैट और टोफेल में कई बदलाव किए गए हैं। सैट में छात्रों को पहले से कम समय मिलेगा, जबकि टॉफेल की तैयारी के लिए वे मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स की मदद ले सकते हैं। जानिए इन बदलावों और इनके असर के बारे में...
    3 लाख भारतीय हर साल देते हैं ये परीक्षाएं
    स्कॉलरशिप एप्टीट्यूड टेस्ट, टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज (टोफेल) और ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (जीमैट) के स्कोर के आधार पर विदेशी संस्थानों में प्रवेश लिया जा सकता है। हर साल करीब 50 हजार भारतीय छात्र सैट में शामिल होते हैं। इनमें से 70% को औसत से ज्यादा स्कोर मिलता है, लेकिन 50% से कम को ही पसंदीदा कोर्स में प्रवेश मिलता है। टॉफेल में हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा भारतीय छात्र बैठते हैं। इनमें से 90% एवरेज स्कोर हासिल कर लेते हैं, लेकिन शीर्ष संस्थानों में प्रवेश लायक स्कोर 20% छात्रों को ही मिलता है। जीमैट में भी हर साल करीब 50 हजार छात्र शामिल होते हैं, लेकिन 5% को ही पसंदीदा संस्थान में प्रवेश मिलता है।
    आगे की स्लाइड्स पर सैट, जीमैट और टॉफेल एग्जाम के बारे में जानिए...
  • सैट: अब 3 घंटे की होगी परीक्षा
    सैट के स्कोर के जरिए यूएस के विभिन्न कॉलेजों में एडमिशन लिया जा सकता है। सैट में पिछले 30 वर्ष में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। इन बदलावों को इसी वर्ष से लागू किया गया है।
    > पहले से कम समय:
    अब तक सैट एग्जाम में छात्रों को 3 घंटे 45 मिनट का समय मिलता था, जबकि नए प्रारूप में 3 घंटे ही मिलेंगे। नए पैटर्न में लेख को 50 मिनट अतिरिक्त दिए जाएंगे और यह वैकल्पिक होगा।
    > नेगेटिव मार्किंग नहीं:
    इसमेंं किसी भी तरह की नेगेटिव मार्किंग नहीं है। पिछले प्रारूप में 5 वैकल्पिक उत्तरों की तुलना में इसमेंं सिर्फ 4 वैकल्पिक उत्तर होंगे। इसके पूर्व इसमेंं 2012 में भी कुछ बदलाव किए गए थे।
    > बनाए नए सेक्शन:
    कम्पोनेंट्स को रिवाइज कर क्रिटिकल रीडिंग को एविडेंस बेस्ड रीडिंग, राइटिंग सेक्शन में रीडिंग, राइटिंग और लैंग्वेज टेस्ट और मैथ्स के लिए अलग सेक्शन बनाए गए हैं। क्रिटिकल रीडिंग, मैथ्स और राइटिंग सेक्शन में हर एक को 200 से 800 अंक दिए गए हैं।
    > वोकैबलरी ज्यादा महत्वपूर्ण:
    नए प्रारूप में भी रीजनिंग पहले की तरह महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही वर्ड सिलेक्शन और प्रोनाउन्सिएशन पर अत्यधिक जोर दिया गया है। वोकैबलरी पर विशेष जोर दिया गया है। इसमेंं सिर्फ शब्दों का अर्थ ही नहीं उसकी व्याख्या भी करनी होगी।
  • जीमैट: हर 16 दिन में आयोजित होगा टेस्ट
    ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट एक कम्प्यूटर एडॉप्टिव टेस्ट है। इसके स्कोर के जरिए विभिन्न देशों में कॉलेजों के ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश लिया जा सकता है। इसमेंं एनालिटिकल, राइटिंग, क्वांटिटेटिव, वर्बल और रीडिंग स्किल्स का टेस्ट होता है। इसमेंं सबसे महत्वपूर्ण इंग्लिश ग्रामर, अलजेब्रा, ज्यॉमेट्री और एरिथमैटिक्स है।
    खुद कैंसिल कर सकते हैं स्कोर:
    टेस्ट टेकर्स अब बिज़नेस स्कूलों को बिना जानकारी दिए स्कोर को कैंसल कर सकते हैं। हालांकि, जो स्कोर बिज़नेस स्कूलों को भेजे जा चुके हैं, उसमें कोई भी बदलाव करने की अनुमति नहीं दी गई है।
    एक साल में 5 बार दे सकेंगे:
    अब जीमैक इसे हर 16 दिन में आर्गेनाइज़ करेगा। लेकिन 12 महीनों में सिर्फ 5 बार ही एग्जाम अटेम्प्ट करने की अनुमति होगी। इससे परीक्षा देने वालों को फायदा मिलेगा। वे दोबारा एग्जाम देकर पुराने स्कोर को सुधार सकेंगे।

  • टॉफेल: तैयारी के लिए एमओओसी
    टॉफेल के स्कोर के आधार पर विदेशी संस्थानों में प्रवेश के लिए लैंग्वेज टेस्ट है। इसके स्कोर को विश्वभर के संस्थानों में मान्यता प्राप्त है। यह एग्जाम चार अलग सेक्शन में होता है और समय अवधि चार घंटे 30 मिनट की होती है। इसमें रीडिंग, लिसनिंग और प्रश्नों के उत्तर बोलकर देने जैसे टेस्ट परफॉर्म किए जाते हैं। 2016 के पैटर्न में यूके, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के इंग्लिश एक्सेंट जोड़े जा सकते हैं इससे पूर्व सिर्फ नार्थ अमेरिका के इंग्लिश एक्सेंट पर आधारित प्रश्न होते थे। एग्जाम की तैयारी के लिए छात्र टॉफेल की ऑफिशियल वेबसाइट पर मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) में रजिस्टर कर सकते हैं।
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