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Google दे सकता है आपको इंटर्नशिप का मौका, बस अप्लाय करते समय रखें इन बातों का ध्यान

जॉब से पहले इंटर्नशिप अब स्टूडेंट्स के लिए खासी अहमियत रखती है, विशेष रूप से बड़ी कंपनियों की इंटर्नशिप्स।

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 03:21 PM IST

एजुकेशन डेस्क. जॉब से पहले इंटर्नशिप अब स्टूडेंट्स के लिए खासी अहमियत रखती है, विशेष रूप से बड़ी कंपनियों की इंटर्नशिप्स। यहां से की गई इंटर्नशिप्स स्टूडेंट्स को काफी फायदा देती हैं, लेकिन इन्हें हासिल करना उतना ही मुश्किल होता है। उदाहरण के तौर पर गूगल में इंटर्नशिप का ऑफर हासिल करना हार्वर्ड जैसे टॉप प्रतिष्ठित स्कूल में एडमिशन से भी मुश्किल है। लेकिन काबिल उम्मीदवार अगर सही दिशा में कोशिश करें तो यह असंभव भी नहीं है।

यहां आप गूगल की इंटर्नशिप प्रक्रिया के उदाहरण से समझ सकते हैं कि किसी भी इंटर्न के लिए बड़ी कंपनियों की प्राथमिकता क्या होती है और कैसे यहां इंटर्नशिप हासिल की जा सकती है। ये टिप्स इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।

इन तरीकों से कर सकते हैं गूगल इंटर्नशिप के लिए अप्लाय

एम्प्लाई रेफरल - अगर गूगल में कोई आपका परिचित हो तो उसे खुदको रेफर करने के लिए कहें। आप उन प्रोफेशनल्स को लिंक्डइन या फेसबुक पर तलाश सकते हैं।

जब सलेक्ट हो जाए रेज्यूमे - सबसे पहले रिक्रूटिंग टीम आपके रेज्यूमे का आकलन करती है और अगर आप रोल के लिए फिट साबित होते हैं तो आपको टेक्निकल इंटरव्यूज की पूरी सीरीज में शामिल होना होगा। इनमें से कुछ फोन पर होंगे, कुछ सोशल मीडिया पर या फिर गूगल के देश में स्थित ऑफिसों (गुड़गांव, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु) में इन पर्सन देने होंगे। ज्यादातर इंटरव्यू डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम पर फोकस्ड होते हैं जिनमें कुछ जनरल कोडिंग से जुड़े सवाल होते हैं।

ऑनलाइन एप्लीकेशन - गूगल कॅरिअर्स सेक्शन में जाकर आप इंटरर्नशिप के लिए अप्लाय कर सकते हैं। इसके लिए आप https://careers.google.com/students/ देख सकते हैं। यहां स्टूडेंट्स इंटर्नशिप के अलावा स्कॉलरशिप व ग्रांट्स से जुड़े अवसरों के बारे में जान सकते हैं। इंटर्नशिप के लिए आपको सीधे वेबसाइट से ही अप्लाय करना होगा।

आगे की स्लाइड में पढ़ें कैसे करें सिलेक्शन के बाद की तैयारी...

मजबूत तैयारी के स्टेप्स, इस प्रक्रिया से गुजरना होगा

 

साइड प्रोजेक्ट्स : रिक्रूटर्स यह देखते हैं कि कहीं आपने खुद को महज एकेडमिक्स तक तो सीमित नहीं रखा है। ऐसे में उन्हें बताएं कि क्लासरूम के बाहर भी प्रोजेक्ट्स हैं जिनमें आपकी रुचि है। इसके लिए कोई वेबसाइट या एप तैयार करके उसका जिक्र रेज्यूमे में कर सकते हैं। किसी छोटे स्टार्टअप से जुड़े हों तो उसके बारे में भी लिखें। दूसरे शब्दों में आपको अपने रेज्यूमे से यह समझाना होगा कि आपके पास क्रिएटिविटी, जुनून और कुछ नया करने की ऊर्जा है।

 

हायरिंग कमेटी : इंटरव्यू के बाद इस कमेटी के सदस्य इंटरव्यूअर से मिले आपके फीडबैक का रिव्यू करते हैं। अगर उन्हें आप एक मजबूत कैंडिडेट नजर आते हैं तो आपका चयन होस्ट मैचिंग प्रक्रिया के लिए होता है।

 

होस्ट मैचिंग : यह ऐसी प्रक्रिया है जिसके लिए आपको धैर्य रखना होगा। यहां एेसी टीम्स होती हैं जिन्हें अपने लिए इंटर्न्स की तलाश होती है। अगर यहां कोई होस्ट मिल जाता है तो आपको कुछ टेलिफोनिक इंटरव्यू देने होंगे, जो सामान्य तौर पर नॉन टेक्निकल होते हैं। होस्ट यह तय करने की कोशिश करते हैं कि आप उनकी टीम के लिए बेस्ट फिट साबित होंगे या नहीं। इसलिए इस प्रक्रिया के लिए अपनी तैयारी मजबूत करके जाएं।

 

कनेक्शन्स : किसी अनजान कैंडिडेट की तुलना में किसी गूगलर (गूगल का मौजूदा या पूर्व कर्मचारी) की ओर से रेफर किए गए कैंडिडेट के पास सही लोगों तक पहुंचने के ज्यादा मौके होते हैं। लिंक्डइन इनसे कनेक्ट होने में मदद कर सकता है।

 

एचआर को ईमेल : गूगल के किसी पूर्व कर्मचारी या इंटर्न से एचआर का ईमेल लें। एचआर को सीधे ईमेल करें। एक अच्छे कवर लेटर और रेज्यूमे के साथ उन्हें अपने ईमेल का मकसद बताएं।

 

ऑनलाइन प्रजेंस : इंटर्नशिप के लिए आने वाली हजारों एप्लीकेशन्स के बीच सही उम्मीदवार तय करने के लिए रिक्रूटर्स काफी समय ऑनलाइन सर्च करते हैं। अगर आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो गिटहब से जुड़ें। टि्वटर या क्वोरा के जरिए टेक कम्यूनिटी में शामिल हो सकते हैं। या फिर अपना ब्लॉग स्टार्ट करें।