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UN में 8 घंटे तक भाषण दिया था इस इंडियन ने, बचा लिया था कश्मीर

तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर वीके कृष्णा मेनन ने 23 जनवरी 1957 को यूनाइटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसिल के सामने कश्मीर मुद्दे पर लगभग 8 घंटे (7 घंटे 48 मिनिट) भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। इस भाषण को सबसे लंबे भाषण के रूप में गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया था। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है।

Dainik Bhaskar

Oct 23, 2016, 12:03 AM IST
VK Menon delivered 8 hour long speech in UN and other facts
सेल्फ हेल्प डेस्क। तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर वीके कृष्णा मेनन ने 23 जनवरी 1957 को यूनाइटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसिल के सामने कश्मीर मुद्दे पर लगभग 8 घंटे (7 घंटे 48 मिनिट) भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने पाकिस्तान को जमकर खरीखोटी सुनाई थी। इस भाषण को सबसे लंबे भाषण के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया था। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है।
नहीं तो पाकिस्तान को मिल जाता कश्मीर !
दरअसल, मेनन के इस ऐतिहासिक भाषण से पहले पाकिस्तान के डेलीगेट ने UN के सामने कश्मीर मुद्दा रखते हुए इसपर अपना दावा किया था। पाकिस्तान के तर्कों के आधार पर यह तय किया जाने लगा था कि कश्मीर में लोगों की राय पूछी जाए कि वे किसके साथ रहना चाहते हैं। भारत का यह तर्क था कि कश्मीर में बहुत से पाकिस्तानी घुस आए हैं, जो आम राय को पाकिस्तान के पक्ष में ले जाएंगे। पाकिस्तान के तर्कों के आधार पर UN के सभी देशों का झुकाव भी कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की ओर दिखाई दे रहा था, लेकिन मेनन के इस भाषण ने हवा बदल दी।
सोवियत संघ ने किया था समर्थन
मेनन ने आजादी मिलने से लेकर पाकिस्तान द्वारा यहां पर किए गए अत्याचारों और आतंकवादी घटनाओं तक को UN के सामने रखा। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कश्मीर रियासत शुरू से ही भारत के साथ रहना चाहती थी। अपने 8 घंटे के भाषण में उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान की बखियां उधेड़ीं, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि UN के देश पाकिस्तान के ‘बहकावे’ में आकर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लेने लगे थे। मेनन के इस भाषण के बाद सोवियत संघ (अब रशिया) ने अपनी वीटो पॉवर का उपयोग कर कश्मीर पर UN का ‘निर्णय’ पलट दिया।
24 अक्टूबर को यूनाइटेड नेशंस की स्थापना के मौके पर इस भाषण और यूएन से जुड़े इंटरेस्टिंग फैक्ट्स आगे की स्लाइड्स में...
VK Menon delivered 8 hour long speech in UN and other facts
लगभग 8 घंटे के अपने मैराथन भाषण के दौरान मेनन केवल चाय पीते रहे। कुछ खाया नहीं। इस कारण उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो गई और वे भाषण देते-देते ही बेहोश हो गए। तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यहां पर इलाज के बाद वे फिर लौटे और अपना भाषण पूरा कर कश्मीर को भारत का हिस्सा साबित किया। 
VK Menon delivered 8 hour long speech in UN and other facts
अस्पताल से लौटने के बाद भी मेनन की तबीयत ठीक नहीं थी। उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था। उनकी जिद पर डॉक्टरों को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज करना पड़ा। जब वे वापस UN  ऑफिस आए तो एक डॉक्टर भी उनके साथ डायस पर आया और लगातार उनका ब्लड प्रेशर मॉनिटर करता रहा और वे भाषण देते रहे। 
VK Menon delivered 8 hour long speech in UN and other facts
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यूनाइटेड नेशंस का नाम पहले यूनाइटेड एलायंस रखना तय किया गया था। इससे पहले कि इसे फाइनल किया जाता, अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को इस नाम का प्रपोजल भेजा। उस समय चर्चिल अपने बाथटब में बैठे थे। बाथटब में ही उन्होंने प्रपोजल देखा और यूनाइटेड नेशंस नाम को फाइनल कर दिया। 
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यूनाइटेड नेशंस का नाम सबसे पहले 1815 में वॉटरलू की लड़ाई पर लिखी लॉर्ड बायरोन की कविता में उन देशों के लिए इस्तेमाल हुआ था जिन्होंने फ्रांस से लड़ाई की थी। ब्रिटेन  भी इस लड़ाई में शामिल था। माना जाता है कि चर्चिल ने इसी कारण इस नाम को पसंद किया और फाइनल किया। 
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दुनिया के पांच ताकतवर देशों ने मिलकर UN  की स्थापना तो कर दी, पर UN  के पास कोई जमीन नहीं थी, जहां पर वह अपना ऑफिस बना सके। न्यूयॉर्क में इसके हेडक्वार्टर के लिए जॉन डी रॉकफेलर और जूनियर ज़ेकेंडोर्फ ने जमीन दान की। इस जमीन पर पहले वे एक बड़ा रियल इस्टेट हाउस ‘X-city’  बनने वाले थे, पर उनका यह प्रोजेक्ट फेल हो गया। इसलिए उन्होंने यह जमीन यूएन के दे दी। 
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UN  को जमीन तो मिल गई, पर इसपर इमारत खड़ी करने के लिए भी उसके पास पैसे नहीं थे। इस समस्या का समाधान किया अमेरिका ने। अमेरिका ने UN  की बिल्डिंग बनाने के लिए इसे इंटरेस्ट फ्री लोन दिया। तब जा कर UN  को अपना एक ऑफिस मिला। 
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न्यूयॉर्क स्थित UN  का हेडक्वॉर्टर को यहां के फायर सेफ्टी और बिल्डिंग्स कोड्स और नॉर्म्स से मुक्त रखा गया है। दरअसल, इस बिल्डिंग को इंटरनेशनल टेरेटरी का दर्जा मिला है। इस लिहाज से न्यूयॉर्क के फायर सेफ्टी और बिल्डिंग्स कोड्स इस पर लागू नहीं होते। अगर लागू होते तो यह बिल्डिंग इन नॉर्म्स पर खरी नहीं उतरेगी। 
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UN  के वर्तमान logo  को पहले लैपल पिन (बैज की तरह शर्ट में लगाने वाले logo) के लिए डिजाइन किया गया था। पर यह अधिकारियों को इतना पंसद आया कि उन्होंने इसे UN का ऑफिशियल logo बना दिया। 
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UN  का खर्च इसके सदस्य देश मिल कर वहन करते हैं। सभी अपने हिसाब और हैसियत के मुताबिक UN  को फंड देते हैं। अमेरिका सबसे जयादा 22%  देता है। पर अमेरिका कभी भी टाइम पर पैसे नहीं देता। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका को अभी भी UN  को लगभग 1000 मिलियन डॉलर देने बाकी हैं। 
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