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प्रोफेशनल कोर्स पर भारी वोकेशनल स्किल्स, मिल रहे 10-27% बेहतर पैकेज

रोजगार की संभावनाओं और सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते प्रोफेशनल डिग्रियों को हमेशा से तवज्जो मिलती आई है, लेकिन अब कमतर समझी जाने वाली वोकेशनल स्किल्स उन्हें टक्कर दे रही हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 20, 2016, 12:04 PM IST

  • एजुकेशन डेस्क। रोजगार की संभावनाओं और सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते प्रोफेशनल डिग्रियों को हमेशा से तवज्जो मिलती आई है, लेकिन अब कमतर समझी जाने वाली वोकेशनल स्किल्स उन्हें टक्कर दे रही हैं। हाल ही के अध्ययन बताते हैं कि इंजीनियर्स व एमबीए डिग्री होल्डर्स की तुलना में स्किल्ड उम्मीदवार बेहतर पैकेज हासिल कर रहे हैं। इंजीनियर्स से 10-27 प्रतिशत ज्यादा सैलरी...
    पॉलिटेक्निक या वोकेशनल एजुकेशन को उन लोगों का विकल्प माना जाता है जो बेहतर अकादमिक प्रदर्शन न कर पाएं हों, लेकिन वास्तविकता में स्किल्ड उम्मीदवार अब इंजीनियर्स व एमबीए की तुलना में बेहतर वेतन हासिल कर रहे हैं। स्टाफिंग सॉल्यूशंस कंपनी टीमलीज सर्विसेज का 12 सेक्टर्स पर किया गया अध्ययन बताता है कि वोकेशनल एजुकेशन आधारित कुछ जॉब्स में सैलरी इंजीनियर्स की तुलना में 10-27 प्रतिशत ज्यादा है। अध्ययन के अनुसार 12 में छह सेक्टर्स - अपैरल, ऑटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन, फूड प्रोसेसिंग, जेम्स एंड ज्वैलरी व लॉजिस्टिक्स में कुछ जॉब प्रोफाइल्स में सैलरी एमबीए से ज्यादा है। हालांकि अध्ययन में टॉप स्कूल्स के एमबीए व इंजीनियरिंग डिग्री होल्डर्स को शामिल नहीं किया गया है।
    क्यों बढ़ रहा है पैकेज :
    टीमलीज की को फाउंडर रितुपर्णा चक्रवर्ती के अनुसार, सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के लिए दो वजहें जिम्मेदार हैं। पहली मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता असंतुलन और दूसरी स्किल्ड कर्मियों की कमी। चूंकि ऐसे जॉब्स के लिए वर्कफोर्स प्रशिक्षित नहीं है और जो ट्रेन्ड हैं व प्रोडक्टिव जॉब्स में हैं वे पहले की तुलना में कहीं ज्यादा कमा रहे हैं।
    कहां है डिमांड :
    स्किल इंडिया व मेक इन इंडिया अभियानों के चलते स्किल्ड मैनपावर की मांग बढ़ी है। मेक इन इंडिया के तहत 24 क्षेत्रों, जिनमें ऑटोमोबाइल्स, एविएशन, बायोटेक्नोलॉजी, केमिकल्स, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स व माइनिंग शामिल हैं, में रोजगार उत्पादन के लक्ष्य के चलते वोकेशनल स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अनुमानों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री भी रोजगार उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अकेले फॉक्सकॉन ने ही 2020 तक अपने मैन्यूफैक्चरिंग हब्स के लिए 10 लाख जॉब्स देने की घोषणा की है। इसी तरह श्याओमी भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स के विस्तार की तलाश में है। सैमसंग, सोनी भी इसी प्रक्रिया में हैं।
    आगे की स्लाइड्स पर जानिए स्किल्ड वर्कफोर्स से जुड़े अन्य आंकड़े...
  • मांग ज्यादा, आपूर्ति कम :
    लगभग एक करोड़ भारतीय हर साल वर्कफोर्स में प्रवेश करते हैं, लेकिन 10 में से एक के पास स्किल्स का प्रशिक्षण है। 15-29 वर्ष के युवाओं द्वारा हासिल की जाने वाली वोकेशनल शिक्षा, कुल अध्ययन का मात्र 2.8 प्रतिशत है। जबकि स्किल्स की देश में काफी मांग है, क्योंकि ज्यादातर भारतीय नौकरियां स्किल आधारित हैं। ऐसे में करियर के लिहाज से यह पुनर्विचार का समय है, जहां शिक्षा को कुछ विकल्पों तक सीमित कर देना खुद की क्षमताओं पर रोक लगाने जैसा है।
  • क्यों है जरूरत :
    हर साल लगभग 2 करोड़ स्टूडेंट्स 12वीं कक्षा में प्रवेश करते हैं। देश की 700 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज़ की प्रवेश क्षमताओं के लिए यह आंकड़ा बहुत ज्यादा है। इस बीच टॉप टिअर संस्थानों में प्रवेश के लिए कड़ी जद्दोजहद होती है। उदाहरण के तौर पर आईआईटीज की सालाना प्रवेश दर दो प्रतिशत से भी कम है जिसके लिए हर साल करीबन 5 लाख स्टूडेंट्स आवेदन करते हैं। इसी तरह आईआईएम व अन्य टॉप यूनिवर्सिटीज़ के लिए भी कड़ा मुकाबला होता है। जो लोग इन संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पाते, वे इनसे निचले इंस्टीट्यूट्स के लिए प्रयास करते हैं। इसी प्रक्रिया में हर साल कम से कम 60 लाख स्टूडेंट्स ग्रेजुएट होते हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नौकरियों की उपलब्धता के आंकड़े उत्साहजनक नहीं हैं। ऐसे में वोकेशनल शिक्षा से जुड़े जॉब्स रोजगार उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • मजबूत शिक्षा के प्रयास :
    > स्किल इंडिया मिशन के तहत 2022 तक 40 करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
    > बीवोक के बाद यूजीसी पिछले वर्ष वोकेशनल एजुकेशन में मास्टर्स डिग्री का रास्ता खोल चुकी है।
    > आईआईटीज को अपग्रेड करने के लिए वर्ल्ड बैंक भारत को 1.5 बिलियन डॉलर का लोन देगा।
    > स्किल डेवलपमेंट सर्टिफिकेशन के लिए राष्ट्रीय बोर्ड बनाने की तैयारी चल रही है।
    > भविष्य में 1500 मल्टी स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स नई पीढ़ी के आईआईटी होंगे।
    > पीएमकेवीवाय के तहत अगले तीन सालों में एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए देश के 500 से ज्यादा जिलों में मॉडल स्किल सेंटर्स तैयार किए जा रहे हैं।
    > वोकेशनल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 100 से ज्यादा स्मार्ट कॅरिअर कॉलेजों में वोकेशनल कोर्स शुरू करने की सरकारी तैयारी चल रही है।
  • किसे कितनी सैलरी :
    (2 वर्ष तक के अनुभव के आधार पर)
    > एडवांस पैटर्न मेकर 20,000 रुपए
    > एमबीए मार्केटिंग 17,400 रुपए
    > इलेक्ट्रिशियन 15,100 रुपए
    > इंजीनियर-मेकैनिकल 15,200 रुपए
    > ज्वैलरी मास्टरमेकर (हैंड) 18,000 रुपए
    > एमबीए-फाइनेंस 18,500 रुपए
    > इलेक्ट्रिशियन 16,200 रुपए
    > इंजीनियर-सिविल 14,800 रुपए
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Web Title: Economic Survey 2015: Only 2% Skilled Work Force In The Country
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