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क्या आपको है काम का नशा? तो जानिए इससे बचने की ये 7 TIPS

ज्यादा काम करना बुरा नहीं है, लेकिन कई लोगों को इसका नशा हो जाता है और धीरे-धीरे यह एक लत में बदल जाता है।

Danik Bhaskar

Jun 13, 2016, 12:04 AM IST
एजुकेशन डेस्क। काम करना अच्छी बात है। ज्यादा काम करना भी बुरा नहीं है, लेकिन कई लोगों को इसका नशा हो जाता है और धीरे-धीरे यह एक लत में बदल जाता है। साइकोलॉजी की टर्म में इसे ‘वर्कोहोलिक’ कहा जाता है। साइकोलॉजिस्ट इसे एक बीमारी मानते हैं। कौन होते हैं ये लोग...
ये वे लोग होते हैं जो हमेशा अपने काम में डूबे रहना चाहते हैं, चाहे दफ्तर हो या घर। ये चाहकर भी काम से दूर नहीं हो पाते हैं। इससे न केवल उनकी पर्सनल लाइफ डिस्टर्ब हो जाती है, बल्कि हेल्थ पर भी नेगेटिव असर पड़ता है। जरूरत से ज्यादा काम करने से प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिविटी भी कम होती है। इसीलिए इंफोसिस के फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति तो अपने एम्प्लाई को उनके ऑफिस के निर्धारित समय के बाद काम नहीं करने को कहते थे। मूर्ति के अनुसार ‘वर्कोहोलिज्म’ से एम्लाइज की हेल्थ व प्रोडक्टिविटी और कंपनी के वर्क कल्चर दोनों को नुकसान होता है।
कैसे बचे काम के नशे से?
हम बता रहे हैं 7 ऐसी आसान टिप्स जिनसे आप वर्कोहोलिक होने की टेंडेंसी से बच सकते हैं। और यदि आप वर्कोहोलिक हो गए हैं तो इससे बाहर निकल सकते हैं।
1. पूरी नींद लें
‘Rework’ बुक के राइटर जैसन फ्राइड कहते हैं कि देर रात तक जागकर काम करना और सुबह उठते ही सबसे पहले काम के बारे में सोचना वर्कोहोलिक की पहली निशानी है। तो सबसे पहले इसे छोड़ना होगा। हार्ड वर्क नहीं, स्मार्ट वर्क करें। और सबसे बड़ी बात, नींद पूरी लें। इससे प्रोडक्टिविटी बनी रहेगी और वर्कोहोलिक होने से बचे रहेंगे।
आगे की स्लाइड्स पर जानिए काम के नशे से बचने के लिए और क्या करें...
2. कल का काम कल ही करें
 
एक निश्चित समय तय कर लीजिए। उदाहरण के लिए अगर आपने सुबह 10 से शाम को 6 बजे तक का समय तय किया है तो उस पर अडिग रहिए। शाम 6 बजते ही उठ जाइए। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि आपको काम अधूरा छोड़ना है। इसका मतलब यह है कि आपको खुद को इस तरह मैनेज करना है कि आज का जो काम है, उसे 6 बजे तक पूरा करने के बाद उठ जाना है। ‘Rework’ बुक के राइटर जैसन फ्राइड कहते हैं, कल के काम के लिए आज स्ट्रेटजी जरूर बनाइए, लेकिन कल का काम आज करने मत बैठ जाइए। कल का काम कल ही कीजिए।
 
3. इंटरनेट से दूर भी रहिए
 
आइडियाज के लिए हममें से अधिकांश लोग इंटरनेट पर कार्य करते रहते हैं और यही चीज बाद में ‘वर्कोहोलिज्म’ में बदल जाती है। जरूरी नहीं है कि अच्छे आइडिया केवल इंटरनेट पर ही मिले। शॉवर लेते समय, कुकिंग करते समय, वॉकिंग करते समय कहीं भी आपको आइडिया मिल सकते हैं। इंटरनेट से दूर रहेंगे तो हो सकता है आपको ज्यादा क्रिएटिव आइडिया आए। इससे आप वर्कोहोलिक होने से भी बचेंगे।
 
 
4. नेचर के साथ भी वक्त बिताएं
 
रोजाना कम से कम आधा घंटा नेचर के साथ बिताना तय करें। इससे वर्क का स्ट्रेस कम होगा और वर्कोहोलिक होने की टेंडेंसी भी घटेगी। आप चाहें तो ऑफिस के कार्य से भी थोड़ा वक्त निकालकर शाम को चहल-कदमी कर सकते हैं।   
 
 
5. काम करते समय नहीं खाएं
 
काम करने के दौरान बिल्कुल नहीं खाएं। स्टडीज कहती हैं कि काम करते समय खाने से न केवल ओवर ईटिंग होगी, बल्कि यह वर्कोहोलिक होने की टेंडेंसी को बढ़ाता है। इसलिए खाने के लिए ब्रेक लें। इससे वर्कलिक होने की टेंडेंसी कम होगी। हेल्थ के लिए भी यह अच्छा रहेगा।  
 
 
6. अपनी हॉबी पूरी करें
 
हर व्यक्ति की कोई न कोई हॉबी जरूर होती है। आपकी भी होगी। लेकिन काम में ही डूबे रहने के कारण आप उस हॉबी को फॉलो नहीं कर पाते हैं। तो नियम बनाइए- हफ्ते में कम से कम दो दिन आप थोड़ा वक्त अपनी हॉबी को भी देंगे। लेकिन ध्यान रखिए, यह हॉबी आपके काम या करियर से संबंधित नहीं होनी चाहिए। न ही इंटरनेट से जुड़ी हुई।
 
 
7. खुद से पूछिए कि आपकी जिंदगी का मकसद क्या है?
 
यह बहुत जरूरी है कि आप अपनी जिंदगी से जुड़े लक्ष्यों को लेकर खुद से सवाल पूछते रहें। अगर आपको लग रहा है कि आप काम को ज्यादा ही समय दे रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप वर्कोहोलिक हो रहे हैं। तो खुद से ये तीन सवाल पूछिए –
 
- मैं ये क्यों कर रहा हूं?
- इसका नतीजा क्या निकलेगा यानी मुझे क्या मिलेगा?
- क्या मेरा ऐसा करना ठीक है?
- मैं अपने परिवार और हेल्थ के प्रति कितना न्याय कर पा रहा हूं?
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