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GOOD NEWS: स्कूली बच्चों की सेहत के लिए एक अच्छी पहल, हो रहा है जोरदार प्रयास

6 वर्ष पहले
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देशभर के स्कूलों में सर्वे के बाद सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट ने की सिफारिश; पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट खाने से बच्चों में बढ़ रहा मोटापा और हाइपरटेंशन स्कूलों से 200 मीटर के क्षेत्र में जंक फूड की बिक्री और उनके प्रचार-प्रसार पर रोक लगाई जानी चाहिए।यह सिफारिश दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वॉयरमेंट (सीएसई) ने देशभर की स्कूलों में सर्वे के बाद हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन (एनआईएन) और द फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंपी है। सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि लंच बॉक्स में लगातार जंक फूड ले जाना बच्चों की सेहत पर विपरीत असर डाल रहा है। पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, आइसक्रीम खाने से बच्चों में मोटापे के साथ हाइपरटेंशन की शिकायतें भी लगातार बढ़ रही हैं। रिपोर्ट में जंक फूड के विकल्प भी बताए गए हैं।
सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया हैकि स्कूल जाने वाले 60 से 70 फीसदी बच्चे हफ्ते में औसतन 3 से 4 बार चिप्स खाते हैं। अधिकतर स्कूलों के आसपास जंक फूड आसानी से उपलब्ध होते हैं।
स्कूलों से 200 मीटर के दायरे में बैन हो जंक फूड देशभर के स्कूलों में सर्वे के बाद सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट ने की सिफारिश; पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट खाने से बच्चों में बढ़ रहा मोटापा और हाइपरटेंशन स्कूल प्रबंधन बेबस, कहा- बच्चे कैंपस से बाहर जाकर खाते हैं भोपाल के अधिकांश स्कूलों में जंक फूड को लेकर जागरूकता कम है। कई स्कूलों के बाहर जंक फूड आसानी से उपलब्ध हैं।
इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल पीएस कालरा ने बताया कि बच्चों को स्कूल कैंपस के बाहर जंक फूड खाने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि वे स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम के साथ समय-समय पर हैल्थ चैकअप भी करवाते हैं। साथ ही यदि कोई बच्चा लगातार लंच बॉक्स में इस तरह के फूड ला रहा है तो उसके पैरेंट्स को बुलाकर समझाया जाता है। प्रोटीन कम, फैट व शुगर ज्यादा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन की गाइडलाइन के अनुसार बच्चों को पूरा पोषण अनाज, बाजरा, दाल, फलों और सब्जियों से मिलता है। इसके बावजूद बच्चे लंच बॉक्स में सप्ताह में औसतन 2 बार जंक फूड लाते हैं।
एनआईएन के अनुसार जंक फूड में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि इसमें फैट, साल्ट और शुगर की मात्रा ज्यादा होने से बच्चों में बीमारियां बढ़ रही हैं। सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को स्कूल के आसपास चिप्स, फ्राइड पैक्ड फूड, नूडल्स, पोटेटो फ्राइस, बर्गर और चॉकलेट आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। ऐसे में द फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया या एनआईएन को स्कूल के आसपास जंक फूड बैन करवाना चाहिए। साथ ही सभी स्कूलों में कैंटीन पॉलिसी के लिए प्रपोजल देना चाहिए।
परिवार की जिम्मेदारी, धीरे-धीरे छुड़वाएं फास्ट फूड की आदत
आहार विशेषज्ञ डॉ.विनीता जायसवाल ने बताया कि उनका स्वाद बरकरार रखने के लिए घर पर ही बर्गर या पिज्जा बना सकते हैं। इसमें चीज की मात्रा कम करके सब्जियों की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इससे फूड में फैट की मात्रा कम हो जाएगी। इसके साथ ही जंक फूड की आदत धीरे-धीरे कम करवाने की कोशिश करें।
रिपोर्ट में ये सिफारिशें भी शामिल
स्कूल में पोषण से भरा खाना उपलब्ध हो इसके लिए कैंटीन पॉलिसी बनाई जाए।
बच्चों को ध्यान में रखते हुए जंक फूड के विज्ञापन और उनके प्रमोशन पर भी नियंत्रण हो।
जंक फूड पर टैक्स बढ़ाया जाए।