(सांकेतिक फोटो)
एजुकेशन डेस्क। मेडिकल छात्रों को जल्द ही अंडरग्रेजुएट कोर्स के पहले साल में मरीजों का इलाज करने का मौका मिल सकता है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने एमबीबीएस के सिलेबस में बदलावों को अंतिम रूप दे दिया है। नए सिलेबस क्लीनिकल प्रैक्टिस के अलावा रेडियोलॉजी और सर्जरी की पढ़ाई भी पहले साल में शुरू हो जाएगी।
काउंसिल ने 2011 में ही विजन 2015 नाम से नया सिलेबस स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा था, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका। नए बदलावों के साथ इसे फिर से मंत्रालय के पास भेजा गया है। इसमें 17 नए सब्जेक्ट्स जोड़े गए हैं और टेक्स्ट बुक की बजाय प्रैक्टिकल एजुकेशन पर जोर दिया गया है।
मेडिकल के सिलेबस में इससे पहले वर्ष 1997 में बदलाव हुआ था जब फर्स्ट ईयर की अवधि डेढ़ साल से कम कर एक साल की गई थी। 2007 में कुछ नए कॉन्सेप्ट्स पुराने सिलेबस में ही जोड़े गए थे। काउंसिल द्वारा तैयार नया सिलेबस उन छात्रों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जो एमबीबीएस के बाद पीजी करना चाहते हैं।