रिसर्च से पता लगा है, बच्चों को शांत रखने, उनके दिमाग को पैना बनाने और उनमें दया की भावना पैदा करने के लिए मेडिटेशन बहुत प्रभावशाली तरीका है। अमेरिका, ब्रिटेन में इस तरह की रिसर्च में अलग-अलग तकनीक अपनाई गई लेकिन सभी परिणाम पॉजिटिव रहे हैं। ध्यान और मानसिक एकाग्रता की एक्सरसाइज से स्कूली बच्चों को भी फायदा है। 2013 के एक अध्ययन में पाया गया है, भावातीत ध्यान (ट्रांसिडेंटल मेडिटेशन) करने वाले बच्चों के पास होने की दर 15 प्रतिशत अधिक रही।
ट्रांसिडेंटल मेडिटेशन और माइंडफुल नैस के बारे में साइंस का यह कहना है -
आक्रामकता में कमी : ध्यान के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले चौथी, पांचवीं क्लास के बच्चों का बर्ताव अपने साथियों के प्रति अच्छा रहा। उन्होंने उदारता दिखाई। वे कम आक्रामक रहे। लोगों ने उन्हें पसंद किया।
मैथ्स में अव्वल : मेडिटेशन करने वाले ग्रुप को अपनी क्लास के अन्य साथियों की तुलना में 15 फीसदी अधिक अंक मिले। एक अन्य स्टडी में ध्यान करने वाले मिडिल स्कूल के 42 फीसदी छात्र गणित के राज्यस्तरीय टेस्ट में बेहतर पाए गए।
मानसिक मजबूती : तीसरी क्लास के बच्चे भी ध्यान की स्थिति में पहुंच सकते हैं। आठ सप्ताह तक एकाग्रता और योग एक्सरसाइज करने के कारण बच्चों में एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) मानसिक बीमारी के लक्षण कम पाए गए। कार्यक्रम खत्म होने के कई माह बाद तक ऐसी स्थिति रही।
आत्म नियंत्रण : एक मिडिल स्कूल में भावातीत ध्यान का प्रोग्राम शुरू होने के तीन वर्ष बाद छात्रों के उपद्रव की घटनाओं में काफी कमी आई। उपद्रवी छात्रों के निलंबन की दर 28 से गिरकर 4 फीसदी रह गई।
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