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सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में गर्ल्स को क्यों नहीं दिया जाता एडमिशन?

आरटीई कानून का उल्लंघन, हाईकोर्ट ने मानव संसाधन विकास सचिव, रक्षा सचिव व सेंट्रल बोर्ड से मांगा जवाब।

bhaskar news | Last Modified - Mar 02, 2016, 10:27 AM IST

जयपुर.हाईकोर्ट ने सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश नहीं देने और संविधान के प्रावधान व आरटीई कानून का उल्लंघन करने पर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास सचिव, रक्षा सचिव व सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायाधीश अजय रस्तोगी व जेके रांका की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश एडवोकेट माही यादव की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 व आरटीई कानून के तहत शिक्षा मूलभूत अधिकार है। सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश नहीं दिया जाता। आरटीई के तहत किसी बच्चे को दस्तावेजों के अभाव में प्रवेश देने से मना नहीं कर सकते। दिव्यांग बच्चों को भी मुख्य धारा के स्कूल में पढ़ने की आजादी है।

समानता के अधिकार का उल्लंघन
लड़कियों को स्कूल में प्रवेश नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 15 और समानता के अधिकार का उल्लंघन है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 सितंबर 2015 को पैरा मिलिट्री फोर्सेज में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की। गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार में भी महिला आरक्षण को बढ़ाया है।
देश में सीआरपीएफ, बीएसएफ, सशस्त्र सीमा बल व असम राइफल्स में कुल फोर्स 9.8 लाख है जिसमें से 2.04 प्रतिशत ही महिलाएं हैं। देश के कुल पुलिस बल की संख्या 15.84 लाख है इनमें 84000 महिलाएं हैं। जब सशस्त्र सैन्य बल में महिलाओं को नियुक्ति दी जा रही है तो फिर सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश क्यों नहीं दे रहे।
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