(सांकेतिक फोटो)
एजुकेशन डेस्क। चंडीगढ़ में शुक्रवार को आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 39 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों से मुलाक़ात की। इस दौरान कई मुद्दों पर बातचीत के साथ सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के लिए एक क़ानून के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में यूनिफॉर्म नियम और कानूनों के लिए बनी पठान कमेटी की रिपोर्ट पर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलरों से जल्द कमेंट करने के लिए कहा गया है। इस विवादित मुद्दे पर डिस्कशन को एजेंडे में रखा गया था लेकिन बहस की बजाए इस पर लिखित कमेंट मांगे गए हैं जिसके लिए कोई टाइम लाइन नहीं दी गई है।
क्या है पठान कमेटी
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कर्नाटक के पूर्व वीसी प्रो एएम पठान, मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के पूर्व सेक्रेटरी वीके भसीन और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रो वाईसी सिम्हाद्री की अध्यक्षता में कमेटी का गठन यूजीसी ने अप्रैल 2013 में किया था। मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डवलपमेंट के अंर्तगत 43 यूनिवर्सिटीज हैं। इसमें 12 यूनिवर्सिटीज जो 2009 के एक्ट के तहत बनी हैं, उनके लिए कानून एक है। बाकियों के लिए अलग-अलग एक्ट हैं। यशपाल कमेटी और नेशनल नॉलेज कमीशन की सिफारिश पर सभी यूनिवर्सिटीज में एक समान कानून बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। इस कानून पर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर्स से डिस्कस किया जाना था।
क्या है मुख्य सिफारिशें
पठान कमेटी ने सिफारिश की है कि काउंसिल ऑफ चांसलर्स (सीवीसी) का गठन किया जाए। सीवीसी अप्वाइंटमेंट के साथ ही पॉलिसी और एकेडमिक मैटर पर भी सभी यूनिवर्सिटीज को सलाह दे सकेगी। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचर्स और इंप्लाइज की संख्या, कोर्स व रिसर्च का डिटेल और अन्य संस्थाओं से होने वाले साझा प्रोजेक्ट, एकेडमिक व प्रशासनिक मसलों पर भी अपनी रिपोर्ट यूजीसी को देगी। सीवीसी के गठन से यूनिवर्सिटीज में व्याप्त भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी।