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जिद किया और बदल डाली दुनिया, ये हैं किशोर से कामयाब उद्यमी माइकल डेल

7 वर्ष पहले
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तेज चलने वाले जिंदगी के हर मैदान में खेल की तरह दौड़ लगाते हैं। ऐसे लोगों को सही समय पर, सही सुविधा व मार्गदर्शन के साथ मौका मिल जाए तो वे दूसरों से आधी उम्र में शिखर पर पहुंच जाते हैं। नि:संदेह तेज दौड़ लगाने के कारण उनसे चूक भी होती है, पर वे अपनी भूल सुधारने में भी देर नहीं करते। दुनिया के 44वें सबसे धनी माइकल डेल इस श्रेणी के सफल उद्यमी हैं।
कारोबारी जगत में प्रवेश करने की माइकल डेल को इतनी जल्दी थी कि उनकी जिद पर उनके पिता ने स्कूल प्रबंधकों से अनुमति मांगी कि सात वर्षीय माइकल को हाईस्कूल समकक्ष परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। डेल के मां-पिता रूढ़िवादी यहूदी थे। मां एक सामान्य गृहिणी थी। पिता स्टॉक ब्रोकिंग के कारोबार से अच्छी कमाई कर रहे थे। माइकल डेल को कम्प्यूटर खूब लुभाता था। यह जादुई बॉक्स कैसे काम करता है, इस जिज्ञासावश एक दिन उन्होंने एप्पल 2 कम्प्यूटर के पुर्जे अलग-अलग करके खुद ही असेम्बल कर दिए। मेमोरियल हाईस्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने ‘ह्यूस्टन पोस्ट’ के ग्राहक बनाना शुरू किया। ऐसा करते हुए उन्होंने किशोर उम्र में एक साल में 18000 डॉलर कमाने का कीर्तिमान बनाया। इस उम्र में ही माइकल अपनी कमाई शेयर व धातु मार्केट में निवेश करने लगे। वे 19 वर्ष के हुए तो स्टॅाक ब्रोकर पिता ने उन्हें मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में दाखिला दिलवा दिया, पर वे डॉक्टर नहीं बनना चाहते थे। वे तो व्यापार करने के लिए जन्मे थे। माइकल डेल ने पिता को नाराज करते हुए जब मेडिक ल कॉलेज छोड़ा तब उनके पास अपनी नकद बचत थी 1000 डॉलर।
अपने नाम को ब्रांड बनाने का निर्णय
छोटे-से कारोबार से मिली पहली सफलता ने माइकल डेल का आत्मविश्वास इतना बढ़ा दिया कि सन् 1988 में उन्होंने अपने नाम को ब्रांड बनाने का साहसिक निर्णय ले लिया। पीसी कम्प्यूटर्स लिमिटेड को उन्होंने डेल कम्प्यूटर्स के नाम से रजिस्टर करवाया और पब्लिक इश्यू के जरिए 80 मिलियन डॉलर इकट्ठा किए। आगामी चार साल में डेल कम्प्यूटर्स का कारोबार इतना बढ़ गया कि सन् 1992 में माइकल डेल सबसे कम उम्र (27 वर्ष) में ऐसी कंपनी के संस्थापक सीईओ घोषित कर दिए गए, जो दुनिया की 500 बड़ी कंपनियों में एक थी। सन् 1996 में उन्होंने सर्वर लॉन्च किया, अचल सम्पदा क्षेत्र में प्रवेश किया और होम एन्टरटेन सिस्टम व पर्सनल डिवाइसेस भी बनाने लगे। सन् 1998 में अपने व अपने परिवार के निवेश पर अधिकतम मुनाफा कमाने की मंशा से माइकल डेल ने एमएसडी कैपिटल की स्थापना की और शेयरों व सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग, प्राइवेट ईक्विटी में लेन-देन व रीयल एस्टेट मार्केट में खरीद-फरोख्त करने लगे। माइकल डेल ने न्यूयॉर्क, सांता मोनिका व लंदन में कार्यालय खोलकर उन्हें प्रोफेशनल्स के सुपुर्द किया और खुद वॉच डॉग बनकर दैनिक गतिविधियों से दूर होने लगे। उनके अनुसार, मैंने जो भी कारोबार किया, उसमें ग्राहकों को ऑनलाइन बेहतर सेवा देने की कोशिशों को प्राथमिकता दी है। जो तेज गति से दौड़ते हैं, वे अक्सर दुर्घटना भी कर बैठते हैं। सन् 2010 में निवेशकों को आधी-अधूरी जानकारी देने व अकाउंटिंग में गड़बड़ी के लिए माइकल डेल ने जहां 4 मिलियन डॉलर दंड चुकाया है, वहीं उनके द्वारा स्थापित माइकल सुजैन फाउंडेशन सारी दुनिया खासकर अमेरिका व भारत के बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है।
पर्सनल कम्प्यूटर बेचने का नया तरीका
माइकल डेल ने सन् 1984 में पर्सनल कम्प्यूटर बेचने का नया तरीका खोजा और इसकी ऐसी ही दिलचस्प शुरुआत भी की। माइकल डेल 1000 डॉलर से एक रहवासी भवन के अपार्टमेंट में कम्प्यूटर अपग्रेडेशन का छोटा कारोबार करने लगे। कम्प्यूटर निर्माता तब मध्यस्थों यानी कम्प्यूटर शॉप्स के जरिए ग्राहकों को कम्प्यूटर बेचते थे। ये मध्यस्थ ही ग्राहकों को ‘बिक्री बाद सेवा’ प्रदान करते थे। माइकल डेल ने निर्णय लिया कि वे कस्टमाइज्ड कम्प्यूटर सीधे ग्राहकों को बेचेंगे। वे फोन कॉल्स, मेल व रूबरू मुलाकात से ग्राहकों की जरूरत समझकर उन्हें ब्रांडेड कम्प्यूटर अपग्रेड के साथ उपलब्ध करवाने लगे। इसके साथ ही वे अतिरिक्त सॉफ्टवेयर्स व उपकरणों के किट्स भी उन्हें बेचने लगे। इस सुविधा को ग्राहकों ने पसंद किया तो माइकल डेल ने एक कंपनी स्थापित की पीसी लिमिटेड। कंपनी के कस्टमाइज्ड कम्प्यूटर की कीमत तुलनात्मक रूप से कम थी अत: पीसी लिमिटेड का कारोबार तेजी से दौड़ने लगा।