(सांकेतिक फोटो)
भोपाल। प्रदेश के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में पिछले कुछ सालों से लगातार सीटें खाली रह रही हैं। इसका कारण जानने के लिए राज्य शासन ने मंथन शुरू कर दिया है। तकनीकी शिक्षा विभाग और मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग संयुक्त रूप से इसके लिए विमर्श करेंगे। आयोग और विभाग द्वारा 29 सितंबर को ‘मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा: चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा आयोजित की जा रही है।
इस परिचर्चा का उद्देश्य उन कारणों को खोजना है, जिसके कारण छात्रों का रुझान प्रदेश के इंजीनियरिंग काॅलेजों की ओर से कम हो गया है। निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमेन प्रो.अखिलेश पांडे और डीटीई डॉ. आशीष डोंगरे के अनुसार इस परिचर्चा के लिए प्रदेश के करीब पचास संस्थानों के चेयरमैन, कुलपति, विभागाध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
प्रो. पांडे का कहना है कि परिचर्चा के दौरान एक्सपर्ट मंथन करेंगे कि मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा के संबंध में आखिर वो कौन सी चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने की जरूरत हैं। साथ ही इन चुनौनियों को सामना यह संस्थान कैसे करें, इस पर भी विमर्श किया जाएगा। आयोजन में इस मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी कि वर्तमान परिदृश्य में वे कौन-कौन सी संभावनाएं हैं, जो प्रदेश की इंजीनियरिंग शिक्षा को नई पहचान दिला सकती है। प्रो. पांडे के अनुसार पिछले कुछ सालों में जिस तेजी से प्रदेश के प्रायवेट इंजीनियरिंग संस्थानों में बीई की सीटें बढ़ी हैं उतनी ही तेजी से पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। वर्तमान में छात्रों को दी जा रही शिक्षा उन्हें रोजगार दिला पाने में कारगर साबित नहीं हो रहा है। इसी परिस्थितियों को बदलने के लिए अब शासन स्तर पर कोशिश की जा रही है।