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  • मध्यप्रदेश में 70 हजार बीई छात्रों ने फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर की दी थी परीक्षा

पैटर्न बदला तो मध्य प्रदेश में फेल हुए बीई के 42 हजार छात्र

7 वर्ष पहले
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भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के बीई फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर के रिजल्ट ने इस बार छात्रों की नींद उड़ा दी है। आरजीपीवी द्वारा हाल ही में जारी इन सेमेस्टर की परीक्षाओं का रिजल्ट मात्र 40 फीसदी रहा है। इन परीक्षाओं में करीब 70 हजार छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से केवल 28 हजार ही पास हुए, जबकि 42 हजार फेल हो गए। छात्रों का आरोप है कि इस बार से लागू किए गए नए पैटर्न के कारण ही रिजल्ट काफी खराब रहा है। हालांकि विवि के अधिकारी भी नए पैटर्न काे रिजल्ट बिगड़ने का कारण मान रहे हैं। छात्र अब यूनिवर्सिटी का घेराव करने की तैयारी कर रहे हैं।

करियर की चिंता : कॉलेजों से मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय का नया पेपर पैटर्न छात्रों पर भारी पड़ने लगा है। छात्रों को आशंका है कि फाइनल सेमेस्टर में भी यही पैटर्न रहा तो पूरा कॅरियर दांव पर लग जाएगा क्योंकि कैंपस प्लेसमेंट के लिए आने वाली कंपनियां केवल फर्स्ट डिविजन प्राप्त और सभी सेमेस्टर में पास होने वाले छात्रों को ही मौका देती है। एबीवीपी की टेक्निकल एजुकेशन विंग के अध्यक्ष अंकित गर्ग ने बताया कि इस मामले में छात्र जल्द ही विवि के खिलाफ मोर्चा खोलने की रणनीति बना रहे हैं।
अब तक ऐसा आता था पेपर : पुराने पैटर्न के पेपर में भी पांच यूनिट थीं, लेकिन प्रत्येक यूनिट में दो प्रश्न रहते थे। इनमें से छात्रों को कोई एक प्रश्न हल करना होता था। साथ ही शब्दों की कोई सीमा नहीं होती थी। इससे हर प्रश्न में विकल्प चुनने की व्यवस्था थी।

आरजीपीवी के नए पैटर्न के तहत पेपर को कुल पांच यूनिट में बांटा गया है। हर यूनिट में पांच प्रश्न पूछे जाते हैं। हर यूनिट के तीन सवाल करना जरूरी हैं, जबकि चौथे और पांचवें सवाल में से कोई एक करना होता है। सभी प्रश्नों के आंसर तय शब्दसीमा में ही लिखना होता है। पेपर में 70 फीसदी प्रश्न सैद्धांतिक और बाकी के 30 फीसदी एनालिटिकल, न्यूमेरिकल, डिजाइन प्रोग्रामिंग से संबंधित होते हैं।

छात्रों को भेजी आंसरशीट: आरजीपीवी के परीक्षा नियंत्रक एके सिंह का कहना है कि पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पैटर्न बदला है। इसका उद्देश्य है कि छात्र 20 प्रश्न या कुंजी की बजाय कोर्स की किताबें पढ़कर पेपर देने आएं। उन्होंने कहा कि छात्रों की आंसरशीट भी ऑनलाइन भेजी जा चुकी है ताकि उन्हें यह पता लग सके कि उन्होंने कहां गलती की।
लॉन्ग टर्म में छात्रों को फायदा
इंजीनियरिंग परीक्षाओं का पैटर्न एजुकेशन की क्वालिटी बढ़ाने के लिए बदला गया है। पैटर्न ऐसा बनाया गया है जिससे छात्र पूरा पाठ्यक्रम पढ़ें। इससे छात्रों में विषय की समझ बढ़ेगी, जो उन्हें रोजगार पाने में भी मदद करेगी। पहले के पैटर्न में छात्र गाइड के चुनिंदा प्रश्न पढ़कर परीक्षा पास कर लेते थे। अब उन्हें परीक्षा पास करने के लिए पूरे विषय का गहराई से अध्ययन करना पड़ेगा। तात्कालिक रूप से छात्रों कॉलेज संचालकों में जरूर नाराजगी दिख रही है, लेकिन इसके लाॉन्ग टर्म अच्छे रिजल्ट आएंगे और छात्रों को भी इसका फायदा मिलेगा।''
-अखिलेश पांडे चेयरमैन, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग