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संजय लीला भंसाली का फलसफा, नाकामी से सीखो और आगे बढ़ जाओ

7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटो: संजय लीला भंसाली)
संजय कहते हैं मैंने मुंबई के लाला लाजपत राय कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। मैं आज तक अपने आप से यह सवाल पूछता आया हूं कि आखिर मैंने कॉमर्स क्यों चुना? ईमानदारी से कहूं तो यह मुझे कभी समझ ही नहीं आया।
उन दिनों आर्ट्स लेना करियर के लिहाज़ से अच्छा नहीं माना जाता था। कॉमर्स ऐसी स्ट्रीम थी जो आपको नौकरी दिला सकती थी। जितना मैं समझने की कोशिश करता हूं शायद यही एक वजह रही मेरे कॉमर्स चुनने की। कॉलेज के दिनों में करियर को लेकर मेरी कोई प्लानिंग नहीं थी। मैं पढ़ रहा था क्योंकि FTII में दाखिले के लिए कम से कम ग्रेजुएट होना ज़रूरी था। फिल्म निर्देशन में उतरने से पहले मैंने अपने बहनोई दीपक के लिए डॉक्यूमेंट्री की एडिटिंग और एडवरटाइजिंग का काम किया। मेरी पहली कमाई थी, 1500 रुपए जो उस वक्त मुझे विनोद चोपड़ा की फिल्म 1942 लव स्टोरी के एक गाने का निर्देशन करने के लिए मिले थे। हालांकि उससे भी पहले शुक्ला दास की एक डॉक्यूमेंट्री के लिए मुझे 1000 रुपये महीना मिलते थे।
नाकामी सीखने का मौका : कई मर्तबा ज़िंदगी में नाकामियों से रूबरू होना पड़ता है। हमेशा की तरह आज भी नाकामी मुझे निराशा से भर देती है। मैं घंटों बैठकर उसपर सोचता रहता हूं कि आखिर ऐसी क्या कमी रह गई? जब अपनी नाकामी को स्वीकार कर लेता हूं तो वही मेरे लिए कुछ नया सीखने का अवसर बन जाती है। मैं नाकामियों से बंधा नहीं रहता, बल्कि उनसे सीखकर आगे बढ़ने और बेहतर होने में यकीन रखता हूं।
फिल्म ख़ामोशी के लिए मुझे समीक्षकों से भरपूर सराहना मिली, मगर आम दर्शकों ने इसे सिरे से नकार दिया। उस वक्त मुझे महसूस हुआ कि मुझसे कहीं ना कहीं कोई चूक ज़रूर हुई थी। इस नाकामी से मैंने बहुत कुछ सीखा क्योंकि मैं अपने आप के प्रति हद से ज्यादा ईमानदार हूं। जीवन के संघर्ष आपके सबसे अच्छे शिक्षक होते हैं। अपनी बात कहूं तो अपने संघर्ष के दौर से मैंने बहुत कुछ सीखा है। यही वजह है कि किसी भी बात को गहरे से जानने के लिए सबसे पहले मैं अपने भीतर झांकता हूं।

काम मेरा जुनून : मेरे अंदर एक ज़बरदस्त वैचारिक प्रक्रिया, विचारों का सतत प्रवाह जारी रहता है। मेरे लिए इस जिंदगी में जो सबसे जरूरी है वह है फिल्में। फिल्म बनाने के अलावा शायद ही कोई ऐसी चीज़ है जो मेरे लिए इतना मायने रखती है। दरअसल फिल्में बनाना महज़ मेरा काम नहीं,बल्कि मेरा जुनून है। फिल्में मेरे वजूद का हिस्सा हैं, मेरी ज़िंदगी का इकलौता मकसद। और हां मैं बुरे कर्मों से दूरी बनाए रखता हूं,क्योंकि मेरा मानना है कि बुरे कर्म हमेशा आप पर पलटकर वार करते हैं।