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जिद को जुनून बनाने से मिलती है जीत, रंगसूत्र : 50 देशों में करोड़ों का कारोबार

7 वर्ष पहले
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एजुकेशन डेस्क। कोलकाता में जन्मी सुमिता घोष ने मुंबई में पढ़ाई की और अमेरिका से मास्टर डिग्री हासिल की। उन्हें लीडरशिप के लिए इंटरनेशनल फेलोशिप भी मिली है।1990 के दशक में सुमिता घोष और उनके पति संजोय घोष ने राजस्थान के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के लिए काम किया। सुमिता घोष संजोय घोष कुछ दिन असम में रहे। वहां वे हस्तशिल्पियों का उद्धार करना चाहते थे, पर उल्फा आतंकियों ने संजोय का अपहरण कर लिया। पति नहीं लौटे तो सुमिता गुडगांव शिफ्ट हो गईं। राजस्थान असम के हस्तशिल्पियों के हितार्थ काम करते हुए सुमिता ने देखा था कि भारतीय गांवों के हस्तशिल्पी अपने काम में तो माहिर हैं, पर उत्पादों की मार्केटिंग कर पाने के कारण उन्हें अपने परिश्रम का वाजिब रिटर्न नहीं मिलता। इन हस्तशिल्पियों की स्किल डेवलप हों और वे टीम बनाकर काम करें- इस सोच के साथ सुमिता ने 2006 में 1000 शिल्पियों को भागीदार बनाकर स्थापित की रंगसूत्र क्राफ्ट्स इंडिया।
50 देशों में करोड़ों का कारोबार

रंगसूत्र ने कपड़े की बुनाई, डाईंग, डिजाइनिंग, क्वालिटी कंट्रोल पर हस्तशिल्पियों को सपोर्ट प्रदान किया। दूसरे ही साल रंगसूत्र मुनाफा अर्जन करने लगी और निवेशक हस्तशिल्पियों को डिविडेंड मिला तो उन्हें पहली बार मालिक होने का अहसास हुआ। फैब इंडिया आइकिया जैसे राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय ब्रांड से भारत की ग्रामीण महिला हस्तशिल्पियों को जोड़ने वाली सुमिता यहीं नहीं रुकी हैं। विगत 3 वर्षों में 10 हजार हस्तशिल्पियों को रंगसूत्र ने ट्रेन किया है। रंगसूत्र कृषि भूमि पर कपास की खेती भी करने लगी है, जिससे 3000 से ज्यादा किसान लाभान्वित हुए हैं। दुनिया के 50 देशों में फर्नीचर, किचन और घरेलू सामान बेचने वाले आइकिया रिटेल स्टोर्स अब भारतीय हस्तशिल्पियों के कुशन, पिलो, टेबल बेड कवर्स भी बेच रहे हैं। सारी दुनिया देश में इन उत्पादों की रिटेल सेल ने राजस्थान, उत्तरांचल और असम की हजारों ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदल डाला है। पिछले एक दशक में 10 हजार हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षित कर रोजगार योग्य बनाने वाली सुमिता घोष इस बात की मिसाल हैं कि जिद जुनून में बदल जाए तो बड़ी से बड़ी निजी क्षति भुलाकर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रंगसूत्र आज सालाना 7 करोड़ रुपए का व्यापार कर रही है, पर इससे महत्वपूर्ण है ग्रामीण हस्तशिल्पियों की सोच जीवन बदलने का मुकाम।