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टेक्नोलॉजी बदल रही है पढ़ाई का तरीका, स्टूडेंट्स बन रहे हैं स्मार्ट और क्रिएटिव

7 वर्ष पहले
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(सांकेतिक फोटो)
एजुकेशन डेस्क। अमेरिका के स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई में आधुनिक टेक्नोलॉजी इस्तेमाल बढ़ा है। पीबीएस लर्निंग मीडिया के सर्वे के अनुसार करीब तीन-चौथाई अमेरिकी शिक्षक छात्रों को प्रेरित करने और सिखाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं। ऐसे माहौल में छात्र भी आगे आए हैं। उदाहरण के लिए न्यूयॉर्क के नेनुएट स्कूल के छात्रों ने मिनी रेस कारें बनाई हैं। स्कूल के थ्री-डी प्रिंटर और अन्य डिवाइस से कारों को वास्तविक जैसा बनाया गया है। रिसर्च से पता लगा है कि नई टेक्नोलॉजी के उपयोग से छात्र अधिक स्मार्ट और क्रिएटिव बनते हैं।
भविष्य के क्लासरूम को आकार दे रही नई टेक्नोलॉजी पर गौर कीजिए।

थ्रीडी प्रिंटर- मेकरबॉटकंपनी ने अमेरिकी स्कूलों में पांच हजार थ्रीडी प्रिंटर लगाए हैं। इनसे छात्रों को फिजिक्स सीखने में मदद मिलती है।

टचस्क्रीन चाकबोर्ड - ह्यूलैट पैकार्ड कंपनी ताईपे के क्लासरूम में इनका परीक्षण कर रही है। टचस्क्रीन को स्टूडेंट के कंप्यूटर से जोड़ा गया है ताकि वे नोट्स ले सकें और मल्टी मीडिया देख सकें।

सैलफोन- केटी,टेक्सास के स्कूलों में बच्चों से अपने स्मार्ट फोन लाने कहा गया है। वे फोन से रिसर्च कर सकें, प्रश्नों का जवाब दे सकें।

टॉय से मेलजोल- किकस्टार्टर के जरिये जुटाए गए धन से निर्मित इम्पैथी टॉय दुनिया भर के 400 स्कूलों प्रयोग किए जा रहे हैं। बच्चों को आंख में पट्‌टी बांधकर लेगो जैसे ब्लॉक को जोड़कर बनाना पड़ता है। इससे उनमें टीमवर्क और विश्वास की भावना बढ़ती है।