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टॉपिक ऑफ द वीक: स्कॉटलैंड और ब्रिटेन रहेंगे साथ-साथ

7 वर्ष पहले
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स्कॉटलैंड में अब तक का सबसे बड़ा जनमत संग्रह इस बात को लेकर हुआ है कि स्कॉटलैंड को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए या नहीं। करीब 42 लाख 85 हजार मतदाताओं का फैसला इंग्लैड के पक्ष में गया और ब्रिटेन और स्कॉटलैंड का 307 वर्ष का साथ बना रहना तय हुआ।
स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह का परिणाम इंग्लैड के पक्ष में गया और ग्रेट ब्रिटेन का वजूद बना रहा। हालांकि आजादी चाहने वाले और न चाहने वालों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं रहा, लेकिन ज्यादा लोगों ने अपना भविष्य ग्रेट ब्रिटेन के साथ ही देखा। स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह इस बात को लेकर हुआ कि स्कॉटलैंड को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए या नहीं। करीब 42 लाख 85 हजार मतदाताओं ने इस जनमत संग्रह में हिस्सा लिया, जो स्कॉटलैंड की आबादी का करीब 97 फीसदी है।
इस जनमत संग्रह में 16 साल से ऊपर के नागरिकों को भी वोटिंग का अधिकार दिया गया। यह स्कॉटलैंड में अब तक का सबसे बड़ा जनमत संग्रह है। ब्रिटेन के इतिहास में यह पहला मौका है,जब स्कॉटलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के लिए जनमत संग्रह कराया गया है। यदि स्कॉटलैंड की जनता का बहुमत स्वतंत्र राष्ट्र के पक्ष में होता, तो शेष ब्रिटेन के साथ बातचीत और समझौते के बाद 24 मार्च, 2016 को स्कॉटलैंड स्वतंत्र राष्ट्र बन जाता।
दरअसल इस जनमत संग्रह की पृष्ठभूमि अक्टूबर, 2012 में तैयार हो गई थी जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और स्कॉटलैंड के पहले मंत्री एलेक्स साल्मंड (स्कॉटिश नेशनल पार्टी) ने एडिनबर्ग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत स्कॉटलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के लिए 2014 में जनमत संग्रह कराने का समझौता हुआ था। इससे पहले भी साल 1979 और 1997 में स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह हुआ था।
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