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सिर्फ अहमियत के हिसाब से प्राथमिकता तय करने से कुछ नहीं होगा। बहुत बार ना कहना जरूरी है। ऐसे ही नए निर्णय को पुराने डेटा या प्रॉसेस पर आधारित करने से नुकसान निश्चित है। कंपनी द्वारा नई टेक्नोलॉजी की बात करना अलग बात है और अपनाना अलग। इससे संबंधित टिप्स पढ़िए हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू से....
सिर्फ प्राथमिकता न तय करें, ना कहना भी सीखें
जब भी समय की कमी होती है तो चीज़ों की प्राथमिकता तय करने का कहा जाता है, जैसे कि इससे सारी समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन हकीकत में इसका फायदा उतना नहीं होता जितने की उम्मीद की जाती है। इस प्रक्रिया में कम महत्वपूर्ण चीज़ों को बाद में रख दिया जाता है। वह समय कभी आता ही नहीं है और लिस्ट कभी खत्म ही नहीं होती है। चीज़ों की प्राथमिकता तय करते हुए ध्यान रखिए कि अगली स्टेज ज्यादा जरूरी है। उन चीज़ों को बिलकुल दरकिनार कर दीजिए जिनकी कोई अहमियत नहीं है। इसलिए कटऑफ पॉइंट बनाएं और उससे जुड़े रहिए। पूरे इनबॉक्स को खंगालने या टु-डू लिस्ट देखने की जरूरत नहीं होगी। चीज़ों को दरकिनार करना या लोगों को ना करना मुश्किल तो रहेगा, लेकिन समय की बचत करने का यही रास्ता है।
(सोर्स: द मोस्ट प्रोडक्टिव पीपुल नोहूटुइग्नोर बाय एड बतिस्ता)
पुराने डेटा से न लें भविष्य के निर्णय
पुरानी बातों को याद रखकर खराब निर्णय लेना गंदी आदत हो सकती है। बहुत बार पुराने डेटा या प्रॉसेस से जुड़े रहने के कारण यह सोचने में विफल हो जाते हैं कि पुराना डेटा ऐसी बातों पर आधारित करता है जो अब रहा ही नहीं है। जब कभी कोई निर्णय लेने लगें तो इन बातों को याद रखिए, लेकिन डेटा या प्रॉसेस को लेकर प्रश्न पूछिए। जैसे क्या इस डेटा या प्रॉसेस को अपडेट कर सकते हैं। या सुधार लाया जा सकता है। यह सभी बातें अतीत में महत्वपूर्ण थी तो इसका मतलब ये नहीं कि भविष्य में भी उतना अच्छा नतीजा मिलेगा। इन बातों को याद रखने से खुद को अतीत से बाहर निकाल सकते हैं। ऐसा करने से आप बेहतर निर्णय ले सकेंगे। इसका पूरे टीम को फायदा होगा।
(सोर्स: 9 हैबिट्स दैट लीडटुटेरिबल डिसीजन्स बाय जैक ज़ैंगर एंड जोसफ फोकमैन)
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नई टेक्नोलॉजी अपनाने के चार तरीके हैं ये...
हर संस्थान नई टेक्नोलॉजी की बात तो करता है, लेकिन उन्हें अपनाने में विफल हो जाता है। नई और डिजिटल वर्किंग पर आने के कुछ तरीके दिए गए हैं। पहला, हर नई टेक्नोलॉजी को अपनाना आसान नहीं है। उन्हीं पर फोकस करें जिनसे बदलाव आ सकता है और आप उन्हें फॉलो कर सकते हैं। दूसरा, नई टेक्नोलॉजी अपनाने पर कितना पैसा लगेगा, इसका बजट पहले से ही तैयार कर लें। इसमें पीपुल, प्रॉसेस और ट्रेनिंग का बजट निकालें। तीसरा, जो बदलाव देखना चाहते हैं उसका मॉडल बनाएं। इससे कितनी सफलता मिलेगी या विफलता का पता चल सकेगा। चौथा, बदलाव में ह्यूमन रिसोर्स पर शामिल करें। ऐसा करने से मैनेजमेंट और संस्थान के बाकी लोगों को मालूम रहेगा कि कौन-सी नई चीजे़ं होंगी।
(सोर्स: कनविंसिंग एम्प्लाइज़ टुयूज़ न्यू टेक्नोलॉजीस बाय डिडिअर बोनट)
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इनोवेशन पर फोकस करने से टीम को फायदा
ऑफिस में साथ काम करने वाले हर व्यक्ति का मैनेजमेंट स्टाइल एक जैसा होने से काम आसान बन जाए, यह जरूरी नहीं है। अलग नजरिए वाले लोगों के साथ काम करने से इनोवेशन और क्रिएटिविटी बढ़ती है। अलग स्टाइल वाले लोगों के साथ काम करने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे, ऊपर से देखने पर कुछ चीज़ें एक जैसी दिखेंगी, लेकिन गहराई से देखने पर महसूस होगा कि दोनों का लक्ष्य एक ही है। उन्हीं चीजों पर ध्यान दें जो कॉमन हैं। किसी काम को लेकर साथ काम करने वालों का नजरिया अलग हो सकता है। इसलिए कोई ऐसा तरीका निकालें जिस पर पूरी टीम सहमत हो। अपना फोकस इनोवेशन पर रखिए। इससे अलग सोच वाले लोगों के साथ काम करने में मजा आए। रिश्ता गहरा होगा।
(सोर्स:3 वेज़ टुकैपिटेलाइज़ऑन क्रिएटिव टेंशन बाय एमी जेन सुऔर म्यूरिल विलकिन्स)
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