(सांकेतिक फोटो)
गोल विषय के साथ पास कोर्स या ऑनर्स स्नातक करने के बाद किसी एजेंसी या सरकारी विभाग से जुड़कर रिमोट सेंसिंग का काम किया जा सकता है। इस काम में ओपेनमैट सैटेलाइट के जरिए दिखाए इमेज को ग्राउंड लेवेल डाटा में बदलना होता है। यानी उसकी मैपिंग करनी होती है।
रक्षा विभाग, वन विभाग, रिमोट सेंसिंग एजेंसियां आदि इस काम के लिए विशेषज्ञों को हायर करती हैं।
इसके अलावा ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम के तहत स्पेशल डाटा एनालिसिस का काम किया जा सकता है। इस काम के लिए डाटा प्रोड्यूसिंग एजेंसियां, पत्रिकाएं, समाचार पत्र, शोध संस्थान आदि कम्प्यूटर डाटा को मैप और डायग्राम में बदलने के लिए एनालिस्ट को नियुक्त करते हैं। भौगोलिक विविधताओं वाले भारत में प्राकृतिक आपदाएं किसी न किसी रूप में तकरीबन हर साल सामने आती हैं।
बाढ़ यहां किसी-न-किसी कोने में हर साल आ जाती है और इससे लाखों लोग तबाह होते हैं। योजना मंत्रालय बाढ़ के प्रकोप और उसके प्रभाव का मूल्यांकन करता है। इस तरह के काम में रुचि वाले भूगोल से स्नातक करने के बाद योजना मंत्रालय से जुड़कर इंपैक्ट एसेसमेंट का काम कर सकते हैं।
कई एनजीओ भी इस तरह के सर्वेक्षण करते हैं, इसलिए यदि आप चाहें तो इनसे भी जुड़ सकते हैं। घूमने के शौकीन पर्यटन में भविष्य की संभावनाएं खोज सकते हैं। इसके लिए पर्यटन मंत्रालय और विभिन्न ट्रैवल कंपनियां विशेषज्ञों को अनुबंध के आधार पर काम देती हैं। इसके लिए भूगोल में स्नातक ऑनर्स के विद्यार्थियों को वरीयता मिलती है।
पर्यटन से जुड़ने वालों को पर्यटकों को पर्यटन स्थलों के संबंध में कई तरह की जानकारियां देनी होती हैं, जैसे पर्यटन स्थल पहाड़ों में है, या समुद्र किनारे है, उस जगह की खासियत क्या है, वहां जाने का साधन क्या है, कौन से महीने में जाना उचित रहेगा, वहां की जलवायु कैसी है आदि। जियोपॉलिटिक्स इसका उभरता क्षेत्र है, जिसमें तमाम प्राकृतिक संसाधनों, जैसे- पहाड़, उपजाऊ जमीन आदि का मूल्यांकन करना होता है।
मूल्यांकन के तहत यह देखना होता है कि उस जगह विशेष की अहमियत क्या है, उसके लिए विदेश नीति क्या होनी चाहिए, कैसी होनी चाहिए, इस नीति में क्या-क्या रुकावट हैं, आदि। कम्प्यूटर का ज्ञान, रिसर्च और विश्लेषणात्मक योग्यता के साथ भूगोल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए जॉब मार्केट ज्यादा बड़ा है। इस वजह से कॉलेज स्तर पर पढ़ाई के दौरान ही इन योग्यताओं की ओर खास ध्यान देना चाहिए।
इन क्षेत्रों में है काम
अरबन प्लानर या कम्युनिटी डेवलपर : सिटी प्लानर भूमि उपयोग, नए विकास आदि के लिए काम करते हैं। इसमें विशेषज्ञता हासिल करने वाले बड़े प्रॉपर्टी डीलर, डेवलपर आदि के लिए काम कर सकते हैं। इसके लिए शहरी भूगोल में विशेषज्ञता के साथ सिटी प्लानिंग एजेंसी में इंटर्नशिप या अनुभव की जरूरत होती है।
नक्शा नविस : न्यूज मीडिया, एटलस प्रकाशक और सरकारी एजेंसियों को नक्शा नवीसों की जरूरत होती है।
मौसम विज्ञानी : राष्ट्रीय मौसम सेवा, न्यूज मीडिया, मौसम चैनल और बहुत-सी सरकारी एजेंसियों को मौसम वैज्ञानिकों की जरूरत होती है।
यातायात प्रबंधन : शिपिंग, राज्य सरकारें, लॉजिस्टिक्स और यातायात कंपनियों को यातायात भूगोल में विशेष कोर्स किए और कम्प्यूटर व विश्लेषणात्मक योग्यता वाले विद्यार्थियों की जरूरत होती है।
पर्यावरण प्रबंधक : विश्वभर में काम कर रही पर्यावरण मूल्यांकन, प्रदूषण मुक्ति और प्रबंधन एजेंसियों को प्रोजेक्ट मैनेजर व पर्यावरण प्रभाव रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत होती है। ऐसे में भूगोल में शिक्षा प्राप्त लोगों को वरीयता दी जाती है।