Hindi News »Self-Help »Career Tips» Know All About Crowdfunding

अगर आपके पास है Idea, तो यहां से मिल सकता है उसके लिए फंड

एक ऐसा आइडिया जो दूसरों से अलग है, आपकी पहचान बनाने के लिए काफी होता है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 16, 2016, 12:05 AM IST

  • एजुकेशन डेस्क। एक ऐसा आइडिया जो दूसरों से अलग है, आपकी पहचान बनाने के लिए काफी होता है। हालांकि, पैसों की कमी के चलते कई बार आइडिया फ्लॉप हो जाता है। ऐसे में वो यूजर्स जिनके पास आइडिया है लेकिन पैसा नहीं, वो क्राउडफंडिंग के जरिए उसे कामयाब कर सकते हैं। इन दिनों टेक फील्ड में नए इनोवेशन के लिए इसके इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या होती है क्राउडफंडिंग...
    क्राउडफंडिंग एक प्रकार से चंदा जुटाने जैसा है। इसमें लोग अपने जानने वाले और अजनबियों से किसी काम के लिए चंदा जुटाने के लिए कहते हैं। आमतौर पर इसमें किसी खास उद्देश्य या विज्ञान आदि के प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा जुटाने की अपील की जाती है। अधिकांश मामलों में चंदा इंटरनेट पर मांगा जाता है। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।
    तीन तरह के एक्टर्स :
    क्राउडफंडिंग में तीन तरह के एक्टर्स काम करते हैं। इसमें एक वो होता है, जो किसी आइडिया या प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाने का प्रयास करता है। दूसरा उन व्यक्तियों का समूह या कम्यूनिटी होती है जो पैसा देते हैं। इस क्रम में तीसरा और एक महत्वपूर्ण एक्टर वो वेबसाइट होती है, जिसे प्लेटफॉर्म बनाकर पैसा जुटा या जाता है।
    आगे की स्लाइड्स पर जानिए क्राउडफंडिंग से जुड़ी अन्य बातें...
  • कैसे करें क्राउडफंडिंग :
    ऐसे यूजर्स जो अपने आइडिया के लिए क्राउडफंडिंग करना चाहते हैं, उन्हें ऐसी वेबसाइट पर विजिट करना होगा जो क्राउंडफंडिंग का काम करती हैं। यहां पर उसे अपने आइडिया या प्रोडक्ट के लिए कैम्पेन शुरू करना होगी। इसके लिए यूजर को रजिस्टर करना होगा। इन वेबसाइट्स पर जाकर अपना एक लॉगइन आईडी बनाना होता है। साथ ही, आइडिया या प्रोडक्ट से जुड़ी सभी जानकारी देना होती है। आपको कितने फंड की जरूरत है इस बात की भी जानकारी देनी होगी। आपके आइडिया को वेबसाइट प्रमोट करके लाखों यूजर्स तक पहुंचाती हैं, इनमें से ही कई फंड भी देते हैं।
    क्राउडफंडिंग जुटाने की कुछ वेबसाइट्स :
    www.indiegogo.com
    www.kickstarter.com
    www.ketto.org
    www.crowdfunder.com
    www.catapooolt.com
    www.filmproposals.com
  • तेजी से बढ़ रही इंडस्ट्री :
    दुनियाभर में क्राउडफंडिंग इंडस्ट्री बेहद तेजी से बढ़ रही है। माससॉल्यूशन ने अपनी एक क्राउडफंडिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट में बताया कि 2012 में ही यह इंडस्ट्री 2.7 अरब डॉलर की हो गई थी। दुनियाभर में इस साल 10 लाख से भी ज्यादा प्रोजेक्ट्स के लिए लोगों ने चंदा दिया था। इनमें नए उपकरण बनाने से लेकर विदेश घूमने तक जैसी बातों के लिए अनजान लोगों ने इंटरनेट पर दूसरों की मदद की। 2013 में यह इंडस्ट्री बेहद तेजी से बढ़ी। क्राउडसोर्सिंग ने 2013 के शुरुआत में ही अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि यह इंडस्ट्री बेहद तेजी से बढ़ रही है और यह अब 6 अरब डॉलर की हो गई है। 2014 में तो इसमें करीब 167 फीसदी का इजाफा हुआ और ये 16.2 अरब डॉलर की इंडस्ट्री बन गई। माससॉल्यूशन की रिपोर्ट के मुताबि क 2015 में यह इंडस्ट्री करीब 34.4 अरब डॉलर से ज्यादा की हो चुकी है।
  • एशिया में तेज बढ़ रही इंडस्ट्री :
    क्राउडफंडिंग करने के मामले में नॉर्थ अमेरिका का क्षेत्र पिछले कुछ सालों में सबसे आगे रहा है। 2014 में इस क्षेत्र में फंडिंग करने के मामले में 145 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इस दौरान यहां से 9.46 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। वैसे इंटरनेट पर मदद करने में एशिया सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। 2014 में यहां पर क्राउडफंडिंग ट्रेंड में 320 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यहां से 2014 में 3.4 अरब डॉलर जमा किए गए हैं। एशिया क्षेत्र के अलावा यूरोप में भी यह ट्रेंड काफी जोर पकड़ रहा है। 2014 में यूरोप से 3.26 अरब डॉलर जुटाए गए हैं।

  • क्राउडफंडिंग की देन है पेबल स्मार्टवॉच :
    स्मार्टवॉच की दुनिया में पेबल एक बड़ा नाम है। पेबल स्मार्टवॉच आज शायद दुनिया को नहीं मिल पाती यदि क्राउडफंडिंग का ट्रेंड जोर न पकड़ता। क्राउंडफंडिंग वेबसाइट किकस्टार्टर पर इस स्मार्टवॉच प्रोजेक्ट को एक माह के अंदर ही एक करोड़ डॉलर की सहायता मिल गई थी और ये प्रोजेक्ट आगे बढ़ा था। यह तो मात्र एक उदाहरण है। आज लाखों प्रोजेक्ट को क्राउडफंडिंग के कारण आर्थिक मदद मिल रही है। इसमें उड़ने वाली कार से लेकर माइक्रो थ्रीडी प्रिंटर जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। अमेरिका के एक जोड़े ने तो अफ्रीका में हनीमून मनाने के लिए भी क्राउडफंडिंग की मदद ली है। ये ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है, जिसने पूरी दुनिया बदल दी है। जिन लोगों के पास आइडिया है या उन्हें पैसों की जरूरत है उन्हें लोग मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। यानी इंटरनेट पर भी दान बढ़ रहा है।

  • ये 3 बातें भी जानिए :
    1. क्राउडफंडिंग का ट्रेंड पश्चिमी देशों से आया है। 2008 में मंदी के समय वहां पर फिल्ममेकर्स, आर्टिस्ट, म्यूजिशियन, इनोवेटर्स आदि कोअपने प्रोजेक्ट के लिए पैसों की दिक्कत आई। ऐसे में उन्होंने इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म्स को पैसे जुटाने का माध्यम बनाया। अमेरिका की किकस्टार्टर वेबसाइट इस क्रम में पहली सबसे पॉपुलर वेबसाइट बनकर 2009 में सामने आई।
    2. अमेरिका की प्रतिष्ठित वेबसाइट किकस्टार्टर अपनी वेबसाइट पर लोगों को अपने प्रोजेक्ट की समरी एक तय समय सीमा के लिए अपलोड करने का अवसर देती है। कितने पैसे की जरूरत है उसे भी बताना होता है। यदि प्रोजेक्ट डालने वाला व्यक्ति अपना लक्ष्य पा लेता है तो किकस्टार्टर उसमें से 15 से 20 फीसदी रकम अपने पास रखती है, बाकि उन्हें दे देती है। ऐसे ही अधिकांश वेबसाइट्स करती हैं।
    3. पिक अ वेंचर नाम की वेबसाइट भारत की संभवत: पहली क्राउडफंडिंग वेबसाइट है। इसे स्टैनफोर्ड ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस की एमबीए स्टूडेंट रुचि डाना ने लॉन्च किया था। यह आन्त्रप्रेन्योर को न केवल फंडिंग करवाती है बल्कि लीगल और कंपनी रजिस्ट्रेशन के मामलों में भी गाइडेंस देती है। कैम्पेन्स को लेकर भी यह काफी मदद करती है।

  • क्राउडफंडिंग के दो मॉडल :
    इस समय दुनियाभर में क्राउडफंडिंग दो तरह के मॉडल पर काम कर रही है। इसमें पहला है डोनेशन बेस्ड फंडिंग। क्राउडफंडिंग कॉन्सेप्ट का जन्म इसी मॉडल से हुआ है। इसमें लोग किसी अच्छे प्रोडक्ट या सर्विस के लिए पैसा दान करते हैं, ताकि बाद में उन्हें वह प्रोडक्ट मिल सके। क्राउडफंडिंग का दूसरा मॉडल है इंवेस्टमेंट क्राउडफंडिंग। यह आजकल सबसे अधिक चलन में है। इस तरह के मॉडल में पैसे देने वाला शख्स उस कंपनी या प्रोडक्ट में हिस्सेदारी ले लेता है और बाद में उसे रिटर्न प्रॉफिट के रूप में मिलता है।

  • स्टार सिटीजन का रिकॉर्ड :
    स्पेस कॉमबैट वीडियो गेम स्टार सिटीजन अब तक क्राउडफंडिंग से सबसे अधिक पैसा जुटाने वाला प्रोजेक्ट है। इस गेम को क्लाउड इंपीरियम गेम्स बना रही है, जिसके फाउंडर क्रिस रॉबर्ट्स हैं। रॉबर्ट्स ने अपने इस गेम प्रोजेक्ट को किकस्टार्टर वेबसाइट और अपनी पर्सनल वेबसाइट पर क्राउडफंडिंग के लिए डाला था। उनका लक्ष्य क्राउडफंडिंग से पांच लाख डॉलर जुटाना था, लेकिन उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए 7 करोड़ 76 लाख 80 हजार डॉलर मिल गए। स्टार सिटीजन का नाम इस कारण गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज कर लिया गया है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Career Tips

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×