(सांकेतिक फोटो)
एजुकेशन डेस्क। केंद्र सरकार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 5000 वैज्ञानिकों के लिए सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त विद्यालयों एवं कॉलेजों में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। अब इन्हें वर्ष में 12 घंटे का समय स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए देना होगा।
सरकार के इस फैसले की घोषणा करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसके लिए कोई मानदेय प्रदान नहीं किया जाएगा। यह वैज्ञानिकों की ड्यूटी का हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की रूचि एवं विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए एक प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
इस मौके पर जितेंद्र सिंह ने महिला वैज्ञानिकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना 'किरण’ की भी घोषणा की है जिसका मकसद महिलाओं के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समानता सुनिश्चित करना है।