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छत्तीसगढ़ में एपी की भर्ती, 966 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती फंसने के आसार

डेढ़ साल बाद असिस्टेंट प्रोफेसर (एपी) के 966 पदों पर भर्ती प्रक्रिया फिर से अटकने के आसार बढ़ गए हैं।

Dainik Bhaskar

Feb 18, 2016, 12:19 PM IST
बिलासपुर हाईकोर्ट बिलासपुर हाईकोर्ट
भास्कर न्यूज। डेढ़ साल बाद असिस्टेंट प्रोफेसर (एपी) के 966 पदों पर भर्ती प्रक्रिया फिर से अटकने के आसार बढ़ गए हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग एपी की भर्ती प्रक्रिया की तैयारी में जुट गया है। लेकिन दूसरी तरफ पुराने नियमों से पीएचडी करने वालों को राहत देने के संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय जल्द ही एक गाइडलाइन जारी करने जा रहा है।
प्रो. अरूण निग्वेकर कमेटी की सिफारिश के बाद एमएचआरडी यह निर्णय लेगा। जैसे ही यह नई गाइडलाइन जारी होगी, पीएससी को एपी भर्ती की वर्तमान प्रक्रिया को रोकनी होगी। इसके बाद सभी तरह के पीएचडी धारकों के आवेदन को स्वीकार करना होगा। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्णय को केंद्र में रखकर आयोग ने ऐसे पीएचडी धारकों को अमात्र मान लिया है, जिन्होंने रेगुलेशन-2009 के अनुसार शोध नहीं किया। आवेदन करने वाले ऐसे सभी उम्मीदवारों के आवेदन को रिजेक्ट करने की तैयारी है।

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वर्तमान में इस नियम का पालन
 
न्यायालय ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया है कि वर्ष 2009 के रेगुलेशन के हिसाब से जिन लोगों ने पीएचडी नहीं की है, वे सहायक प्राध्यापक की भर्ती परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। इस फैसले के बाद लगभग ढाई हजार उम्मीदवारों का आवेदन निरस्त हो गया है। ऐसे में अब आठ हजार के आसपास ही उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे।
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आवेदन की हो रही छंटाई
 
सीजी पीएससी के पास भी एपी के लिए मंगाए गए आवेदन में लगभग ढाई हजार ऐसे उम्मीदवार शामिल हैं। इनकी पहचान के लिए आयोग फिर से सभी उम्मीदवारों से एक प्रपत्र भरवा रहा है, ताकि इनकी छंटाई की जा सके। लेकिन नई गाइडलाइन जारी होने के साथ ही इन सभी प्रक्रियाओं को रोकना होगा। इस संबंध में उम्मीदवारों का एक समूह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय से मिलकर इसकी जानकारी दी। एक ग्रुप मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से भी मिल चुका है। ऐसे में यह मामला फिर से तुल पकड़ सकता है।
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यह है पूरा मामला 
 
गौरतलब है कि यूजीसी ने 11 जुलाई 2009 के बाद पीएचडी करने वालों को ही बेहतर माना। इससे पहले पीएचडी करने वालों को एपी पद के लिए पात्र नहीं मानने की बात कही गई। यहीं से विवाद शुरू हो गया। देशभर में इस नियम का विरोध हुआ। देशभर में लगभग 9 लाख से अधिक पीएचडी धारी हैं, जिन्होंने नए रेगुलेशन के जारी होने से पहले ही शोध पूरा कर लिया।  इस गंभीर मामले को समझते हुए एमएचआरडी ने प्रो. निग्वेकर कमेटी का गठन कर दिया, ताकि इसकी गहन समीक्षा हो सके। अब इस कमेटी की रिपोर्ट आ गई है और इसके सिफारिश के अनुसार पुराने पीएचडी धारियों को नेट व स्लेट में छूट देने की बात कही गई है। साथ ही देशभर में होने वाले प्राध्यापकों की भर्ती में इन्हें पात्र माना जाएगा।
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