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टॉपिक ऑफ द वीक : भारत की महत्वाकांक्षी मिसाइल है अग्नि का विकास, पढ़ें

7 वर्ष पहले
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अग्नि-1 मध्यम दूरी वाला बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका निर्माण भारत में ही किया गया है। भारत सरकार ने इस मिसाइल पर 1999 में काम शुरू कराया िजसका पहला परीक्षण 2002 में किया गया था। इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया था। इससे पहले 25 नवंबर 2010 को अग्नि-1 मिसाइल का इसी द्वीप से सफल परीक्षण किया गया था।
अग्नि-1 को पहले ही भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है। लेकिन मिसाइल की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इसका समय-समय पर प्रायोगिक परीक्षण किया जाता रहा है। अग्नि श्रेणी में भारत ने अब तक पांच मिसाइलें विकसित कर ली हैं और डीआरडीओ अग्नि-6 पर लगातार काम कर रहा है। भारत उन देशों में शामिल है, जिनके पास सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइलें हैं। भारत के पास इस श्रेणी में ब्रह्मोस है, लेकिन फिलहाल उसकी मारक क्षमता सीमित है। अग्नि सीरीज की सभी मिसाइलों की तकनीक लगातार विकसित की जा रही है और आने वाले समय में यह दुनिया की अत्याधुनिक मिसाइलों में गिनी जाएंगी।

अग्नि - 1
अग्नि-1 पर काम 1999 में शुरू हुआ था लेकिन परीक्षण 2002 में किया गया। इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया था। यह 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। भारत परमाणु क्षमता संपन्न अग्नि-1 प्रक्षेपास्त्र के कई सफल परीक्षण कर चुका है। अग्नि-1 को पहले ही भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है, लेकिन सेना से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इसका समय-समय पर प्रायोगिक परीक्षण किया जाता है।
अग्नि-2
जमीन से जमीन तक मार करने वाली अग्नि-2 मिसाइल का व्हीलर आईलैंड से मई 2010 में सफल परीक्षण किया। इससे पहले 2009 में इसका परीक्षण दो बार असफल हो गया था। अग्नि-2 मिसाइल की मारक क्षमता दो हजार किलोमीटर है और ये एक टन तक का पेलोड ले जा सकती है। यह अति आधुनिक नेवीगेशन सिस्टम और तकनीक से लेस है। अग्नि-2 भारतीय सेना में शामिल की जा चुकी है।
अग्नि-3
भारत ने परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली मिसाइल अग्नि-3 का विकास किया। इसका पहला परीक्षण 2006 में किया गया। इसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है। यह जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। 3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ये मिसाइल 17 मीटर लंबी है जिसका व्यास दो मीटर है। यह 1.5 टन का पेलोड ले जा सकती है। यह अति आधुनिक कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम से लेस है।
अग्नि-4
ओडिशा के व्हीलर द्वीप से करीब तीन हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण नवंबर 2011 में किया गया। इसमें कई नई तकनीकों का इस्तेमाल पहली बार किया गया है। यह अपनी पूर्ववर्तियों की तुलना में कहीं ज्यादा आधुनिक, सटीक और हल्की है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लगभग एक हजार किलोग्राम के पेलोड क्षमता वाली अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-2 मिसाइल का ही उन्नत रूप है। पहली बार इसका प्रक्षेपण दिसंबर 2010 में हुआ था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से ये सफल नहीं हो पाया था।

अग्नि-5
अग्नि-5 एक अन्तर महाद्वीपीय श्रेणी की मिसाइल है जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित की गई है। सतह से सतह तक मार करने वाली अग्नि पांच को सबसे पहले ओड़िशा तट पर व्हीलर द्वीप से मोबाइल प्लेटफाॅर्म के जरिए प्रक्षेपित किया गया था। परीक्षण के दौरान 17.5 मीटर लम्बी अग्नि-5 मिसाइल को 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाया गया और उसे 7,000 मीटर प्रति सेकंड के वेग के साथ इस्तेमाल किया गया, ताकि वह अपने लक्ष्य को निशाना बना सके।