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GURU MANTRA : बेहतरीन प्रदर्शन में मददगार हो सकता है शत्रु, पढ़ें कैसे

7 वर्ष पहले
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(फोटो : रॉबिन शर्मा, कॉर्पोरेट ट्रेनर)

किसी भी व्यक्ति की बेहतरीन नेतृत्व क्षमता तब सामने आती है, जब लड़ने के लिए उसके सामने कोई शत्रु हो। एक अच्छा प्रतिद्वंद्वी केवल महान लीडर्स को सामने ला सकता है, बल्कि तत्कालीन लीडर्स में से भी सर्वश्रेष्ठ को उभारता है।
सुरक्षातंत्र होता है सक्रिय
अब प्रश्न यह उठता है कि किसी भी स्थिति में जब हमारा सामना दुश्मन से होता है, तब ही बेहतर नेतृत्व क्षमता क्यों सामने आती है? इसका बिल्कुल सटीक जवाब विकासवादी मनोवैज्ञानिकों के पास है। उनका तर्क है कि मानवीय व्यवहार का अधिकांश हिस्सा उन मनोवैज्ञानिक अनुकूलनों के द्वारा उत्पन्न होता है, जो मानव पैतृक परिवेश की समस्याओं को सुलझाते हुए विकसित हुए हैं। उदाहरण के लिए ऑटोमोबाइल से टकराने की संभावना मकड़ी के काटने की संभावना से कहीं अधिक होती है। बावजूद इसके हम ऑटोमोबाइल की तुलना में मकड़ी से अधिक डरते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, दो लाख से अधिक सालों से इंसान ने नियमित रूप से जंगलों में मकड़ी और सांपों का सामना किया है, जहां उनके जहर ने उसे नुकसान भी पहुंचाया है, जिससे बचने के लिए हमारी रक्षात्मक प्रक्रिया का निर्माण हुआ। इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि हमारे आस-पास मौजूद खतरों से बचने के लिए ही हमारे शरीर ने स्वत: अपना सुरक्षा तंत्र विकसित कर लिया, जहां खतरे ने प्रेरक तत्व का काम किया।
विपरीत परिस्थितियों में अधिक सचेत
शत्रु के मामले में भी कुछ ऐसा ही होता है। जब हम उससे सामना करते हैं, तो रक्षा प्रक्रिया को स्वत: विकसित करते चले जाते हैं और आगे चलकर यह हमारी खूबियों को सामने लाने में हमारे लिए मददगार साबित होता है। इसके अलावा यह हमें नेतृत्व से जुड़ी समस्याओं का जवाब देने में मददगार है क्योंकि हमारा प्राकृतिक चयन हमें अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए वर्षों से तैयार कर रहा है। ऐसा सभी तरह की विपरीत परिस्थितियों के लिए होता आया है। चाहे वह चीते का हमला हो या जंगल के अन्य खतरे, हमारी मानसिक और शारीरिक प्रक्रियाएं और सभी अप्रत्यक्ष तंत्रिकीय मनोवैज्ञानिक क्रियाएं शत्रु से सामना होने पर पहले से अधिक सक्रिय हो जाती हैं। हम और अधिक सचेत हो जाते हैं, दिमाग पहले की अपेक्षा तेज गति से काम करने लगता है। किसी भी तरह उस खतरे से बचने की कोशिश करते हैं।
प्रतिद्वंद्वी, बना सकता है सर्वश्रेष्ठ
आज भी एक प्रतिद्वंद्वी हमारे भीतर से सर्वश्रेष्ठ को बाहर ला सकता है और हम उन परिस्थितियों में सबसे अधिक उपाय कुशल प्रतीत होते हैं, जो हमारे अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं, किंतु व्यापारिक परिस्थितियों में इस तरह के दुश्मन हम कहां ढूंढ़ सकते हैं? सच में, व्यवसाय में शत्रु प्रतिस्पर्धा में खोजे जा सकते हैं। हालांकि, यह हमेशा व्यावहारिक नहीं होता। अच्छी खबर यह है कि शत्रुओं को हमेशा इंसान की शक्ल में प्रकट होने की जरूरत नहीं होती। जैसा कि वॉशिंगटन के मामले में हुआ, उन्होंने फ्रांसीसी और ब्रिटिश शत्रुओं का सामना किया। आपका दुश्मन प्रतीकात्मक या वैचारिक भी हो सकता है।
नकारात्मक वैचारिकता के खिलाफ लड़े
मार्टिन लूथर किंग जूनियर किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं लड़े, बल्कि नकारात्मक वैचारिकता के खिलाफ लड़े। उनके नेतृत्व में विभिन्न जातियों के 2.5 लाख से भी अधिक लोग एक साथ इकट्ठे होकर लिंकन स्मारक से राष्ट्रीय मॉल तक पहुंचे। ऐसा ही उदाहरण हम जैक वेल्च के मामले में देख सकते हैं, जिन्होंने धीमी अर्थव्यवस्था और उत्पादन गिरावट के खिलाफ लड़ाई की थी। सार यही है कि एक अच्छा शत्रु, चाहे वह इंसानी रूप में हो या वैचारिक रूप में, हमेशा आपको ऊपर बढ़ाने में मदद करता है। अपने अंदर के शत्रु को पहचानना आपके बेहतर प्रदर्शन में मददगार होता है।