चेन्नई। आईआईटी में एडमिशन के प्रावधानों को बदला गया है। अब उन कैंडीडेट्स को भी एडमिशन मिलेगा, जो जेईई एडवांस में अच्छे अंक मिलने के बावजूद 12वीं बोर्ड की परीक्षा में टॉप 20 परसेंटाइल में नहीं सके थे। लेकिन इसके लिए उन्हें निर्धारित न्यूनतम अंक पाना जरूरी है। सामान्य और ओबीसी के लिए न्यूनतम अंक 75% और अजा-अजजा के लिए 70% रखे गए हैं। फैसला आईआईटी मद्रास में सोमवार को आईआईटी काउंसिल की बैठक में हुआ।
यह है व्यवस्था : अभी आईआईटी में एडमिशन के लिए जेईई एडवांस में मेरिट में आना जरूरी है। साथ ही 12वीं बोर्ड के टॉप 20 परसेंटाइल में होना भी जरूरी है।
अब यह होगा : जेईई एडवांस में मेरिट होना तो जरूरी रहेगा ही। यदि टॉप 20 परसेंटाइल में नहीं रहे हैं तो बोर्ड परीक्षा में न्यूनतम अंक हासिल करने होंगे।
क्यों पड़ी जरूरत : जिन बोर्ड्स में स्कोरिंग ज्यादा है, वहां अच्छे स्टूडेंट्स भी टॉप 20 परसेंटाइल में नहीं रहे थे। इस साल ही 240 छात्र जेईई एडवांस में तो सफल हुए लेकिन अपने राज्य के बोर्ड में टॉप 20 परसेंटाइल में नहीं सके। इसी वजह से उन्हें आईआईटी में एडमिशन नहीं मिला। वैसे, जेईई लागू होने (2013) से पहले आईआईटी में दाखिले के लिए 12वीं बोर्ड में कम से कम 60% अंक लाना अनिवार्य था।
सबसे ज्यादा दिक्कत दक्षिणी राज्यों में थी : टॉप 20 परसेंटाइल की शर्त पूरी करने में दिक्कत दक्षिण भारतीय छात्रों को रही थी। टॉप 20 परसेंटाइल का कट-ऑफ आंध्र प्रदेश में 83.2%, कर्नाटक में 93%, तमिलनाडु में 91.7% और आईएससी में 85% रहा। साफ है कि नया प्रावधान काफी छात्रों को फायदा देगा।
दो आईआईटी प्रमुख तय करेंगे रैंकिंग का फ्रेमवर्क : चेन्नई और कानपुर की आईआईटी के प्रमुखों को रैंकिंग के लिए फ्रेमवर्क तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सिस्टम आईआईटी और केंद्रीय यूनिवर्सिटियों में लागू होगा। बाद में दायरा बढ़ाकर यूजीसी से अनुदान लेने वाले अन्य शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया जाएगा। अगले साल मार्च तक रैंकिंग सिस्टम तय करने की उम्मीद है।