(सांकेतिक फोटो)
एजुकेशन डेस्क। यूजीसी के एक पैनल ने देश में सात डीम्ड यूनिवर्सिटीज को अनफिट पाया है। यूनिवर्सिटी के एक पैनल की रिपोर्ट देशभर की इन सात डीम्ड यूनिवर्सिटीज को अनफिट मानते हुए सभी डीम्ड यूनिवर्सिटीज के मौजूदा प्रणाली की समीक्षा करते रहने की जरूरत पर बल दिया है। पैनल द्वारा अनफिट पाई गई डीम्ड यूनिवर्सिटीज में चार तमिलनाडु की हैं, जबकि दो हरियाणा और एक राजस्थान की डीम्ड यूनिवर्सिटी है।
पैनल ने तमिलनाडु की जिन डीम्ड यूनिवर्सिटीज को अनफिट पाया है उनमें तमिलनाडु की विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन, सेलम; एकेडमी ऑफ मेरीटाइम एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, कर्थुर; भारत इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च चेन्नई; पोन्नैया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस थंजवुर (सभी तमिलनाडु) और महर्षि मारकंडे यूनिवर्सिटी मुलाना अंबाला; मानव रचना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फरीदाबाद (दोनों हरियाणा) शामिल हैं। इसके अलावा इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन एजुकेशन राजस्थान को भी अनफिट पाया गया है। हालांकि, अभी इन यूनिवर्सिटीज को लेकर कोई अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही हो पाएगा।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पैनल रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। यूजीसी पैनल ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए 30 सितंबर की समयावधि के भीतर ही अपना काम पूरा कर लिया। यूजीसी की रिव्यू कमेटी ने सभी डीम्ड यूनिवर्सिटीज के मौजूदा प्रणाली की समीक्षा करते रहने की जरूरत पर बल दिया है।
छात्रों के भविष्य के साथ समझौता नहीं
उधर, यूजीसी सूत्रों ने कहा है कि पैनल की रिपोर्ट का यह बिल्कुल मतलब नहीं कि इन डीम्ड यूनिवर्सिटीज से उनका स्टेटस छीनकर बंद ही कर दिया जाएगा। यूजीसी सूत्रों के मुताबिक छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा, इसलिए ये संस्थान किसी दूसरी यूनिवर्सिटी से एफिलेशन से लेकर पठन-पाठन का कार्य कर सकते हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2009 में टंडन कमेटी ने देशभर में कुल 41 संस्थानों को अनफिट पाया था।पैनल द्वारा अनफिट पाए गए सात संस्थान इन्हीं में से हैं। यूजीसी सूत्रों के मुताबिक टंडन कमेटी की रिपोर्ट के पांच साल बीतने के बाद 41 में से 34 संस्थानों ने डीम्ड यूनिवर्सिटी के मद्देनजर काफी इम्प्रूवमेंट किया। लिहाजा कमेटी ने इन 34 डीम्ड यूनिवर्सिटी को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए रिकमेंड करते हुए इन्हें क्लीयर घोषित कर दिया है।