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आईएएस रोड मैप: खुली सोच के साथ करें सिविल सर्विसेज की तैयारी

7 वर्ष पहले
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(सांकेतिक फोटो)
खुली सोच रखने वाला व्यक्ति निर्णय देने में कभी जल्दबाजी नहीं करता, न ही पर्याप्त तथ्यों के बिना किसी मुद्दे को जरूरी या गैर-जरूरी करार देता है। असल में ओपन माइंड की खूबी सिविल सेवा परीक्षा देने वाले किसी भी उम्मीदवार के लिए सबसे बड़ी पूंजी होती है।

एक प्रजातांत्रिक व्यवस्था में यह बेहद जरूरी है कि सिविल सेवक समय-समय पर होने वाले बदलाव के लिए और शासन प्रणाली की मूल विचारधारा पर पुनर्विचार करने के लिए संकुचित मानसिकता न रखते हुए अपनी सोच को विस्तार दे। यहां मेरा मतलब ओपन माइंड से है। एक पूर्वाग्रही मानसिकता प्रजातांत्रिक प्रणाली में सबसे बड़ी रुकावट होती है। खुशकिस्मती से देश में सिविल सेवा बदलते समय के साथ कदमताल करने में कामयाब हुई है। ऐसे में तैयारी करते हुए यह अहम होगा कि किसी भी मसले के अच्छे और बुरे पहलुओं पर गौर किया जाए।
राष्ट्रीय मुद्दों को गहराई से समझें
राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली बहस का नियमित विश्लेषण भी जरूरी है। यह बहस के दौरान उठाए गए मुद्दों को गहराई से समझने का एक बेहतरीन तरीका है। इस प्रक्रिया को अगर पर्याप्त तैयारी के साथ किया जाए और एेतिहासिक महत्व से जोड़ने की कोशिश की जाए तो एक नया दृष्टिकोण सामने आता है। सिर्फ वही उम्मीदवार मौजूदा परिस्थितियों को बदल सकते हैं जो अपनी सोच को सक्रियता से काम में लेते हैं और समस्याअों का हल निकालने की क्षमता रखते हैं।
समय-समय पर जरूरी है विजनिंग ब्रेक
इंटरव्यू बोर्ड और सिविल सर्विस ट्रेनर्स भी उम्मीदवार में ‘मौलिकता’ की इसी चमक को तलाश करता है। यहां सवाल यह उठता है कि तैयारी को कदम दर कदम अंजाम देने की प्रक्रिया मेंं स्पीड किस तरह हासिल की जाए? मेरा सुझाव यह होगा कि सपने देखना सीखिए। देश की सेवा के लिए तत्पर एक ऑफिसर के रूप में अपने करियर का सपना देखना काफी महत्व रखता है। इसके अलावा तैयारी के दौरान आपको समय-समय पर ‘विजनिंग ब्रेक’ यानी दूरदर्शिता के लिए वक्त निकालना चाहिए। मन में कोई शंका हो तो किसी वरिष्ठ की मदद लें।
तर्क-वितर्क के लिए हमेशा खुला हो दिमाग
पब्लिक अफेयर्स, प्रतियोगिताओं व प्रश्नोत्तरियों में भाग लेकर अपने दृष्टिकोण को विस्तार दें। अगर किसी व्यक्ति के दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं तो उसे बदलने की हिम्मत भी रखें। सिर्फ खुली सोच ही बदलाव को अमल में ला सकती है। हालांकि ध्यान रखें कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की खोजबीन की गई हो। यदि तथ्यों में बदलाव हुआ है तो उसे भी आत्मसात करने की जरूरत होती है। सुनिश्चित करें कि आपका दिमाग तर्क-वितर्क के लिए हमेशा खुला हो। याद रखें जरूरत से ज्यादा विश्लेषण करने वाला दिमाग तर्क के महत्व को खत्म कर देता है। इसलिए जरूरी है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के शुरुआती दिनों से ही आचार और विचार में संतुलन बना कर चला जाए।
- लेखक डॉ. बी अशोक आईएएस हैं।